फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Restoration of Johra Bagh Bastion to Begin After Monsoon, ASI to Spend 60 Lakh

UP: मानसून के बाद सहेजा जाएगा जोहरा बाग, मजबूत की जाएगी बुनियाद; अब 60 लाख से होगा संरक्षण

Fri, 17 Jul 2026 01:45 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 17 Jul 2026 01:45 PM IST
सार

दो साल पहले भारी बारिश में ढहे जोहरा बाग के बुर्ज का संरक्षण कार्य अब मानसून के बाद शुरू होगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पहले चरण में इसके संरक्षण पर 60 लाख रुपये खर्च करेगा।

विज्ञापन
Restoration of Johra Bagh Bastion to Begin After Monsoon, ASI to Spend 60 Lakh
जोहरा बाग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

दो साल पहले भारी बारिश में गिरा जोहरा बाग का बुर्ज तीन महीने बाद सहेजा जाएगा। बारिश शुरू होने के बाद यमुना में आए उफान के कारण जोहरा बाग तक बनाए गए सीसी रास्ते के क्षतिग्रस्त होने के कारण वहां तक सामान पहुंचाना मुमकिन नहीं है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इसके संरक्षण में पहले चरण में 60 लाख रुपये खर्च करेगा।
विज्ञापन


यमुना नदी के किनारे रामबाग और चीनी का रोजा के बीच में बने जोहरा बाग में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण बुनियाद की मजबूती के साथ यमुना की बाढ़ से बचाने के लिए पत्थरों की दीवार बनाएगा, जिससे पानी स्मारक से सीधा न टकराए। ताजमहल के पीछे भी इसी तरह पत्थरों का रैंप बनाया गया है। अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिता कुमार ने बताया कि थ्री-डी मैपिंग की जा चुकी है। 60 लाख रुपये इसके संरक्षण पर खर्च होंगे। बारिश खत्म होने के बाद ही काम कराना मुमकिन हो पाएगा। सामान पहुंचाने के लिए यमुना किनारे रास्ता है, जो बाढ़ के पानी में डूब जाता है। दो साल पहले चार मंजिला स्मारक जोहरा बाग की तीन मंजिलें गिर गई थीं।
विज्ञापन



बाबर से लेकर शाहजहां काल तक का गवाह
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व वरिष्ठ संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित के मुताबिक जोहरा बाग एक नहीं, बल्कि चार बादशाहों के समय तामीर किया गया एकमात्र रिवरफ्रंट गार्डन है। बाबर से लेकर शाहजहां तक यह बाग भव्य रहा। हालांकि, ऑस्ट्रियाई इतिहासकार एबा कोच की पुस्तक द कंप्लीट ताजमहल के मुताबिक यह बाग मुमताज महल ने बनवाया। वर्ष 1631 में मुमताज की मृत्यु के बाद उनकी पुत्री जहांआरा को दिया गया। बाग-ए-जहांआरा से यह जोहरा बाग में बदल गया।
विज्ञापन
विज्ञापन



शाहजहां के कवि कलीम ने बताईं 100 फूलों की क्यारियां
जोहरा बाग अब बेशक बदहाल है, लेकिन मुगल काल में इसकी भव्यता का अंदाजा शाहजहां के कवि कलीम की कविता में मिलता है, जिसमें जोहरा बाग के बारे में लिखा है कि इस स्वर्ग में एक मोहक महल है, जिसके तीन तरफ फूलों का बगीचा है और सामने नदी बहती है। हर लहर मनमोहक घुंघराले बाल की तरह है। 100 फूलों की क्यारियां इसे अनूठा बनाती हैं। यहां गुलाब, खसखस, सूरजमुखी, नरगिस, चमेली, चंपा समेत फूलों की खुशबू का ब्योरा दिया गया है।



ईरानी राजदूत यादगार बेग के लिए की आतिशबाजी
शाहजहां के समय में मई 1638 में ईरानी राजदूत यादगार बेग के आगरा आने पर उनका स्वागत यहां रोशनी और आतिशबाजी से किया गया था। राजकुमार औरंगजेब वर्ष 1652 में जब ताजमहल की स्थिति का निरीक्षण करने आया तो बहन जहांआरा के साथ इस उद्यान को भी देखा। यहां हमाम और कुआं था, जो अब नजर नहीं आता। वर्ष 1835 में इसे बुर्ज-ए-सैयद के नाम से अंग्रेज यात्री फैनी पार्क्स ने रामबाग से ज्यादा सुंदर बागीचा बताया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed