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चांदी मंडी पर बड़ा संकट: आयात पर रोक से 1.5 लाख कारीगरों की रोजी-रोटी पर खतरा, कारोबारियों के छूट रहे पसीने

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 18 May 2026 11:32 AM IST
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सार

आगरा की विश्व प्रसिद्ध चांदी मंडी में सरकार द्वारा चांदी के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में डालने से कारोबारियों और कारीगरों में भारी चिंता है। इस फैसले से हजारों सराफ और लगभग 1.5 लाख कारीगरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।
 

Agra Silver Market in Crisis After Import Restrictions, Thousands of Workers Fear Job Loss
चांदी कारीगर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

विश्व प्रसिद्ध चांदी मंडी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सरकार ने चांदी के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में कर दिया है। इस फैसले से जहां सराफा कारोबारी निराश हैं, वहीं पायल बनाने वाले हजारों कारीगर हताश हो गए हैं। उन्हें अब चांदी की मंडी उजड़ने का डर सता रहा है।

 

जिले में रोज चार से पांच हजार किलो चांदी का कारोबार है। करीब 3000 सराफ हैं। 1.50 लाख कारीगर जुड़े हैं। जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। आगरा से उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों में पायलों की बिक्री होती है। विदेश तक लोग आगरा की पायलों के मुरीद हैं लेकिन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने अब चांदी आयात नियमों को अचानक सख्त करते हुए इसे प्रतिबंधित श्रेणी में डालने से अरबों रुपये का पायल उद्योग सकते में आ गया है।
 
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कारोबारियों को डर है कि अगर कच्ची चांदी ही नहीं मिलेगी और लालफीताशाही बढ़ेगी, तो यह ऐतिहासिक मंडी उजड़ जाएगी। यहां के कारीगरों के हाथों से बनी पायल पूरे देश के बाजारों की शान बढ़ाती हैं। लेकिन, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से शनिवार को जारी अधिसूचना ने इस चमकते बाजार में मायूसी ला दी है।
 

यह है नया सरकारी आदेश
अधिसूचना के मुताबिक, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सिल्वर बार और अन्य सिल्वर बार के आयात को तत्काल प्रभाव से मुक्त श्रेणी से हटाकर प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया है। अब आयातकों को चैप्टर 71 की नीतिगत शर्त का पालन करते हुए सरकार से विशेष परमिट लेना होगा। वाणिज्य मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चांदी आयात 150% की बेतहाशा वृद्धि के साथ 12.05 बिलियन डॉलर (करीब 7,334 टन) तक पहुंच गया था। वहीं, स्थानीय बाजार में चांदी का भाव 2.75 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर के करीब है। आसमान छूते आयात बिल और अनियंत्रित कीमतों पर लगाम कसने के लिए ही सरकार ने आयात पर पाबंदी लगाई है।

कारोबारियों की पीड़ा
माल आने में होगी देरी

चांदी कारोबारी तरुण अग्रवाल ने बताया कि पहले कच्ची चांदी का आयात आरबीआई के सामान्य नियमों के तहत हो जाता था। अब नई परमिट व्यवस्था से कागजी कार्रवाई बढ़ेगी और माल आने में देरी होगी। सहालग के सीजन में कच्ची चांदी की किल्लत होना तय है। 

बढ़ जाएगी मुनाफाखोरी
आगरा सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल का कहना है कि आगरा से पूरे देश में पायल की सप्लाई होती है। आयात पर पाबंदी से बाजार में माल घटेगा और मुनाफाखोरी बढ़ जाएगी। कच्चा माल महंगा होने की सबसे बड़ी मार हमारे हजारों छोटे कारीगरों को झेलनी पड़ेगी। 
 

नियमों में छूट की जरूरत
सराफा स्वर्णकार व्यवसायिक कमेटी के अध्यक्ष धीरज वर्मा ने कहा कि चीजों को फ्री से प्रतिबंधित करने पर हमेशा ब्लैक मार्केटिंग का अंदेशा रहता है। सरकार को चाहिए कि वह स्थानीय आभूषण निर्माताओं और निर्यातकों के हितों को देखते हुए नियमों में तुरंत कुछ छूट प्रदान करें।

भारी अनिश्चितता का माहौल
श्री सराफ कमेटी के अध्यक्ष धन कुमार जैन ने बताया कि चांदी की 2.75 लाख रुपये प्रति किलो के करीब की कीमतों ने वैसे ही आम ग्राहकों को बाजार से दूर कर रखा है। ऊपर से इस नए सरकारी आदेश ने कीमतों और सप्लाई को लेकर बाजार में भारी अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।
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