मेरठ में बिजौली स्थित प्लांट पर ऑक्सीजन सिलिंडर की उम्मीद को लेकर तीमारदारों की लाइन लगी है। अपनों की ‘सांसों की डोर’ टूट न जाए, इसलिए लोग घंटों से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। जरूरतमंद गेट की तरफ टकटकी लगाए हैं। जो भी गेट से बाहर निकलता है उसके पास दौड़कर पहुंच जाते हैं और सिलिंडर के लिए विनती करते हैं। कोई जवाब न मिलने पर हताश होकर फिर इंतजार करने लगते हैं। जिम्मेदारों को डॉक्टरों का पर्चा दिखाते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं करता।
कोरोना का कहर: सांसों के लिए रातभर भटक रहे तीमारदार, तस्वीरों में देखिए ऑक्सीजन प्लांट का हाल
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हालात दावे से उलट
- टोकन लेकर खड़े मिले लोग
कई लोगों ने बताया कि परतापुर स्थित कुंडा रोड पर कंसल इंडस्ट्रीज पर टोकन व्यवस्था की गई, लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी टोकन हाथ में है और अभी तक गैस नहीं मिल रही है।
अन्य जिलों की गाड़ी भी खड़ीं
प्लांट के बाहर दिल्ली, बुलंदशहर, गाजियाबाद अन्य जिलों की गाड़ियां भी खड़ी थीं। इस पर भी वहां खड़े लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि चुपके से गाड़ियों के द्वारा कालाबाजारी की जा रही है। अमर उजाला ने भी ऐसे ही कई गाड़ियों के नंबर को अपने कैमरे में कैद किया।
लोगों ने प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी, एंबुलेंस भी रोकीं
बुधवार को डीएम के. बालाजी ने दावा किया था कि उपलब्धता के आधार पर ऑक्सीजन सभी को मिलेगी। लेकिन उनके दावे के उलट हालात हैं। महिलाएं हाथ में डॉक्टर का पर्चा लिए खड़ी थीं, लेकिन कोई आश्वासन प्लांट के अंदर से नहीं मिल रहा था। जबकि प्रशासन की तरफ से एसीएम सिविल लाइन चंद्रेश कुमार प्लांट में निगरानी कर रहे थे। इस दौरान जनता का गुस्सा प्रशासन पर बढ़ता जा रहा था। उन्होंने पुलिस-प्रशासन हाय-हाय के नारे लगाने शुरू कर दिए। प्लांट के गेट को खोलने के लिए उसे बजाना शुरू कर दिया। जो एंबुलेंस आना-जाना कर रही थी उसे भी अंदर और बाहर नहीं जाने दिया गया।
प्रशासन ने नहीं बताया ऑक्सीजन का स्टॉक
सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने एक दिन पहले ही ऑक्सीजन सहित अन्य सुविधाओं को अपडेट रखने की बात जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों से की थी। लेकिन एक भी कार्य पर अभी अमल नहीं किया गया। हालात ये हैं कि ऑक्सीजन स्टॉक की जानकारी भी एडीएम वित्त सुभाष चंद्र प्रजापति ने अपडेट नहीं की। कई बार मैसेज और फोन करने के बाद भी कोई जानकारी उन्होंने नहीं बताई।
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