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देश से जुड़ी यादें: खापों के गढ़ में 23 साल तक गरजी शूटर दादी की बंदूक, दिलचस्प है पूरी कहानी

Sat, 01 May 2021 02:50 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मदन बालियान, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मदन बालियान, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 01 May 2021 02:50 PM IST
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Meerut News: Shooter Dadi Chandro Tomar shot for 23 years and read full story
शूटर दादी चंद्रो तोमर। - फोटो : amar ujala

पश्चिम उत्तर प्रदेश की खाप पंचायतों के गढ़ बागपत में शूटर दादी चंद्रो तोमर 23 साल तक महिला सशक्तीकरण की आवाज बनी रहीं। इत्तेफाक से पहली बार 1998 में पोती शेफाली को लेकर शूटिंग रेंज तक गई चंद्रो तोमर हमेशा के लिए निशानेबाजी को समर्पित हो गईं। खेत-खलिहान और चूल्हे-चौके तक सिमटी महिलाओं को बंदिशों की दहलीज पार कराने में शूटर दादी की खास भूमिका रही...

Meerut News: Shooter Dadi Chandro Tomar shot for 23 years and read full story
शूटर दादी के साथ फिल्मी सितारे - फोटो : अमर उजाला

पश्चिम उत्तर प्रदेश की खाप पंचायतों के फरमानों को लेकर बागपत के किस्से जगजाहिर हैं। घूंघट और बंदिशों के दौर में चंद्रो तोमर महिलाओं और बेटियों के लिए उम्मीद का सवेरा बनकर घर से बाहर निकली थी। देशखाप के गढ़ बड़ौत के निकट अंगदपुर जौहड़ी गांव में 1998 में शूटिंग रेंज की शुरुआत हुई थी। मासूम पोती शेफाली अकेले शूटिंग सीखने के लिए नहीं जाना चाहती थी। पोती ने दादी को साथ चलने के लिए मनाया, यहीं से शुरू हुआ बुजुर्ग चंद्रो तोमर के शूटर दादी बनने का सिलसिला। तीन दिन बाद खेल-खेल में साधा गया निशाना दस पर लगा तो कोच डॉ. राजपाल सिंह और फारूख पठान ने दादी को निशानेबाजी के लिए मना लिया। 

Meerut News: Shooter Dadi Chandro Tomar shot for 23 years and read full story
शूटर दादी चंद्रो तोमर - फोटो : अमर उजाला

इसके 15 दिन बाद उनकी देवरानी प्रकाशी तोमर भी बेटियों को लेकर निशानेबाजी करने पहुंच गई। निशानेबाजी सीख रही लड़कियों को दादी का सहारा और प्रेरणा मिली। दादी की निशानेबाजी का सफर शुरू हुआ तो 23 साल तक चला। खाप पंचायतों के जिस क्षेत्र में महिलाओं को घूंघट तक खोलने की इजाजत नहीं थी, उसी क्षेत्र में शूटर दादी महिला सशक्तीकरण की झंडाबरदार रही। सिर्फ जौहड़ी की ही नहीं, बल्कि शूटर दादी ने दुनिया में पश्चिम उत्तर प्रदेश की पहचान को पुख्ता किया। देशखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि चंद्रो तोमर ने पूरे क्षेत्र को पहचान दिलाई। बेटियों और महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए वह प्रेरणास्रोत रहीं।

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Meerut News: Shooter Dadi Chandro Tomar shot for 23 years and read full story
शूटर दादी चंद्रो तोमर के साथ तापसी पन्नू - फोटो : अमर उजाला

तन बुड्ढ़ा होता है, मन नहीं
बच्चों जैसे निर्मल मन वाली शूटर दादी बुजुर्गों के लिए हमेशा प्रेरणा रहीं। उनके बेटे विनोद कुमार ने बताया कि मां ने 66 साल की उम्र में निशानेबाजी शुरू की थी। घर पर आने वाली बुजुर्ग महिलाओं को अपनी दिनचर्या संयमित रखने, योग करने की सलाह देती थीं। कहती थीं- ‘तन बुड्ढ़ा होता है, मन नहीं’। उनका जीवन सकारात्मक उर्जा से भरा हुआ रहा। मुश्किल समय में वह हमेशा हिम्मत दिखाती थी।

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शूटर दादी चंद्रो तोमर - फोटो : अमर उजाला

ट्विटर पर बनाई पहचान
वयोवृद्ध निशानेबाज चंद्रा तोमर को कई नाम मिले। उन्हें रिवाल्वर दादी और शूटर दादी के नाम से जाना गया। सोशल मीडिया पर सक्रिय रही। पौत्र दामाद सुमित राठी के सहयोग से ट्विटर पर बेहद सक्रिय रही। यू-ट्यब पर अपना चैनल बनाया। दादी के प्रशंसक उन्हें ट्विटर दादी के नाम से भी पुकारने लगे थे। 

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