सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   ASI-Protected Monument Zohra Bagh Reduced to Ruins

मिट्टी में मिला जोहरा बाग: जमींदोज हो गए गुंबद, 500 साल पुराने कुएं को तोड़कर बना दिया नाला; बचा सिर्फ मलबा

संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Mon, 30 Mar 2026 04:06 PM IST
विज्ञापन
सार

ऐतिहासिक जोहरा बाग स्मारक की बर्बादी की पटकथा साल 2024 में लिखी गई थी, जब स्मारक का पहला गुंबद गिरा था। एक साल तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसकी सुध नहीं ली। इसके बाद 2025 में यमुना में आई भीषण बाढ़ ने बाकी कसर पूरी कर दी और स्मारक की पहली मंजिल भी जमींदोज हो गई।

ASI-Protected Monument Zohra Bagh Reduced to Ruins
खंडहर बन चुका जोहरा बाग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार

जिसके आंगन में शामें महफिलों से रोशन होती थीं, जहां खास मेहमानों का इस्तकबाल होता था। आतिशबाजी होने पर यमुना की अलौकिक छटा दिखाई देती थी। चार-चार मुगल बादशाहों ने जिसे महफूज रखा, उस जोहरा बाग का अस्तित्व संरक्षण में बरती गई लापरवाही और ऐतिहासिक विरासतों के प्रति बेरुखी के कारण मिट्टी में मिल गया। जोहरा बाग के गुंबद अब इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं और मौके पर सिर्फ मलबे का ढेर है।
Trending Videos


ताजनगरी में यमुना किनारे ताजमहल की चमक के आगे कई नायाब धरोहरें अंधेरे में खो गईं, इन्हीं में से एक जोहरा बाग भी है। यमुना किनारे स्थित एत्माद-उद-दौला, चीनी का रौजा और रामबाग के मध्य स्थित यह स्मारक कभी मुगलकालीन रिवर फ्रंट की एक महत्वपूर्ण कड़ी हुआ करता था, लेकिन आज संरक्षण के अभाव में अंतिम सांसें गिन रहा है। यह स्मारक अब बिना गुंबदों के एक खोखला खंडहर बनकर रह गया है, जो एएसआई के संरक्षण के दावों की पोल खोल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ब्रज मंडल हेरिटेज कंजर्वेशन सोसाइटी के सदस्य ब्रिज खंडेलवाल ने बताया कि इस ऐतिहासिक स्मारक की बर्बादी की पटकथा साल 2024 में लिखी गई थी, जब स्मारक का पहला गुंबद गिरा था। ताज्जुब की बात यह है कि एक साल तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसकी सुध नहीं ली। इसके बाद 2025 में यमुना में आई भीषण बाढ़ ने बाकी कसर पूरी कर दी और स्मारक की पहली मंजिल भी जमींदोज हो गई। रविवार को जब अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची तो स्थिति और भी भयावह मिली। जर्जर हो चुके खंडहर को गिरने से बचाने के लिए ईंटों के तीन कच्चे खंभे लगा दिए गए हैं। हद तो यह है कि स्मारक तक जाने का रास्ता पूरी तरह बंद है। चारों ओर अवैध कब्जों का जाल बिछा है।

500 साल पुराने कुएं को तोड़कर बनाया नाला
मुगल बादशाह बाबर की बेटी जेहरा के नाम पर बने जोहरा बाग की इमारत कभी बेहद खूबसूरत थी, लेकिन अब केवल पहली मंजिल का कुछ हिस्सा ही बचा है। स्मारक के ठीक सामने 500 साल पुराना कुआं था, जिसे तोड़कर बीच से नाला निकाल दिया गया है। स्थानीय नर्सरी संचालकों ने इस संरक्षित स्मारक को चारों तरफ से घेर लिया है। राष्ट्रीय महत्व के इस स्मारक के अस्तित्व को मिटाने में पुलिस-प्रशासन से लेकर पुरातत्व विभाग की सामूहिक लापरवाही साफ झलकती है।

 जोहरा बाग स्मारक को संरक्षित करने के लिए प्रस्ताव बनाया है। स्मारक की थ्री-डी स्कैनिंग कराई है। बजट मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। यह महत्वपूर्ण स्मारक है। धरोहरों के संरक्षण और सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी की है। -स्मिथा एस कुमार, अधीक्षण पुरातत्वविद, एएसआई

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed