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शाहजहां पार्क मामला: एडीए ने एनजीटी में कहा- पेड़ों की जड़ें मिलने पर रोका काम, हाईवे से हटेगा कब्जा
Fri, 17 Jul 2026 12:10 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 17 Jul 2026 12:10 PM IST
सार
एडीए ने एनजीटी को बताया है कि शाहजहां पार्क में संस्कृति वन परियोजना के तहत खुदाई के दौरान पेड़ों की जड़ें मिलने पर निर्माण कार्य रोक दिया गया। वहीं, आगरा-ग्वालियर हाईवे की हरित पट्टी से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
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शाहजहां पार्क
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में विचाराधीन शाहजहां पार्क और ग्वालियर हाईवे पर अतिक्रमण में एडीए और प्रशासन ने जवाब दाखिल कर दिए हैं। एडीए ने कहा है कि संस्कृति वन सौंदर्यीकरण कार्य में किसी भी पेड़ का अवैध कटान नहीं किया। खुदाई के दौरान पेड़ों की जड़ें मिलने पर निर्माण कार्य को तुरंत रोक दिया गया है। वहीं, जिलाधिकारी ने आगरा-ग्वालियर हाईवे की हरित पट्टी से अवैध निर्माण व अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं।
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एडीए द्वारा एनजीटी को दिए गए हलफनामे में बताया गया है कि शाहजहां पार्क में 22 स्कल्पचर्स (मूर्तियां) लगाया जाना प्रस्तावित था, जिनमें से 19 स्थानों पर काम शुरू हुआ था। खुदाई के दौरान स्वर्ण मंदिर, रानी का बाग, हम्पी स्टोन और केदारनाथ मंदिर आदि स्कल्पचर्स की नींव के पास पेड़ों की जड़ें निकल आईं, जिसके बाद प्राधिकरण ने काम रोक दिया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कहा था कि यह क्षेत्र संरक्षित स्मारकों के विनियमित क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) से अनुमति लेना आवश्यक है।
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एडीए ने पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत निर्माण क्षेत्र को भी 5533.42 वर्गमीटर से घटाकर 1265.303 वर्गमीटर कर दिया है। अब सरकारी मान्यता प्राप्त संस्था से पर्यावरण आकलन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही नियमानुसार काम आगे बढ़ाया जाएगा।
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हरित पट्टी से हटेगा अतिक्रमण
दूसरी ओर, जिलाधिकारी मनीष बंसल ने एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में हलफनामा दाखिल करते हुए बताया कि एडीए उपाध्यक्ष को 20 मार्च, 2026 को पत्र लिखकर आगरा-ग्वालियर हाईवे 509 आर्मी बेस कार्यशाला से सैंया तक की हरित पट्टी का संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने सभी अतिक्रमणों को ध्वस्त करने, पेड़ों का अवैध कटान करने वालों पर विधिक कार्रवाई करने और हरित पट्टी को पुनर्जीवित कर वृक्षारोपण कराने का आदेश दिया है।
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एडीए द्वारा एनजीटी को दिए गए हलफनामे में बताया गया है कि शाहजहां पार्क में 22 स्कल्पचर्स (मूर्तियां) लगाया जाना प्रस्तावित था, जिनमें से 19 स्थानों पर काम शुरू हुआ था। खुदाई के दौरान स्वर्ण मंदिर, रानी का बाग, हम्पी स्टोन और केदारनाथ मंदिर आदि स्कल्पचर्स की नींव के पास पेड़ों की जड़ें निकल आईं, जिसके बाद प्राधिकरण ने काम रोक दिया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कहा था कि यह क्षेत्र संरक्षित स्मारकों के विनियमित क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) से अनुमति लेना आवश्यक है।
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एडीए ने पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत निर्माण क्षेत्र को भी 5533.42 वर्गमीटर से घटाकर 1265.303 वर्गमीटर कर दिया है। अब सरकारी मान्यता प्राप्त संस्था से पर्यावरण आकलन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही नियमानुसार काम आगे बढ़ाया जाएगा।
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हरित पट्टी से हटेगा अतिक्रमण
दूसरी ओर, जिलाधिकारी मनीष बंसल ने एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में हलफनामा दाखिल करते हुए बताया कि एडीए उपाध्यक्ष को 20 मार्च, 2026 को पत्र लिखकर आगरा-ग्वालियर हाईवे 509 आर्मी बेस कार्यशाला से सैंया तक की हरित पट्टी का संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने सभी अतिक्रमणों को ध्वस्त करने, पेड़ों का अवैध कटान करने वालों पर विधिक कार्रवाई करने और हरित पट्टी को पुनर्जीवित कर वृक्षारोपण कराने का आदेश दिया है।
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