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तस्वीरेंः वाराणसी में जर्जर मकान से आफत में लोगों की जान, स्मार्ट सिटी की कार्यशैली पर सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Sat, 30 Jan 2021 01:21 AM IST
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Varanasi news people are in trouble from dilapidated house
भदैनी शिवाला मार्ग पर जर्जर मकान। - फोटो : अमर उजाला

कला और संस्कृति की नगरी वाराणसी में जर्जर मकान लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनने लगे हैं। पुराने शहर की गलियों में कई ऐसे भी जर्जर मकान हैं जो हल्का सा भी झटका सहने की स्थिति में नहीं है। कई मकान तो दूसरे भवनों के सहारे खड़े हैं, पास के मकानों का सपोर्ट हटने पर जर्जर मकान भरभरा कर जमीन पर गिर पड़ेंगे। फिर भी ऐसे मकानों में लोग रह रहे हैं। इंजीनियरों द्वारा इन भवनों को जर्जर घोषित करने पर भी नगर निगम व जिला प्रशासन ने इन्हें गिराने की कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में स्मार्ट सिटी की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। बृहस्पतिवार को रानी भवानी इलाके में मकान गिरने के बाद एक बार फिर नगर निगम सक्रिय हुआ है।

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Varanasi news people are in trouble from dilapidated house
राजमंदिर में जर्जर मकान। - फोटो : अमर उजाला

गलियों में स्थित जर्जर मकानों में लोग रहते हैं, जबकि नगर निगम 100 से 150 वर्ष पुराने भवनों को जर्जर घोषित करने के साथ नोटिस भेज चुका है। मगर, लोग खाली नहीं कर रहे हैं। उधर नगर निगम भी इन्हें गिराने में रुचि नहीं ले रहा है। इन भवनों के पास से गुजरने से लोग कतराते हैं। नगर निगम की सूची के अनुसार दो साल पहले जर्जर भवनों की संख्या 341 हो गई थी लेकिन बीते वर्ष बारिश में कई भवनों की दीवारें गिर गईं और कुछ लोग जख्मी हो गए तो 49 भवनों को ध्वस्त किया गया। अब भी जर्जर भवनों की संख्या 292 है। इसमें 193 ऐसे भवन हैं जिनका ध्वस्तीकरण बेहद जरूरी है। गंगा से दो सौ मीटर के दायरे में प्रतिबंध के कारण अधिकांश भवनों के नींव, ईंटें सड़ गईं हैं। दीवारें, छत व छज्जे काफी जर्जर हो चुके हैं। अगर बंदर भी इनके छज्जों पर कूद जाता है तो मलबा जरूर गिरता है।

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आदमपुर क्षेत्र में जर्जर मकान। - फोटो : अमर उजाला

एसीएम की निगरानी में गिराए जाएंगे जर्जर भवन

जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने एसीएम द्वितीय को जिम्मेदारी दी है जो नगर निगम की सूची के अनुसार जर्जर भवनों को गिरवाने का कार्य करेंगे। इसमें नगर निगम व पुलिस उनके सहयोग में कार्य करेगी। ज्यादातर पुराने व जर्जर मकान में किरायेदारी का विवाद है। इस कारण भी कई भवनों का ध्वस्तीकरण नहीं हो रहा है।

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अस्सी क्षेत्र में जर्जर मकान। - फोटो : अमर उजाला

सबसे ज्यादा दशाश्वमेध में हैं जर्जर मकान

शहर के दशाश्वमेध जोन में सबसे ज्यादा 104 जर्जर भवन हैं। कोतवाली जोन में 81, आदमपुर में 24, भेलूपुर में 10, चौक में 58 और वरुणापार में 15 भवन जर्जर चिन्हित हैं। म्यूनिसिपल एक्ट के तहत नगर निगम को जर्जर मकान गिराने का पूरा अधिकार है। जनहित में जब चाहे जर्जर मकान को गिरा सकते हैं। यदि कोर्ट आदि का कोई आदेश है तो सिटी मजिस्ट्रेट से अनुमति लेकर भी गिरा सकते हैं।

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रानी भवानी क्षेत्र में गिरे मकान का निरीक्षण करने पहंुचे पर्यटन मंत्री डाॅ. नीलकंठ तिवारी। - फोटो : अमर उजाला

स्मार्ट सिटी की कार्यशैली पर सवाल, जनता की आपत्ति

दशाश्वमेध वार्ड स्थित त्रिपुरा भैरवी मोहल्ले के रानी भवानी गली में गिरे तीन मंजिल भवन का मौका मुआयना के लिए शनिवार की सुबह क्षेत्र के विधायक व राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डाॅ. नीलकंठ तिवारी क्षेत्रीय पार्षद नरसिंह दास के साथ मौके पर पहुंचे। बाद में मौका मुआयना के लिए नगर आयुक्त भी मौके पर पहुंचे जहां जनता ने स्मार्ट सिटी के काम पर आपत्ति जताई और गलियों में होने वाले काम के लिए मिनी जेसीबी के प्रयोग पर आक्रोश जताया।

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