डॉक्टर बनने का ख्वाब लिए यूक्रेन पहुंचे मेरठ के कई बच्चे वहां फंस गए हैं। कई बच्चों के आसपास के इलाकों में धमाकों की आवाज आ रही है तो कईयों के पास खाने-पीने का सामान बहुत कम बचा है। मेरठ में परिजन सरकार से बच्चों को सही सलामत वापस लाने की मांग कर रहे हैं। वह दिन-रात प्रार्थना कर रहे हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित लौट आएं।
यूक्रेन में फंसी लाडलों की जान: रातभर टीवी स्क्रीन पर नजरें लगाए रहे पिता, बेटे ने कहा- सबकुछ बंद है, खाने का सामान भी थोड़ा सा बचा और...
यूरेशिया एजुकेशन के सीईओ डॉ. मशरूर ने रोमानिया के लिए बस से निकालने का आश्वासन दिया है। गोकलपुर निवासी अरहान भी यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसे हुए हैं और बेसमेंट में बने बंकर में टाइम गुजार रहे हैं। उन्होंने भी अपनी वीडियो और फोटो शेयर किए हैं। रोहटा थाना क्षेत्र के मिर्जापुर निवासी इजहार त्यागी यूक्रेन की नीव में फंसे हैं। पिता इदरीस त्यागी ने बताया कि इजहार को हंगरी के लिए बॉर्डर से निकालने की तैयारी है।
आज बस में हंगरी निकलेंगी तमन्ना
खरखौदा के पांची गांव निवासी तमन्ना त्यागी के पिता अतुल त्यागी लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। बेटी ने कहा लगातार डर लग रहा है, हमलों की आवाजें कानों में गूंज रहीं हैं। आज इवानो शहर से बसों से हंगरी के लिए निकलने की तैयारी है। सौ बसें लगाई गई हैं, जो करीब एक हजार छात्रों को बॉर्डर से हंगरी पहुंचाएंगी। परतापुर काशी गांव निवासी अतहर बैग की भांजी अफ्शा खान से लगातार संपर्क में हैं।
बस किसी तरह हंगरी और रोमानिया पहुंच जाएं बच्चे
इवानो व कीव से छात्रों को बसों द्वारा दूसरे देशों में पहुंचाने का प्लान है। जिसमें बसों से हंगरी और रोमानिया में पहुंचाने की तैयारी है। लेकिन बसों से दूसरे देश में पहुंचाने को लेकर परिजन बेचैन है। तमन्ना के मां रीना त्यागी ने बताया बसों से दूसरे स्थानों पर ले जाना बड़े जोखिम भरा लग रहा है। वहीं स्नेहाशीष के पिता संतु ने बताया बच्चों को बसों द्वारा दूसरे देश ले जाने में डर लग रहा है।
दोस्त के साथ पोलैंड निकले विधु यादव
रुस और यूक्रेन के बीच रहे युद्ध ने यूक्रेन में रह रहे भारतीय नागरिकों और छात्रों को ही नहीं बल्कि उनके परिजनों के भी होश उड़ा रखे हैं। अभी तक सुरक्षित माने जा रहे शहरों के बाशिंदों ने भी सुरक्षित जगह की तरफ कूच करना शुरू कर दिया है। यूक्रेन के प्रमुख शहर विन्नित्सा की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे रोहटा रोड निवासी विधु यादव ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि विन्नित्सा शहर में भी अब लगातार सायरन बजाया जा रहा है। इसके चलते यहां रहकर पढ़ाई कर रहे छात्रों ने सीमावर्ती देश पोलैंड और हंगरी आदि के लिए कूच करना शुरू कर दिया है।