यूं तो वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अपने संसदीय क्षेत्र आते हैं तो देश ही नहीं दुनिया की निगाह उन पर टिक जाती है। कारण, पीएम हर बार अपनी काशी के लिए कुछ अलग कर जाते हैं। इस बार मौका और भी खास था, काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण पर पीएम ने काशी की पुरातन संस्कृति और नवीनता का जिक्र कर बनारस की छवि दुनिया के सामने और मजबूत की।
उन्होंने गंगा में डुबकी लगाकर आस्था और धर्म परायणता का उदाहरण प्रस्तुत किया तो इसके साथ उन्होंने गंगा स्वच्छता पर सवाल खड़े करने वालों को भी करारा जवाब दिया। अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास के बाद काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बहाने मोदी ने हिंदू आस्था के प्रति रिश्ता और प्रगाढ़ किया।
इससे देश ही नहीं दुनिया भर के हिंदू धर्मावलंबियों में एक तरह का साफ संदेश गया कि यह सब मोदी ही कर सकते हैं। मिनी इंडिया के रूप में पहचान रखने वाली काशी में पीएम की गंगा में लगाई आस्था की डुबकी का भी देशभर में बड़ा संदेश जाएगा। काशी और भोलेनाथ के जरिए उन्होंने धर्म और विकास को भी एक साथ पिरोया।
इसी के जरिए उन्होंने पंजाब, कर्नाटक सहित कई राज्यों को भी साधने की कोशिश की। उधर, 30 घंटे के प्रवास पर बनारस पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साथ कई समीकरणों को साधने की कोशिश की। मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद वे धाम के निर्माण में लगे श्रमिकों के सम्मान के लिए पहुंचे।
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काशी विश्वनाथ धाम में मजदूरों संग पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला
श्रमिकों के सम्मान और उनके साथ भोजन कर पीएम ने न केवल अंत्योदय बल्कि समरसता का भी संदेश दिया। दरअसल, काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण में लगे श्रमिक सभी जाति, धर्म के हैं। ऐसे में मोदी श्रमिकों के जरिए देशभर के करोड़ों मजदूरों के मन तक पैठ बनाने की कोशिश की है। फिलहाल पीएम के इस काशी दौरे का दूरगामी परिणाम पर अब सबकी निगाह है।
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मुख्यमंत्रियों के साथ क्रूज पर पीएम मोदी।
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज भाजपा शासित राज्यों के12 मुख्यमंत्रियों और दो राज्य के उप मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इसके बाद वह हेलीकॉप्टर से चौबेपुर क्षेत्र के उमरहां स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम के वार्षिकोत्सव में शामिल होने जाएंगे। यहां प्रधानमंत्री देशभर से आए हुए लोगों को संबोधित करेंगे।
सांस्कृतिक नगरी काशी को नई पहचान दिलाने और उसका गौरव वापस लौटाने का दावा करने वाली भाजपा इस कार्यक्रम के बहाने पूरे पूर्वांचल का सियासी समीकरण साधने का प्रयास कर रही है। इसकी झलक उस समय दिखाई दी जब पीएम ने अपने संबोधन में महाराजा सुहेलदेव और शिवाजी को एक साथ याद किया।