मेरठ में कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी होने लगी है। मृतकों को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मिल रही है। संक्रमण के मामले कम नहीं हुए तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
बेबसी: नहीं मिली एंबुलेंस, कार में ले जाना पड़ा शव, जिंदगी बचाने के लिए करनी पड़ रही जद्दोजहद, सबूत हैं ये तस्वीरें
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मंगलवार दोपहर साढ़े 12 बजे मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में मरीज की मौत के बाद कर्मचारियों ने शव परिजनों को सौंप दिया। गमजदा परिजन काफी देर तक एंबुलेंस के लिए फोन करते रहे, लेकिन जवाब नहीं मिला। बेबस परिजन शव को वैगनकार में लेकर चले गए। बेबसी में कोई मरीज के साथ सिलिंडर लेकर पहुंच रहा है तो कोई अपनों को गोद में लेकर।
गाइडलाइन का पालन जरूरी
कोविड मरीजों की मौत होने पर शव वार्ड से पैकिंग करके ही दिए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद एहतियात बरतने की जरूरत है। बहुत से ऐसे वाहन है, जिनमें कोविड मरीजों के शव जा रहे हैं, कुछ चालक वाहनों के शीशे खोल देते हैं। ऐसे में किसी वजह से पैकिंग हट जाने की दशा में संक्रमण फैल सकता है। ऐसे में प्रशासन को गाइड लाइन का पालन कराने की जरूरत है, ताकि कोई दूसरा संक्रमित न हो सके।
बेटी की जिंदगी बचाने के लिए समाजसेवी अजय सेठी को करनी पड़ी जद्दोजहद
कोरोना महामारी में शहर के अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट है। ऑक्सीजन मिल जाती है तो जिंदगी बचाने के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मारामारी हो रही है। समाजसेवी, रंगकर्मी और दवा विक्रेता प्रह्लाद नगर निवासी अजय सेठी इसी का शिकार हो गए।
गढ़ रोड स्थित न्यूटिमा अस्पताल में भर्ती सेठी की 31 वर्षीय बेटी जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही है। सोमवार रात उन्होंने ऑक्सीजन के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इससे बाद प्रशासन से मदद मिली। डॉक्टर ने रेमेडेसिविर इंजेक्शन लिख दिया। मंगलवार को वे स्वास्थ विभाग अधिकारियों को फोन मिलाते रहे, किसी का फोन नहीं उठा। बेटी की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में वह ड्रग्स इंस्पेक्टर के घर पहुंच गए। यहां इंजेक्शन तो दूर, संतोषजनक जवाब भी नहीं मिला।