मेरठ के पवन जल्लाद एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं। अमरोहा की शबनम को फांसी देने के लिए पवन जल्लाद ने मथुरा जेल का निरीक्षण किया है। आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी दी जाएगी।
मेरठ: पवन जल्लाद फिर चर्चा में, फांसी देने के लिए तैयार, शबनम को लेकर कही ये बड़ी बात
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इससे पहले पवन जल्लाद ने निर्भया कांड के चारों दोषियों को फांसी दी थी। पवन का कहना है कि इस तरह से निर्मम हत्या करने वाले और अपने परिवार का खात्मा करने वाले दोषियों को फांसी की सजा होनी चाहिए। पवन जल्लाद ने बताया कि एक साल पहले मथुरा जेल का निरीक्षण किया था। उन्होंने कहा लखनऊ से ऑर्डर आने के बाद वह फिर से फांसी घर का निरीक्षण करेंगे। पवन जल्लाद ने कहा वह फांसी देने के लिए तैयार हैं।
पवन जल्लाद ने पूरा किया था अपने पूर्वजों का सपना
निर्भया के चारों दरिंदों को फांसी देकर पवन जल्लाद ने अपने पूर्वजों का सपना पूरा किया था। पवन जल्लाद ने बताया कि यह सपना उसके पिता का था, लेकिन उनको मौका नहीं मिला। उसने अपने दादा कल्लू जल्लाद के साथ फांसी देना सीखा था। पवन जल्लाद को तिहाड़ जेल में दो दिन का प्रशिक्षण भी दिया गया था।
बता दें कि पवन जल्लाद का परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी फांसी देता आ रहा है। पवन के दादा कल्लू और परदादा लक्ष्मण राम परंपरागत फांसी देते थे। कुख्यात रंगा बिल्ला, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह व केहर सिंह को कल्लू जल्लाद ने फांसी दी थी। लेकिन पवन के दादा और परदादा ने एक साथ चार लोगों को फांसी नहीं दी थी।
पवन का कहना है कि 1988 में वह अपने दादा के साथ आगरा में गए थे। जहां पर एक अपराधी को फांसी दी थी। प्रदेश में पवन एकमात्र जल्लाद हैं।
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