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ओलंपिक 2021: 41 साल पहले बनारस के शाहिद ने हॉकी में दिलाई थी भारत को जीत, अब ललित ने किया कमाल, पीएम मोदी ने दीं शुभकामनाएं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 05 Aug 2021 10:16 PM IST
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tokyo olympics hockey player mohammed shahid of varanasi  role in golden victory in hockey in moscow olympics 41 years ago now lalit upadhyay contribute for nation
ओलंपिक खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम को पदक मिलने के बाद वाराणसी में जबदस्त उत्साह है। लोगों का कहना है कि टोक्यो में टीम को मिले पदक ने मॉस्को ओलंपिक की याद दिला दी। भारतीय हॉकी टीम की इस जीत के साथ वाराणसी का एक सुखद संयोग बना है। 41 साल पहले मॉस्को ओलंपिक (1980) में बनारस के पद्मश्री  मोहम्मद शाहिद देश को स्वर्ण पदक जिताने वाली हॉकी टीम के सदस्य थे। उन्होंने उस मैच में निर्णायक गोल किया था। वहीं टोक्यो ओलंपिक में ललित उपाध्याय ने कमाल का प्रदर्शन किया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि ललित उपाध्याय के खेल पर भारत को गर्व है। उन्होंने बहुत मेहनत की है, कई चुनौतियों को पार किया है और महान निपुणता का प्रदर्शन किया है। उसे शुभकामनाएं।



भारतीय पुरुष हॉकी टीम में बतौर फॉरवर्ड खिलाड़ी ललित उपाध्याय ने भी जीत की इबारत लिखने में महती भूमिका निभाई। भारतीय टीम ने जर्मनी को 5-4 से हराकर कांस्य पदक पर कब्जा किया। इस जीत के साथ बनारस और पूर्वांचल के हॉकी खिलाड़ी भी उत्साहित और जश्न मनाते नजर आए।

वाराणसी के बरेका और सिगरा स्टेडियम में खिलाड़ियों ने गाजे-बाजे के साथ खुशियां मनाईं। ललित उपाध्याय के शिवपुर के भगतपुर स्थित आवास पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। ललित के पिता सतीश उपाध्याय ने कहा कि  41 साल बाद टीम को पदक मिलना देश और काशी के लिए बड़ी उपलब्धि  है। आगे की स्लाइड्स में देखें..

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ललित उपाध्याय के माता-पिता - फोटो : अमर उजाला
ललित उपाध्याय के पिता ने अपनी खुशी बयां करते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ की कृपा है कि बेटा खाली हाथ नहीं आ रहा है।  स्वर्ण पदक की हसरत तो इस बार अधूरी रह गई, मगर ओलंपिक के मंच पर भारत और दमदार ढंग से खड़ा होगा। उम्मीद है कि अगली बार हमारा देश हॉकी में स्वर्ण पदक जितेगा।
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मेडल के साथ ललित। - फोटो : अमर उजाला

41 साल.... बड़ा लंबा वक्त होता है। इतने में एक पूरी पीढ़ी जवान होकर बूढ़ी होने लगती है। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के हर सदस्य को उस लम्हे का बेसब्री से इंतजार था जब वह ओलंपिक में पदक जीते। 41 साल की वह आस पूरी हो चुकी है। टोक्यो ओलंपिक में यह भारत का चौथा पदक है। हॉकी के अलावा वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन और मुक्केबाजी में पदक आ चुके हैं।

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बरेका में जश्न मनाते लोग - फोटो : अमर उजाला
1996 में राहुल सिंह के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम में 25 साल बाद वाराणसी के ललित को मौका मिला। जिसे भुनाने में ललित ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। बता दें कि पद्मश्री मोहम्मद शाहिद, विवेक सिंह व राहुल सिंह के बाद ललित उपाध्याय बनारस के चौथे हॉकी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया। आखिरी बार 1996 अटलांटा ओलंपिक में राहुल सिंह ने भाग लिया था। 
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ललित उपाध्याय के घर पर जश्न मनाते लोग - फोटो : अमर उजाला
मास्को ओलंपिक (1980) में मोहम्मद शाहिद ने टीम को स्वर्ण पदक दिलाया था। उसके बाद 1984 (लाल एंजिल्स), 1988 (सियोल) व 1996 (अटलांटा) के ओलंपिक में टीम जरूर खेली, लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी। कांस्य पदक के लिए बृहस्पतिवार को खेले गए मुकाबले में टीम इंडिया शुरू से ही हावी रही और जर्मनी को 5-4 से शिकस्त दी।
 
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