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UP: क्या आपने देखी हैं फतेहपुर सीकरी की रॉक पेंटिंग्स? हजारों साल पुरानी है शैल चित्रकला, जिस पर गहराया संकट

Thu, 23 Jul 2026 11:57 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 23 Jul 2026 11:57 AM IST
सार

फतेहपुर सीकरी के रसूलपुर, पतसाल और मदनपुरा गांवों की पहाड़ियों में मौजूद प्राचीन रॉक पेंटिंग्स के संरक्षण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण दोबारा प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार कभी करीब 500 शैल चित्र थे, लेकिन संरक्षण के अभाव में अब केवल एक दर्जन के आसपास ही सुरक्षित बचे हैं।

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ASI to Resubmit Proposal for Conservation of Fatehpur Sikri Rock Paintings
रॉक पेंटिंग्स - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के फतेहपुर सीकरी के रसूलपुर, पतसाल और मदनपुरा गांव की पहाड़ियों में मौजूद रॉक पेंटिंग्स को संरक्षित करने का प्रस्ताव फिर से भेजा जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पहले 5 अप्रैल, 2023 को इनके संरक्षण का प्रस्ताव भेजा था, जिस पर बीते साल 28 अप्रैल को हुई तकनीकी मूल्यांकन समिति की बैठक में दोबारा मूल्यांकन की सिफारिश की गई थी। अब दोबारा तीन गांवों की पहाड़ियों में मौजूद पेंटिंग्स को संरक्षित करने का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है।
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पूर्व में भदरौली गांव भी इसमें शामिल था लेकिन इस बार के प्रस्ताव में इसे जगह नहीं दी गई है। एएसआई के सहायक अधीक्षक पुरातत्वविद डॉ. अक्षत कुमार कौशिक के अनुसार सीकरी के शैल चित्रों को संरक्षित करने का मामला प्रक्रिया में है। दोबारा प्रस्ताव मंगवाया जा रहा है। एएसआई की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिता कुमार ने बताया कि भदरौली गांव पर आपत्ति आई थी, जिस पर उसे छोड़कर अन्य तीन गांव की पहाड़ियों में मौजूद चित्रों को संरक्षित करने का प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। तहसील स्तर पर कार्रवाई जारी है। अगले माह इसका प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।

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रॉक पेंटिंग पर जमा कालिख कराई साफ
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित धरोहरों में अभी रॉक पेंटिंग शामिल नहीं है। रसूलपुर गांव में अज्ञात व्यक्ति के आग जलाने से रॉक पेंटिंग पर कालिख जमा हो गई थी। एएसआई ने इसे पुरातत्व महत्व के नजरिए से साफ कराया। जिस जगह कालिख जमा हुई, उसी पहाड़ी में दो साल पहले तत्कालीन केंद्रीय संस्कृति मंत्री मीनाक्षी लेखी इन पेंटिंग को देखने पहुंची थीं।

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एक्टिविस्ट डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने बताया कि 1950 के दशक में इन पेंटिंग की खोज हुई थी। तब इनकी संख्या करीब 500 होगी। 76 साल से इनका संरक्षण नहीं होने से अब एक दर्जन ही बची हैं। अरावली की पहाड़ियों में लाल और काले रंग से मानव और पशु, मूर्तियों, ताड़, सूर्य की आकृति, आड़ी व खड़ी रेखाओं के अलावा ज्यामितीय रचनाएं बनाई गई हैं।

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ऐसे पहुंचें
फतेहपुर सीकरी में तेरहमोरी बांध से आगे बाईं ओर रसूलपुर गांव का रास्ता है, जहां करीब तीन किमी. आगे जाने पर पहाड़ियों में पेंटिंग मौजूद हैं।

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