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UP: मोहम्मदपुर में एडीए की जमीन बेचकर खड़े कर दिए मकान, सीएम कार्यालय ने मांगा जवाब; गिरेंगे सभी निर्माण

Fri, 17 Jul 2026 01:37 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 17 Jul 2026 01:37 PM IST
सार

आगरा के मोहम्मदपुर में एडीए की अधिग्रहित जमीन के फर्जी बैनामों और अवैध निर्माणों के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंडलायुक्त और एडीए उपाध्यक्ष से जवाब तलब किया है। अब अवैध बैनामे निरस्त करने और निर्माणों को चिह्नित कर ध्वस्तीकरण की तैयारी शुरू हो गई है।
 

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Illegal Sale Deeds of ADA Land to Be Cancelled CM Office Seeks Explanation
एडीए की जमीन बेचकर खड़े कर दिए मकान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के मोहम्मदपुर स्थित खसरा संख्या 215 और 276 में आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की बेशकीमती अधिग्रहित जमीन भूमाफिया ने बेच डाली। अवैध बैनामे कर दिए। मौके पर दर्जनों मकान खड़े हो गए। अमर उजाला ने इस खेल का पर्दाफाश किया। इसका संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप और उपाध्यक्ष एम अरूनमोली से जवाब-तलब किया है। इसके बाद अब भूमि पर हुए बैनामों को निरस्त कराने के लिए कवायद शुरू हो गई है।
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एडीए सचिव संजय कुमार सिंह ने शासन और जिलाधिकारी को भेजी अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि जय बजरंग सहकारी आवास समिति के साथ हुए विवादित विनिमय वाली जमीन पर वर्ष 1993 से अब तक कई अवैध बैनामे निष्पादित किए जा चुके हैं।
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रिपोर्ट के अनुसार, 1992 में एडीए ने सिकंदरा आवास योजना के लिए यह जमीन अधिग्रहित की थी। 1993 में समिति के सचिव बसपा नेता सुशील कुमार गोयल के पक्ष में 5 बीघा से अधिक जमीन का विनिमय किया गया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस विनिमय को पूर्णतः अवैध, अधिकार क्षेत्र से बाहर और दुर्भावनापूर्ण बताकर निरस्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी समिति की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी थी। इसके बावजूद राजस्व परिषद के आदेशों को दरकिनार कर तहसील टास्क फोर्स से भूमाफिया घोषित सुशील गोयल ने यहां प्लॉटिंग कर मकान बना दिए।
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9 जून के अंक में खबर छपने के बाद, एडीए ने अपनी जमीन के चिह्नांकन और फर्जी बैनामों के खिलाफ विधिक कार्यवाही शुरू करने की बात शासन को भेजे जवाब में कही है। वर्तमान में यह वाद एसडीएम सदर न्यायालय में विचाराधीन है।

हाईकोर्ट ने लगाई थी कड़ी फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जनवरी, 2017 को अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि खसरा 215 का विनिमय नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने एडीए के कृत्य को अवैध व अधिकारहीन करार देते हुए कहा था कि प्राधिकरण के एक गलत कदम से अनावश्यक मुकदमों की झड़ी लग गई।


ध्वस्तीकरण से पहले चिह्नित होंगे निर्माण
एडीए सचिव संजय कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में खसरा 215 पर कई पूर्व निर्मित रिहायशी और अर्द्धनिर्मित भवन खड़े हैं। अब प्राधिकरण ने इस भूमि पर अपने स्वामित्व के चिह्नांकन और हुए अवैध विक्रय-पत्रों (बैनामों) के विरुद्ध पृथक से विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। चिह्नित निर्माणों को ध्वस्त किया जाएगा।
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