उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद में एकतरफा प्यार में नाकाम होने पर सिरफिरे आशिक ने शहर कोतवाली क्षेत्र के तारापुर मोहल्ला निवासी किशोरी की मां-बहन की गला घोंटकर हत्या कर दी। मां-बेटी की हत्या से पहले आरोपी ने दोनों के मुंह में कपड़ा ठूंसकर उनके हाथ-पैर बांध दिए थे। मां-बेटी की आंखों के सामने ही उसने दोनों के लिए मौत के गड्ढे भी तैयार किए थे। महिला का छह वर्षीय बेटा जब मां को ढूंढते हुए पहुंचा तो मां-बहन को उस दशा में देख डर गया। वहां से भागकर वह अपने घर आ गया। तभी बाद में हत्यारोपी की मां उसे लेकर निकल गई थी। हत्यारोपी की हैवानियत की कहानी यहीं नहीं खत्म होती, उसने ढाई साल पहले एक किशोरी को भी दरिंदगी का शिकार बनाया था। इंजेक्शन देकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इसके बाद जेल से जमानत पर छूटा था। हत्यारोपी ने पिछले साल शहर से एक किशोर का भी अपहरण किया था। आगे की स्लाइड्स पर क्लिक कर पढ़ें हत्यारोपी की हैवानियत...।
सिरफिरे आशिक की खौफनाक हैवानियत, भागता नहीं तो मां बेटी के साथ मासूम को भी मार देता अब्दुल
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छह वर्षीय बालक अपनी मां और बहन की हत्या का चश्मदीद है। बालक की बातों पर गौर करें तो उससे पुलिस घटना की तह तक जा सकती है। बालक के मुताबिक 10 जनवरी की शाम करीब सात बजे उसकी मां उसे और उसकी 12 वर्षीय बहन को ननिहाल से लेकर रोज की तरह घर पहुंचीं। तीनों घर में थे, तभी कोई बाहर दरवाजे पर आया और मां को बुलाकर ले गया। कुछ देर तक दोनों भाई-बहन घर में मां का इंतजार करते रहे। बाद में बेटी मां को बुलाने के लिए पड़ोसी के घर गई। कुछ देर तक वह भी नहीं लौटी तो बालक मोहम्मद भी पड़ोसी के घर में पहुंच गया। उसने देखा कि उसकी मां और बहन का मुंह कपड़े से बंधा था और दोनों के हाथ पैर भी रस्सी से बांध दिए गए थे। दो लोग गड्ढे में थे और हत्यारोपी अब्दुल बाहर था। तीनों में से किसी ने कहा कि इस लड़के को भी गड्ढे में डाल दो। मासूम डर गया और भागकर अपने घर में आ गया। पीछे-पीछे हत्यारोपी अब्दुल की मां भी घर में आई और उसे यह कहकर अपने साथ ले गई कि मां तो दावत में गई है, अब सुबह आएगी। अब्दुल की मां के साथ वह कब सो गया उसे पता नहीं। नींद खुली तो खुद को एक बस में पाया। अब्दुल की मां उसके साथ थी। उसने मां और बहन के पास जाने के लिए कहा तो उसके आगे की सीट पर बैठी नकाबपोश महिला को दिखाते हुए कहा कि मां अभी सो रही है। बस रुकने पर उसके पास जाने के लिए कहा, लेकिन जब बस से उतरा तो वहां न तो मां थी और न ही बहन। कमरे में ले जाकर उसने फिर इंजेक्शन लगा दिया गया।
घर से लेकर कोतवाली तक कौन रख रहा था नजर
हत्यारोपी अब्दुल का कोई तो करीबी है जो फरारी के दौरान उसे यहां की पल पल की गतिविधियों की जानकारी दे रहा था। 23 जनवरी को मृतका का पति और उसका भाई कोतवाली पहुंचे थे। दोनों कोतवाल से अपनी पूरी बात भी नहीं बता सके थे तभी मृतका के भाई के मोबाइल फोन पर अब्दुल का फोन आ गया। उसने कहा कि तुम कोतवाली में पहुंचे हो जरा दूर होकर मुझसे बात कर लो। उसने स्पीकर ऑन कर बात पुलिस को सुनाना चाहा तो शायद उसने भांप लिया कि स्पीकर ऑन हो गया है। उसने बात बदल दी और कहा कि वह इतनी दूर तक उसकी बहन को जबरी कैसे ला सकता है। इधर मृतका के भाई ने जब कहा कि तुम किसी बंद कमरे में हो। तुम्हारी आवाज गूंज रही है जिससे कुछ भी साफ सुनाई नहीं दे रहा है। बाहर निकल कर बात करो। उसने कहा कि बाहर नहीं निकलेंगे। तुम्हारी शिकायत पर मोबाइल सर्विलांस पर लग गया है। 20 मार्च को भी मृतका की बहन को फोन कर उसने यही बात कहा था कि तुम लोग केस करना चाहते हो मेरा कुछ नहीं होगा। आरोप लगाया कि वहां की पुलिस ही हमें सब सूचना देती है। इससे परिवार के लोग सहमे हैं कि आखिर कौन हैं यहां जो उसे पल पल की सटीक जानकारी दे रहा है।
किशोरी को इंजेक्शन देकर करता था दरिंदगी
सिरफरे आशिक की खौफनाक हैवानियत से लोग दंग हैं। पुलिस के अनुसार एकतरफा प्यार में नाकाम होने पर मां-बेटी की गला घोंटकर हत्या करने का आरोपी एक किशोरी को भी दरिंदगी का शिकार बनाया था। ढाई साल पहले कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ले की किशोरी को बहला फुसलाकर हत्यारोपी अब्दुल अपने घर ले गया था। जहां इंजेक्शन लगाकर बेहोश करने के बाद उसके साथ दुष्कर्म करता था। उस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर उसे जेल भेजा था। जमानत पर छूटकर वह घर आया था।
एक किशोर का भी कर चुका है अपहरण
मां-बेटी का हत्यारोपी अब्दुल पिछले साल शहर से एक किशोर का भी अपहरण कर लिया था। उसने उसके पास से 14 सौ रुपये भी ले लिया था। घटना के तीसरे दिन वाराणसी की बाल कल्याण समिति ने बालक को बरामद कर परिजनों को सौंपा था। पीड़ित महिला के मुताबिक 12 वर्षीय पौत्र शहर में एक दुकान पर काम करता था। उस वक्त अब्दुल मछलीशहर पड़ाव के पास ठेले पर सब्जी लगाता था। पोते को तनख्वाह मिली तो उसी दिन वह उसे बहला फुसलाकर वाराणसी लेकर चला गया था। छानबीन करने पर उसने परिवार वालों को जान से मारने की धमकी दी थी। किशोर को वाराणसी में ही छोड़कर भाग गया था। जिसे तीसरे दिन बाल कल्याण समिति की मदद से परिजन लिवाकर घर आए थे।