उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद से दो अलग- अलग ग्रुप से आठ दोस्त मसूरी घूमने गए थे। एक ग्रुप के युवक मसूरी से धनौल्टी घूमने जा रहे थे। इस बीच वे धनौल्टी से करीब तीन-चार किमी पहले जाम फंस गए। वहीं दूसरे ग्रुप की कार चमोली से करीब 40 किमी पहले ही थम गई। जब दोनों ग्रुप के युवकों को पता चला कि चमोली में ग्लेशियर फट गया है तो उनकी सांसें अटक गईं। वहीं खौफनाक मंजर के बारे में सुन उनकी रूह कांप गईं। आगे पढ़िए पूरी कहानी, युवकों की जुबानी...
चमोली आपदा: सामने था खौफनाक मंजर, अटक गईं थी सांसें, मसूरी-धनौल्टी घूमने गए युवकों ने सुनाई आपबीती
मोदीपुरम के पल्हैड़ा निवासी संदीप, धीरज वाधवा, सोनू कुमार, शानू आदि अपने वाहन से शनिवार को तीन दिन के लिए मसूरी घूमने गए थे। रविवार को वे मसूरी से धनौल्टी घूमने जा रहे थे। धनौल्टी से करीब तीन-चार किमी पहले ही वे जाम में फंस गए। इसी दौरान जब उन्हें पता चला कि चमोली में ग्लेशियर फट गया है तो उनकी रूह कांप गईं। एक बार को तो उनकी सांसें अटक गईं।
संदीप समेत चारों युवकों ने बताया कि वे मसूरी घूमने के लिए गए थे। जब वे धनौल्टी के पास पहुंचे तो उन्हें चमोली में ग्लेशियर फटने की सूचना मिली। उन्होंने बताया कि एक बार को तो ऐसा लगा, जैसे आज मौत सामने आ गई हो। फिर आनन-फानन में वे वहां से वापस चल दिए। उन्होंने वहां से वापस आने के बाद ही राहत की सांस ली। रविवार रात 11 बजे वे अपने-अपने घर पहुंचे। सोनू ने बताया कि रास्ते में कई सैलानी फंसे हुए थे। वह भी घर जाने के लिए काफी परेशान थे।
ये भी गए थे मसूरी घूमने
मेरठ से चार और युवक मसूरी घूमने गए थे। इनके साथ भी ऐसा ही हुआ। जब ये मसूरी-धनौल्टी से औली घूमने के लिए जा रहे थे तो 30-40 किमी पहले ही इन्हें रोक दिया गया।
बता दें कि पल्लवपुरम फेस-2 निवासी इंजीनियर अभिषेक वर्मा नोएडा में एक मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत है। वह अपने दोस्त करण शर्मा, अर्पित, शिवम के साथ तीन दिन पहले घूमने के लिए निकले थे। वह मसूरी-धनौल्टी से औली घूमने के लिए जा रहे थे इसी दौरान उन्हें चमोली में जल प्रलय की सूचना मिली।
अभिषेक वर्मा ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि जल प्रलय आ गई है तो सभी दोस्त घबरा गए। अभिषेक ने बताया कि सभी गाड़ियों को रोका जा रहा था और किसी को भी आगे जाने की अनुमति नहीं थी। इस दौरान हर कोई घबराया हुआ था और पुलिस व्यवस्था संभालने में लगी हुई थी। इस दौरान उन्हें याद आई कि केदारनाथ में भी बहुत बड़ी त्रासदी हुई थी।