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वायरल तस्वीर से खुली यूपी पुलिस की पोल, निशानेबाजी नहीं फोटोग्राफी करते दिखे अफसर

Mon, 19 Nov 2018 05:25 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Mon, 19 Nov 2018 05:25 PM IST
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Meerut Police are encountering fake encounters in uttar pradesh
मेरठ न्यूज

टांग में गोली लगने से घायल पड़ा बदमाश और हाथ में तमंचा। ऐसे सीन की फोटो या वीडियो कवरेज खुद पुलिस कर रही है। यहीं से सवाल उठता है कि प्राथमिकता मुठभेड़ थी या फोटोग्राफी? इससे भी बड़ा सवाल कि क्या पुलिस में यकायक अचूक निशानेबाज शामिल हो गए? वह भी तब, जब हथियारों के रखरखाव और इन्हें चलाने के यदाकदा होने वाले प्रशिक्षण में पुलिसकर्मी फेल हो जाते हैं। मुठभेड़ के लिए चुनिंदा स्थान, बदमाशों के सिर्फ टांग और पैर में लगने वाली पुलिस की गोली और बदमाशों से बरामद होने वाले हथियारों की पटकथा अब आम आदमी के जहन में सवाल उठाने लगी है।

Meerut Police are encountering fake encounters in uttar pradesh
मुठभेड़ स्थल पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला

योगी सरकार में बदमाशों के सर्वाधिक एनकाउंटर मेरठ जोन में हुए हैं। इनमें 46 बदमाश पुलिस की गोली से मारे गए और 425 से अधिक बदमाश टांग या पैर में पुलिस की गोली लगने से घायल हुए हैं। सारी मुठभेड़ों की पटकथा एक जैसी लगती है, बस किरदार बदल जाते हैं। पुलिस की कहानियों पर आए दिन सवाल उठ रहे हैं। अधिकांश मुठभेड़ जंगल और सुनसान जगह पर होती हैं, जबकि अपराध आबादी में होते हैं। गोली भी बदमाश के पैर या टांग में पीछे से लगना बताई जाती है। घायल बदमाश के हाथ में तमंचा भी मिलता है, जिसे पुलिस फोटो खींचने या वीडियो बनाने के बाद कब्जे में लेती है। सबसे अहम बात तो यह है कि बदमाशों का इलाज या मेडिकल करने वाले डॉक्टरों की रिपोर्ट भी एक जैसी ही होती है।

Meerut Police are encountering fake encounters in uttar pradesh
मुठभेड़ स्थल पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला

शहर में दो और देहात में पांच शूटिंग स्थल

इसे अनायास कहें या नियोजन, मुठभेड़ की जगहें भी निर्धारित हैं और थानेदार भी। ऐसा लगता है कि इन थानाक्षेत्र में ही ज्यादा बदमाशों का डेरा है। मेरठ शहर में लिसाड़ी गेट, परतापुर और देहात में सरूरपुर, हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़, इंचौली व खरखौदा में पुलिस की बदमाशों से सबसे ज्यादा मुठभेड़ होती है। जबकि अन्य 23 थानों में बदमाशों से पुलिस का सामना भी नहीं होता है। नौचंदी, कोतवाली, लालकुर्ती, मेडिकल, देहलीगेट, जानी समेत कई थानों की पुलिस के सामने बदमाश नहीं आए। इन थानों के प्रभारी कभी किसी एनकाउंटर में शामिल भी नहीं रहे। सवाल है कि क्या इन थाना क्षेत्रों में अपराध नहीं होते? या अपराधी एनकाउंटर की नौबत ही नहीं आने देते?

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Meerut Police are encountering fake encounters in uttar pradesh
मुठभेड़ स्थल पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला

आधुनिक जमाना और बरामदगी तमंचे की

पुलिस का खुद मानना है कि बदमाश अब वारदात में पिस्टल का प्रयोग करते हैं। कई वारदात में बदमाश पिस्टल चलाते हुए सीसीटीवी कैमरे में कैद भी हुए, लेकिन मुठभेड़ में ज्यादातर बदमाशों के पास से पुलिस को देसी तमंचा ही मिलता है और साथ में एक या दो कारतूस। जबकि पुलिस मुठभेड़ में दावा करती कि पुलिस टीम पर बदमाश गोली चलाकर भागने का प्रयास कर रहा था। सोमवार को परतापुर में और बुधवार को सरूरपुर में भी हुई मुठभेड़ में बदमाश के हाथ से पुलिस मानो तमंचा लेना भूल गई थी।

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Meerut Police are encountering fake encounters in uttar pradesh
मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला

मुठभेड़ के बाद बदमाश फिट

कई थानों की पुलिस मिलकर मुठभेड़ करती है अपराधी को ऐसे पेश किया जाता है, जैसे बहुत गंभीर हालत में हो। दो दिन बाद ही बदमाश फिट नजर आता है। मुठभेड़ के बाद भी बदमाशों का दो दिन में फिट होना कई सवालों को खड़ा करता है।

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