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UP: फिर जीवंत हो रही सदियों पुरानी परंपरा, जगन्नाथ मंदिर में आज होगी स्नान यात्रा; 108 कलशों से होगा अभिषेक

Mon, 29 Jun 2026 10:07 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 29 Jun 2026 10:07 AM IST
सार

आगरा के यमुना किनारा स्थित करीब 200 वर्ष पुराने भगवान जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को पारंपरिक स्नान यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 108 कलशों से अभिषेक किया जाएगा। 16 जुलाई को भगवान रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे, जिसके साथ वर्षों पुरानी रथयात्रा की परंपरा भी फिर जीवंत होती नजर आएगी।

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200-Year-Old Jagannath Temple in Agra to Hold Sacred Snan Yatra with 108 Kalash Abhishek
भगवान जगन्नाथ मंदिर और पुजारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के यमुना किनारा बेलनगंज स्थित करीब 200 वर्ष पुराने भगवान जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को पारंपरिक स्नान यात्रा का आयोजन होगा। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 108 कलशों से अभिषेक किया जाएगा। वहीं 16 जुलाई को भगवान के रथ यात्रा स्वरुप के दर्शन कराए जाएंगे।
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यमुना किनारा में कई प्राचीन मंदिर हैं, जो अपने अस्तित्व से जूझ रहे हैं। वे आजकल की चकाचौंध से दूर रहकर परंपरा का पालन कर रहे हैं। ऐसा ही एक प्राचीन प्रभु जगन्नाथ महाराज मंदिर है। यहां जगन्नाथ मंदिर का पारंपरिक पूजन होता है। पुजारी लक्ष्मण दयाल शर्मा ने बताया कि मंदिर की स्थापना उनके परदादा ज्वाला प्रसाद और परदादी किशन प्यारी ने की थी। उनके बाद मंदिर की व्यवस्था उनके पुत्र रमनलाल, फिर उनके पुत्र दाऊदयाल ने संभाली।
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अब दाऊदयाल शर्मा के पुत्र लक्ष्मण और उनके परिजन यह व्यवस्था संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर में 29 जून को 108 कलशों से जगन्नाथ महाराज का स्नान कराया जाएगा। खिचड़ी प्रसादी होगी। गजानन स्वरुप के दर्शन होंगे। उसके बाद जगन्नाथजी अपनी मौसी के यहां चले जाएंगे। 16 जुलाई को जगन्नाथजी रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।

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मुखिया सरिता शर्मा ने बताया कि इस मंदिर की ओर से करीब 50 साल पूर्व रमनलाल एक छोटे से रथ में पुरी की रथ यात्रा के दिन शहर में यात्रा निकालते थे और भीगे चने, मिश्री का प्रसाद वितरित करते थे। कुछ साल बाद इसमें श्रद्धालुओं की संख्या कम हो गई। अब दोबारा इस मंदिर में उत्सव, महोत्सव में भीड़ जुटने लगी है। यमुना किनारा क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों में शामिल यह मंदिर आज भी अपनी वर्षों पुरानी धार्मिक परंपराओं को संजोए हुए है।

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