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UP: यूपी के आगरा में है ऐसा इंटर कॉलेज, जहां हर छात्र के हिस्से में एक शिक्षक; हकीकत चौंका देगी

Tue, 28 Jul 2026 09:10 AM IST
Dhirendra Singh सलौनी पांडे, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
सलौनी पांडे, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 28 Jul 2026 09:10 AM IST
सार

आगरा के महाराजा सूरजमल इंटर कॉलेज में कभी 800 छात्र पढ़ते थे, लेकिन अब नामांकन घटकर केवल 11 रह गया है, जबकि शिक्षकों की संख्या भी 11 है। विद्यालय में 15 वर्षों से बिजली नहीं है और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

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Agra School Shock: 11 Teachers for 11 Students, No Electricity for 15 Years
इंटर कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 शहर में एक ऐसा भी इंटर कॉलेज है, जहां कभी 800 बच्चे हुआ करते थे मगर अब सिमट कर 11 हो गए हैं। यह केवल उपस्थिति नहीं बल्कि कागजों में भी इतने ही नामांकन हैं। केवल यही नहीं, इन्हें पढ़ाने के लिए भारी-भरकम फौज में कुल 11 शिक्षक हैं यानी एक विद्यार्थी पर एक। बात सुनने में भले अजीब लगे लेकिन है हकीकत, हम बात कर रहे हैं जाट हाउस राजामंडी स्थित महाराजा सूरजमल इंटर कॉलेज की।
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सोमवार को पड़ताल में इन 11 नामांकित बच्चों में से भी एक भी स्कूल में नहीं दिखा। स्कूल खुला था, 11 शिक्षक मौजूद थे लेकिन कक्षाएं खाली थीं। गर्मी से परेशान शिक्षक पंखा झल रहे थे। पड़ताल में ही पता चला कि विद्यालय में करीब 15 साल से बिजली की व्यवस्था ही नहीं है और बच्चों के पीने के पानी तक का इंतजाम नहीं है। यह स्थिति सिर्फ स्कूल की बदहाली नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी की भी तस्वीर दिखाती है।

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विद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार कक्षा एक से पांच तक एक भी विद्यार्थी का प्रवेश नहीं है। छठवीं में सिर्फ एक विद्यार्थी, सातवीं और आठवीं में कोई विद्यार्थी नहीं है। नौवीं कक्षा में तीन और दसवीं में सात विद्यार्थियों का नामांकन है। इस तरह विद्यालय में कुल 11 विद्यार्थी दर्ज हैं। इनके लिए 11 शिक्षक तैनात हैं। बावजूद इसके सोमवार को स्कूल में एक भी विद्यार्थी नहीं पहुंचा। गर्मी के बीच बिना बिजली और पानी के विद्यालय में पढ़ाई का माहौल भी बनाए रखना बड़ी चुनौती है।

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प्रबंधन में चल रहा विवाद
लोगों का आरोप है कि विद्यालय की बदहाल स्थिति के लिए स्कूल का प्रबंधन जिम्मेदार है। उनका आपस में विवाद चल रहा है, जबकि वहां काम करने वाले शिक्षकों को हर महीने समय पर वेतन मिल रहा है। विद्यालय में बच्चों के नामांकन बढ़ाने की जिम्मेदारी किसी को नहीं दी गई। ऐसे में छात्र संख्या बढ़ाने और स्कूल को दोबारा बेहतर स्थिति में लाने के लिए प्रयास नहीं हो सके। कार्यवाहक प्रधानाचार्य सीमा सिंह ने  बताया  कि पहली से पांचवीं कक्षा तक बच्चों के प्रवेश पूर्व प्रधानाचार्य के समय से नहीं लिए जा रहे थे। इसी वजह से हमने भी इन कक्षाओं में प्रवेश नहीं लिए। आखिरी समय वर्ष 2023 तक प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों के प्रवेश हुए थे। बिजली भी यहां 15 वर्षें से नहीं है।

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निरीक्षण कर देखेंगे खामियां
डीआईओएस ( माध्यमिक) रविंद्र पाल तोमर ने कहा कि हम स्कूल का निरीक्षण करेंगे, देखेंगे क्या कामियां है। कमियां मिलने पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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