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UP: 18 साल बाद बिजली चोरी के केस में बड़ा फैसला, सबूतों के अभाव में आरोपी बरी; अदालत ने विभाग को लगाई फटकार

Wed, 01 Jul 2026 12:09 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 01 Jul 2026 12:09 PM IST
सार

18 साल पुराने बिजली चोरी के मामले में अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर आरोपी को बरी कर दिया। फैसले में न्यायालय ने स्वतंत्र गवाह, जब्त उपकरण और उचित जांच के अभाव को लेकर विद्युत विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की।
 

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Court Acquits Accused in 18-Year-Old Power Theft Case Criticises Investigation
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट पवन कुमार श्रीवास्तव ने विद्युत अधिनियम के मामले में थाना डौकी क्षेत्र के गांव गुड़ा निवासी कन्हैयालाल को साक्ष्य के अभाव में 18 साल बाद बरी करने के आदेश दे दिए।
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थाना डौकी में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, तत्कालीन अवर अभियंता सुरेशचंद शंखवार ने आरोपी कन्हैयालाल पर आरोप लगाया कि 5 दिसंबर, 2007 को वह टीम के साथ गांव गुड़ा में चेकिंग करने गए थे। उस दौरान कन्हैयालाल बिना मीटर के डायरेक्ट लाइन से विद्युत चोरी करके आटा चक्की संचालित करते हुए पाए गए। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 135 विद्युत अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली।
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अभियोजन की तरफ से मामले में वादी अवर अभियंता सुरेशचंद शंखवार, छतर सिंह, एसआई रामखिलाड़ी, एसआई सोनपाल सिंह, विद्युत विभाग के कार्यकारी सहायक हिमांशु बजाज को गवाही के लिए अदालत में पेश किया गया। आरोपी के अधिवक्ता के तर्क पर अदालत ने पत्रावली का अवलोकन किया। इसके बाद टिप्पणी की।

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अदालत की तीखी टिप्पणी
विशेष न्यायाधीश पवन कुमार श्रीवास्तव ने अपने आदेश में विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कहा कि विभाग और पुलिस ने कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया। विद्युत चोरी साबित करने के लिए कोई केबल या उपकरण भी अदालत में प्रस्तुत नहीं किए गए। चेकिंग रिपोर्ट पर आरोपी के हस्ताक्षर नहीं थे और न ही उसे रिपोर्ट की प्रति दी गई थी। पुलिस ने भी बिना उचित जांच के आरोपपत्र दाखिल कर दिया। अदालत ने 18 साल बाद आरोपी कन्हैया लाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।
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