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Agra: प्रधानमंत्री योजना के नाम पर खाते खुलवाए, साइबर ठगी में किया इस्तेमाल; दर्ज हुई FIR
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 23 Feb 2026 11:49 AM IST
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सार
प्रधानमंत्री योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर युवक के नाम से बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराध में इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा के थाना सिकंदरा में न्यायालय के आदेश पर 6 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। आवास विकास कॉलोनी निवासी आशा देवी का आरोप है कि उनके बेटे पवन को झांसे में लेकर आरोपियों ने प्रधानमंत्री योजना में खाते खुलवाए। इसके बाद खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध के करोड़ों रुपयों का लेनदेन करने में किया।
आशा देवी ने न्यायालय को दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि सेक्टर-14 में किराए पर रहने वाली मंजू से घरेलू संबंध थे। मंजू ने अपने मकान मालिक के जरिये उनके बेटे पवन को प्रधानमंत्री योजना के तहत 2000 रुपये महीना दिलवाने का लालच दिया। उसके आधार कार्ड और पैनकार्ड ले लिए। इसके बाद किसी अन्य पते पर बेटे का नया आधार व पैनकार्ड बनवाया। बैंक ले जाकर कागजों पर हस्ताक्षर कराए। बेटे को धानो डेयरी के मालिक कान्हा, श्रेयांस और विपिन से मिलवाया और 5000 रुपये महीना नौकरी पर रखा।
आरोपियों ने कई कागजों पर हस्ताक्षर करवाए। उसकी सिम लेकर ओटीपी आदि पता करते रहे। जून 2025 में दिल्ली पुलिस बेटे को पूछताछ के लिए ले गई। बेटे ने सारी बात बताई पर आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बाद में पता चला कि करोड़ों रुपये के साइबर अपराध के मामलों में बेटे पर साउथ दिल्ली और केरल में प्राथमिकी दर्ज है। आरोप है कि उनके अनपढ़ बेटे का फायदा उठाकर मंजू, अंशुल, विपिन, कान्हा, श्रेयांस गर्ग और भानु ने धोखाधड़ी की है। थाना प्रभारी का कहना है कि न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
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आशा देवी ने न्यायालय को दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि सेक्टर-14 में किराए पर रहने वाली मंजू से घरेलू संबंध थे। मंजू ने अपने मकान मालिक के जरिये उनके बेटे पवन को प्रधानमंत्री योजना के तहत 2000 रुपये महीना दिलवाने का लालच दिया। उसके आधार कार्ड और पैनकार्ड ले लिए। इसके बाद किसी अन्य पते पर बेटे का नया आधार व पैनकार्ड बनवाया। बैंक ले जाकर कागजों पर हस्ताक्षर कराए। बेटे को धानो डेयरी के मालिक कान्हा, श्रेयांस और विपिन से मिलवाया और 5000 रुपये महीना नौकरी पर रखा।
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आरोपियों ने कई कागजों पर हस्ताक्षर करवाए। उसकी सिम लेकर ओटीपी आदि पता करते रहे। जून 2025 में दिल्ली पुलिस बेटे को पूछताछ के लिए ले गई। बेटे ने सारी बात बताई पर आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बाद में पता चला कि करोड़ों रुपये के साइबर अपराध के मामलों में बेटे पर साउथ दिल्ली और केरल में प्राथमिकी दर्ज है। आरोप है कि उनके अनपढ़ बेटे का फायदा उठाकर मंजू, अंशुल, विपिन, कान्हा, श्रेयांस गर्ग और भानु ने धोखाधड़ी की है। थाना प्रभारी का कहना है कि न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
