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स्कूल में दे दी जान: गिरीश चंद्र की लाश देख परिजनों में मचा कोहराम, प्रबंधक पर गंभीर आरोप; पुलिस जांच में जुटी
Tue, 28 Jul 2026 10:06 AM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 28 Jul 2026 10:06 AM IST
सार
एटा के अलीगंज में एक स्कूल परिसर के कमरे में 55 वर्षीय व्यक्ति का शव फंदे से लटका मिला। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है, जबकि प्रबंधन ने इन आरोपों से इनकार किया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं और सभी पहलुओं से मामले की जांच शुरू कर दी है।
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स्कूल में पहुंची पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एटा के कस्बा के जसरथपुर मार्ग स्थित राजगुरु ओरिएंटल पब्लिक स्कूल परिसर में मंगलवार सुबह 55 वर्षीय गिरीश चंद्र गुप्ता का शव एक कमरे में फंदे से लटका मिलने से सनसनी फैल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना के बाद मृतक के परिजन ने स्कूल प्रबंधन पर मानसिक प्रताड़ना और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं, स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए अपना पक्ष रखा है। पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच में जुटी है।
मूल रूप से कस्बा के मोहल्ला लुहारी दरवाजा निवासी गिरीश चंद्र गुप्ता आठ भाइयों में तीसरे नंबर के थे। बाद में उन्होंने जसरथपुर रोड पर अपना मकान बना लिया था। परिजनों के अनुसार मंगलवार सुबह करीब छह बजे वह घर से दूध लेने की बात कहकर निकले थे। कुछ देर बाद स्कूल के लोग घर पहुंचकर उनके फंदे पर लटकने की सूचना दी, जिससे परिवार में कोहराम मच गया। मृतक की पुत्रवधू ने रोते-बिलखते बताया कि उसके ससुर लंबे समय से स्कूल परिसर की देखभाल करते थे और वहीं परचून का छोटा-मोटा सामान बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उसका आरोप है कि कुछ दिन पहले स्कूल प्रबंधन ने उनके ससुर का सामान उठाकर बाहर फेंक दिया था, जिससे वह काफी आहत थे। परिजनों का कहना है कि बिना किसी वेतन के स्कूल की देखरेख कराने के बावजूद उनके साथ लगातार अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना की जाती थी, जिससे वह तनाव में रहते थे।
उधर, स्कूल प्रबंधन की ओर से मंजूर हसन ने परिजनों के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि गिरीश चंद्र गुप्ता स्कूल के स्थायी चौकीदार नहीं थे, बल्कि उन्हें स्कूल परिसर में दुकान लगाने की अनुमति दी गई थी। उनका आरोप है कि मृतक अक्सर शराब के नशे में स्कूल आते थे और लंच अवकाश समाप्त होने के बाद भी सामान बेचते रहते थे, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। कई बार समझाने के बावजूद स्थिति नहीं बदली। उन्होंने बताया कि चार-पांच दिन पहले सामान हटाने के लिए कहने पर गिरीश चंद्र गुप्ता स्वयं ही चाबी फेंककर चले गए थे। प्रबंधन के अनुसार, घटना वाले दिन सुबह स्कूल का मुख्य गेट बंद था।
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ऐसे में गिरीश चंद्र गुप्ता बाउंड्री वॉल फांदकर परिसर में दाखिल हुए और एक कमरे में जाकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रशासन ने तत्काल परिजनों और पुलिस को सूचना दी। घटना के बाद स्कूल परिसर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाने के साथ दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं। सीओ अलीगंज राजेश सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की निष्पक्ष विवेचना की जा रही है।
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मूल रूप से कस्बा के मोहल्ला लुहारी दरवाजा निवासी गिरीश चंद्र गुप्ता आठ भाइयों में तीसरे नंबर के थे। बाद में उन्होंने जसरथपुर रोड पर अपना मकान बना लिया था। परिजनों के अनुसार मंगलवार सुबह करीब छह बजे वह घर से दूध लेने की बात कहकर निकले थे। कुछ देर बाद स्कूल के लोग घर पहुंचकर उनके फंदे पर लटकने की सूचना दी, जिससे परिवार में कोहराम मच गया। मृतक की पुत्रवधू ने रोते-बिलखते बताया कि उसके ससुर लंबे समय से स्कूल परिसर की देखभाल करते थे और वहीं परचून का छोटा-मोटा सामान बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उसका आरोप है कि कुछ दिन पहले स्कूल प्रबंधन ने उनके ससुर का सामान उठाकर बाहर फेंक दिया था, जिससे वह काफी आहत थे। परिजनों का कहना है कि बिना किसी वेतन के स्कूल की देखरेख कराने के बावजूद उनके साथ लगातार अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना की जाती थी, जिससे वह तनाव में रहते थे।
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उधर, स्कूल प्रबंधन की ओर से मंजूर हसन ने परिजनों के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि गिरीश चंद्र गुप्ता स्कूल के स्थायी चौकीदार नहीं थे, बल्कि उन्हें स्कूल परिसर में दुकान लगाने की अनुमति दी गई थी। उनका आरोप है कि मृतक अक्सर शराब के नशे में स्कूल आते थे और लंच अवकाश समाप्त होने के बाद भी सामान बेचते रहते थे, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। कई बार समझाने के बावजूद स्थिति नहीं बदली। उन्होंने बताया कि चार-पांच दिन पहले सामान हटाने के लिए कहने पर गिरीश चंद्र गुप्ता स्वयं ही चाबी फेंककर चले गए थे। प्रबंधन के अनुसार, घटना वाले दिन सुबह स्कूल का मुख्य गेट बंद था।
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ऐसे में गिरीश चंद्र गुप्ता बाउंड्री वॉल फांदकर परिसर में दाखिल हुए और एक कमरे में जाकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रशासन ने तत्काल परिजनों और पुलिस को सूचना दी। घटना के बाद स्कूल परिसर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाने के साथ दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं। सीओ अलीगंज राजेश सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की निष्पक्ष विवेचना की जा रही है।