दुनिया भर में तालीम की नगरी के नाम से विख्यात देवबंद को आतंकी कनेक्शन ने बदनाम कर दिया है। एनआईए और एटीएस द्वारा कोई आतंकी पकड़ा जाता है, तो उसका कनेक्शन किसी न किसी रूप में देवबंद से निकलता है। अब एटीएस ने देवबंद से ही जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकी गिरफ्तार किए हैं, जिससे फिर यही सवाल खड़ा हो रहा है कि देवबंद में बार बार ऐसी गतिविधियां क्यों सामने आ रही हैं।
क्या वाकई आतंकियों की नगरी है देवबंद? इस सवाल में छिपे कई बड़े राज
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देवबंद में दारुल उलूम इस्लामिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र है, जो न केवल हिन्दुस्तान बल्कि विदेशों तक विख्यात है। देश दुनिया के युवा यहां आकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। इसके अलावा भी देवबंद में बहुत से मदरसे हैं, जहां से दीनी तालीम दी जाती है। इस लिहाज से देवबंद को तालीम की नगरी कहा जाने लगा, लेकिन लगातार आतंकियों के पकड़े जाने से तालीम की नगरी की काफी बदनामी हुई है।
गुरुवार को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज तेली और आकिब अहमद मलिक की गिरफ्तारी में भी यह बात उजागर हुई कि वह देवबंद में पढ़ाई के बहाने पहुंचे थे और यहां तालीम की बजाय दहशतगर्दों को तैयार करने में लग गए। सिर्फ ये ही नहीं अमरोहा से पकड़ा आतंकी मोहम्मद सुहेल हो या 2017 में मुजफ्फरनगर के ग्राम कुटेसरा से आतंकी संगठन अंसारुल्ला बांग्ला टीम का सक्रिय सदस्य अब्दुल्ला अल मामून, कोलकाता पुलिस द्वारा दिल्ली से गिरफ्तार रजाउल रहमान, लखनऊ के चारबाग स्टेशन से एटीएस द्वारा पकड़े गए इमरान, रजीमुद्दीन, मोहम्मद फिरदौस आदि सभी देवबंद में किसी न किसी रूप में रहे। इन दशहतगर्दों ने देवबंद की छवि को खराब कर दिया है।
वहीं, संदिग्धों के पकड़े जाने के कारण देवबंद हर समय एटीएस, एनआइए और खुफिया विभाग के रडार पर रहता है। कई-कई दिन एटीएस की टीम देवबंद में ही डेरा डाले रहती है। छात्रों एवं संदिग्ध मिलने वाले लोगों से पूछताछ करती रहती है। जिससे बाहर से तालीम हासिल करने के लिए आने वाले लोगों को भी कई बार परेशानी झेलनी पड़ती है।
दहशत में छात्र बोले पढ़ाई छोड़कर वापस चले जाएंगे
तालीम हासिल करने के लिए दूर-दराज से देवबंद में आने वाले छात्रों में अब दहशत भी बढ़ रही है। एक तो छात्रों को यह पता नहीं चल पा रहा कि उनके साथ पढ़ने वाला कोई दहशतगर्द तो नहीं है, दूसरे आतंकियों की तलाश में तालीम हासिल करने वालों से भी इस तरह से पूछताछ की जाती है जिससे छात्र घबरा जाते हैं। आए दिन हो रही पुलिस और एटीएस की छापेमारी से मदरसा छात्र डरे और सहमे हुए हैं। नाज मंजिल में रहने वाले छात्रों का कहना था कि यहां केवल पढ़ाई करने के लिए आए हैं कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं। उन्हें नहीं पता कि कौन आतंकी है, कौन नहीं, फिर भी परेशान उन्हें होना पड़ रहा है। पुलिस एवं एटीएस तरह- तरह के सवाल कर परेशान करती है। ऐसे में तालीम हासिल कर पाना मुश्किल हो रहा है। इसलिए मन बना रहे हैं कि पढ़ाई छोड़कर अपने अपने घर चले जाने की।