मेरठ के साधारणपुर गांव में शराब पीने से 10 लोगों की मौत के मामले में वीडियो वायरल हो गया। इसमें कपिल तड़पता हुआ दिख रहा है। इसके बाद कपिल की सोमवार को मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि शराब पीने की वजह से उसकी मौत हुई थी, जबकि पुलिस का कहना है कि बीमारी के चलते मौत हुई। लेकिन मंगलवार रात वायरल वीडियो से पुलिस का दावा झूठा साबित हो रहा है। वायरल वीडियो में कपिल तड़पता दिखाई दे रहा है। उसके साथ परिजन हैं। वीडियो में कपिल के मुंह से झाग निकलते दिखाई दे रहे हैं। उसके परिजन हाथों की मालिश करने में लगे हैं। यह वीडियो अस्पताल के बाहर का बताया गया। ज्यादातर मामलों में जहरीला पदार्थ खाने के बाद ही ऐसे झाग निकलते हैं।
मेरठ: शराब कांड को लेकर बड़ा खुलासा, मौत से पहले तड़पता रहा युवक, सबूत हैं ये तस्वीरें
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परिजनों से वीडियो के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कपिल ही है। परिजनों ने मंगलवार दोपहर आरोप लगाया था कि पुलिस ने दवाब बनाकर अंतिम संस्कार करा दिया था। पुलिस को शराब की बात बताई गई, लेकिन मामले को दबाने के चक्कर में पुलिस ने नजर अंदाज कर दिया है।
पुलिस और आबकारी की रिपोर्ट का इंतजार
इस मामले पर डीएम के. बालाजी ने बताया कि पुलिस और आबकारी विभाग पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। दोनों विभागों की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। वहीं, खुद को बचाने की जुगत में जुटे दोनों विभाग पहले ही साक्ष्य छिपाने के चक्कर में शराब से हुई मौतों को बीमारी से होना बता चुके हैं। शवों का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया और अंतिम संस्कार करा दिया गया।
क्या सही रिपोर्ट देंगे विभाग
जिलाधिकारी जिन दो विभागों की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, वही विभाग इसके लिए जिम्मेदार हैं। पुलिस तो पहले ही बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार कराकर सबूत नष्ट कर चुकी है। आबकारी विभाग भी इस मामले में पूरी तरह जिम्मेदार है तो वह क्यों इस मामले को जहरीली शराब से जोड़ेगा। पहले भी कई मामले हो चुके हैं जिनमें पुलिस और आबकारी विभाग पल्ला झाड़कर अलग खड़े हो गए और आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में इन दोनों की रिपोर्ट क्या आएगी यह स्वत: समझा जा सकता है।
क्यों नहीं की प्रशासनिक जांच
पीड़ित परिवार अब खुलकर मौत का कारण जहरीली शराब बता रहे हैं। फिर क्यों जिला प्रशासन की तरफ से इस मामले में अब तक प्रशासनिक जांच शुरू नहीं कराई गई। यही नहीं, इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच भी अलग से तय होनी चाहिए थी, लेकिन जिला प्रशासन को ऐसे विभाग की रिपोर्ट का इंतजार है जो यदि सही रिपोर्ट देते हैं तो खुद फंसेंगे। ऐसे में पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग तीनों ही इस मामले पर कटघरे में खड़े नजर आते हैं।