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यादें: बॉलीवुड के बड़े कलाकारों को जौहड़ी गांव के छप्पर तक खींच लाई थी शूटर दादी, पढ़िए शूटिंग से फिल्म तक की कहानी

Fri, 30 Apr 2021 04:46 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 30 Apr 2021 04:46 PM IST
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Meerut News: Do you know that the full story of shooter Dadi Chandro Tomar from the shooting to the film
शूटर दादी चंद्रो तोमर के साथ तापसी पन्नू - फोटो : अमर उजाला

बागपत की शूटर दादी चंद्रो तोमर की कामयाबी की कहानी सैकड़ों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। जौहड़ी गांव के छप्पर की शूटिंग रेंज में साधा गया पहला निशाना दस पर लगा तो इसके बाद चंद्रो तोमर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पिछले 21 साल में वह देश की बालिकाओं और बुजुर्गों के लिए प्रेरणा बनीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति बटोरी और राष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक पदक जीतने में कामयाब हुई। मायानगर के कलाकार उन पर फिल्म बनाने गांव तक पहुंचें।

Meerut News: Do you know that the full story of shooter Dadi Chandro Tomar from the shooting to the film
शूटर दादी चंद्रो तोमर - फोटो : अमर उजाला

शामली के गांव मखमूलपुर में शूटर दादी का जन्म एक जनवरी 1932 को हुआ। सोलह साल की उम्र में जौहड़ी के किसान भंवर सिंह से उनकी शादी हो गई। भरे-पूरे परिवार में निशानेबाजी सीखने की दिलचस्प कहानी है। साल 1998 में जौहड़ी में शूटिंग रेंज की शुरुआत डॉ. राजपाल सिंह ने की। लाडली पौत्री शेफाली तोमर को निशानेबाजी सिखाने के लिए वह रोज घर से शूटिंग रेंज तक जाती। शेफाली शूटिंग सीखती और चंद्रो तोमर देखती रहती। एक दिन चंद्रो तोमर ने एयर पिस्टल शेफाली से लेकर खुद निशाना लगाया। पहला निशाना दस पर लगा... दादी की निशानेबाजी देख रहे बच्चों ने तालियां बजाई। यहीं से शुरू हुआ चंद्रो तोमर की निशानेबाजी का सफर।

Meerut News: Do you know that the full story of shooter Dadi Chandro Tomar from the shooting to the film
शूटर दादी चंद्रो तोमर - फोटो : अमर उजाला

घर के अलावा वह शूटिंग रेंज में अभ्यास करने लगी। इसी साल चंडीगढ़ में आयोजित नेशनल में शूटर दादी ने रजत पदक जीता। शूटर दादी ने राष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक पदक जीते हैं, जबकि उन्हें ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली। 21 साल के सफर में शूटर दादी का लोगों ने लोहा माना। बालिकाओं के लिए वह प्रेरणा बन गई।

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Meerut News: Do you know that the full story of shooter Dadi Chandro Tomar from the shooting to the film
शूटर दादी चंद्रो तोमर - फोटो : अमर उजाला

शूटर दादी चंद्रो तोमर और प्रकाशो तोमर की बायोपिक सांड़ की आंख की शूटिंग का अधिकतर हिस्सा गांव में ही फिल्माया गया है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह चंद्रो तोमर ने परिवार और समाज से संघर्ष कर खुद को आगे बढ़ाया।

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Meerut News: Do you know that the full story of shooter Dadi Chandro Tomar from the shooting to the film
फिल्म सांड की आंख की शूटिंग।

उम्र के जिस पड़ाव पर लोग विराम ले लेते हैं, दादी ने वहां से जिंदगी की नई शुरुआत की। या यूं कहें कि 65 साल के बाद उन्होंने अपने लिए जीना शुरू किया। घूंघट की ओट से ऐसा निशाना साधा कि दुनिया उनके कदमों में झुक गई। वो निशाना उस रूढ़िवादी सोच पर भी था जो औरत को दोयम दर्जे का समझती है।

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