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साइबर ठगों का नया हथकंडा: आपके नाम का सिम, जालसाजों का मोबाइल; पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

Mon, 29 Jun 2026 10:26 AM IST
Dhirendra Singh आशीष शर्मा, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
आशीष शर्मा, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 29 Jun 2026 10:26 AM IST
सार

आगरा में साइबर अपराधियों ने फर्जी सिम, व्हाट्सएप और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों से पांच महीने में 30 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर ली। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 20,438 मोबाइल और 3,360 सिम बंद कराए हैं और लोगों को अनजान कॉल, फर्जी निवेश और ओटीपी साझा करने से बचने की सलाह दी है।

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Cyber Fraudsters Use Fake SIMs and WhatsApp to Swindle ₹30 Crore; Police Issue Advisory
साइबर ठग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

 साइबर अपराधियों ने कभी डिजिटल अरेस्ट तो कभी निवेश का झांसा देकर लोगों से धोखाधड़ी की। पांच महीने में 30 करोड़ से अधिक रुपये जालसाजों ने धोखे से हड़प लिए। इसके लिए फर्जी सिम और खातों का प्रयोग किया। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के बाद पुलिस ने जांच की और 20,438 मोबाइल और 3,560 सिम पर ताला लगा दिया। हालांकि आरोपी पकड़ से दूर हैं।
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डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज की जाती है। इसमें शिकायतकर्ता से जिन नंबरों से कॉल आई, जिन पर रकम ट्रांसफर की, उसकी जानकारी ली जाती है। साइबर थाना और साइबर सेल सत्यापन के बाद मोबाइल के आईएमईआई नंबर, सिम नंबर की जानकारी कर रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजती है। इसके बाद सिम और मोबाइल बंद किए जाते हैं।
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 दो तरह के मोबाइल का प्रयोग
डीसीपी ने बताया कि साइबर ठग दो तरह के मोबाइल का प्रयोग कर रहे हैं। एक सिम वाले और दो सिम वाले। दो सिम वाले एंड्रॉइड मोबाइल होते हैं। एक सिम वाला सामान्य की-पैड वाला मोबाइल होता है। पुलिस को 34,068 आईएमईआई नंबर की जानकारी मिली थी। इनमें से 40 प्रतिशत एक सिम वाले जबकि 60 प्रतिशत दो सिम वाले मोबाइल के थे।


 

यह तरीके अपना रहे ठग
- साइबर ठगों के सहयोगी कैनोपी विक्रेता किसी ग्राहक के सिम खरीदने आने पर एक बार बायोमेट्रिक करते हैं। बाद में अंगूठा मशीन में ठीक नहीं लगने की बात कहकर दोबारा बायोमेट्रिक कराते हैं। इसी बीच दूसरे सिम को जारी करा लिया जाता है। इस पर लोग कई बार ध्यान नहीं दे पाते हैं।
- मजदूर, रिक्शा चालक, ठेल विक्रेता को ठग जाल में फंसाते हैं। 1 हजार से 2 हजार रुपये तक का लालच देकर आईडी ले लेते हैं। सिम विक्रेता के पास ले जाकर धोखे से सिम ले लेते हैं। इसे अपने मोबाइल में प्रयोग करते हैं। इनका इस्तेमाल पश्चिम बंगाल और झारखंड तक में होता है।

- इंस्टाग्राम-फेसबुक पर युवती की मदद से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं। रिक्वेस्ट स्वीकार करने पर कॉल कर बात करते हैं। इस दौरान व्हाट्सएप पर बात करने के लिए सिम नहीं होने की बात करते हैं। बात करने वाले को झांसे में लेकर नया सिम खरीदवा देते हैं। ओटीपी पूछकर व्हाट्सएप लॉगइन कर लेते हैं। इसका इस्तेमाल ठगी में करते हैं।

 
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ऐसे हो रही ठगी, बचने के लिए यह करें
डीसीपी ने बताया कि इन सिम और मोबाइल का प्रयोग सबसे ज्यादा डिजिटल अरेस्ट, निवेश का झांसा देकर रकम लेने में किया गया। इनसे व्हाट्सएप भी चलाए गए। कई बार सिम का प्रयोग ठगों ने सिम बॉक्स में भी किया। बॉक्स की मदद से विदेशी कॉल को डायवर्ट करके एक साथ कई लोगों से बात की जा सकती है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान नंबर से आने वाले वॉयस और व्हाट्सएप कॉल के झांसे में नहीं आएं। अगर कोई पुलिस, सीबीआई और कस्टम का अधिकारी बनकर कॉल करता है तो समझ जाएं ठगी होने वाली है। इसलिए कॉल काट दें। इसी तरह निवेश करने पर मुनाफे का लालच देने वालों से सावधान रहें। किसी तरह की साइबर ठगी होने पर 1930 पर कॉल करें।


 

किस माह में कितने
माह ब्लॉक मोबाइल ब्लॉक सिम
जनवरी 4,816 969
फरवरी 5,164 982
मार्च 5,740 455
अप्रैल 2,141 450
मई 2,577 504
कुल 20,438 3,360
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