{"_id":"6a44c670c88986418e0efae5","slug":"vice-president-radhakrishnan-awarded-degrees-glorious-chapters-from-agra-university-s-history-2026-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP: जब उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बांटी थीं डिग्रियां, आगरा विश्वविद्यालय के इतिहास के सुनहरे पन्ने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: जब उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बांटी थीं डिग्रियां, आगरा विश्वविद्यालय के इतिहास के सुनहरे पन्ने
Wed, 01 Jul 2026 01:19 PM IST
Dhirendra Singh
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 01 Jul 2026 01:19 PM IST
सार
आगरा विश्वविद्यालय की रजत जयंती (1952) के छह दिवसीय समारोह में तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सहित देश की कई शीर्ष हस्तियां शामिल हुई थीं। विश्वविद्यालय के इतिहास में पंडित जवाहरलाल नेहरू को मानद डॉक्टरेट, ईरान की महारानी की मौजूदगी और कई ऐतिहासिक घटनाएं आज भी गौरव के अध्याय मानी जाती हैं।
विज्ञापन
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आजादी से पहले और उसके बाद आगरा विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा ऐसी थी कि 25 साल पूरे होने के मौके पर 1952 में हुए छह दिवसीय (1-6 दिसंबर तक) समारोह में देश के उप राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आए थे। उन्होंने दीक्षांत समारोह में छात्रों को डिग्रियां दी थीं। उनके साथ देश के शिक्षा मंत्री डॉ. जाकिर हुसैन, तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल केएम करियप्पा, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल केएम मुंशी, मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत और दिल्ली की स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुशीला नैयर शामिल हुई थीं।
अमर उजाला के पुराने पन्नों में दर्ज है कि रजत जयंती समारोह में सेंट जोंस कॉलेज मैदान पर सेनाध्यक्ष जनरल केएम करियप्पा को 400 एनसीसी कैडेटों और डोगरा रेजीमेंट के जवानों ने मार्च पास्ट में सलामी दी थी। खुली जीप में शामिल होकर छात्रों को प्रेरित किया था। 6 दिसंबर को मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने विश्वविद्यालय के छात्रों से कहा था कि नारेबाजी और लफ्फाजी बंद कर ठोस कार्य करें। राज्यपाल केएम मुंशी ने कहा था कि इस विश्वविद्यालय को संस्कृति और शिक्षा का मंदिर बनाएं।
पंडित नेहरू, डॉ. भाभा को डॉक्टरेट की दी उपाधि
रजत जयंती समारोह में 11,196 छात्रों को डिग्री दी गई थीं, जबकि प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, मुख्यमंत्री जीवी पंत, सेनाध्यक्ष केएम करियप्पा, सर होमी मोदी, डॉ. होमी जहांगीर भाभा, डॉ. भटनागर को डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई थी। राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का संदेश पढ़ा गया था और पहले कुलपति ए डब्ल्यू डेविस को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।
विज्ञापन
भाषण पसंद न आया तो तालियां बजाकर किया विरोध
अमर उजाला के पन्नों में दर्ज है कि 19 नवंबर 1949 को आगरा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. संपूर्णानंद ने संविधान को मोटर व्हीकल एक्ट की तरह निर्जीव बताया था। यह बात छात्रों को पसंद नहीं आई और भाषण के दौरान लगातार तालियां बजाते रहे। इसके बाद शिक्षा मंत्री को भाषण खत्म करके जाना पड़ा।
हिंदी विद्यापीठ का किया उद्घाटन, बाद में बना केएमआई
15 दिसंबर 1953 को आगरा विश्वविद्यालय ने हिंदी विद्यापीठ की शुरुआत की। तत्कालीन राज्यपाल केएम मुंशी ने मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत के साथ उद्घाटन किया। उन्होंने कहा था कि हिंदी को विश्व की भाषा बनाया जाए। पत्रकारिता की डिग्री भी यहां शुरू की गई। उसी साल कुलपति का वेतन 2,000 रुपये तय किया गया था। उससे पहले कुलपति अवैतनिक होते थे।
1969 में दीक्षांत समारोह में आई थीं ईरान की महारानी
7 जनवरी 1969 को विश्वविद्यालय के विशेष दीक्षांत समारोह में ईरान की अंतिम महारानी शाह बानू शामिल हुई थीं। वह ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी की पत्नी थीं, जिनके नाम पर ईरान में कई शैक्षिक संस्थाएं हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला के पुराने पन्नों में दर्ज है कि रजत जयंती समारोह में सेंट जोंस कॉलेज मैदान पर सेनाध्यक्ष जनरल केएम करियप्पा को 400 एनसीसी कैडेटों और डोगरा रेजीमेंट के जवानों ने मार्च पास्ट में सलामी दी थी। खुली जीप में शामिल होकर छात्रों को प्रेरित किया था। 6 दिसंबर को मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने विश्वविद्यालय के छात्रों से कहा था कि नारेबाजी और लफ्फाजी बंद कर ठोस कार्य करें। राज्यपाल केएम मुंशी ने कहा था कि इस विश्वविद्यालय को संस्कृति और शिक्षा का मंदिर बनाएं।
विज्ञापन
पंडित नेहरू, डॉ. भाभा को डॉक्टरेट की दी उपाधि
रजत जयंती समारोह में 11,196 छात्रों को डिग्री दी गई थीं, जबकि प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, मुख्यमंत्री जीवी पंत, सेनाध्यक्ष केएम करियप्पा, सर होमी मोदी, डॉ. होमी जहांगीर भाभा, डॉ. भटनागर को डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई थी। राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का संदेश पढ़ा गया था और पहले कुलपति ए डब्ल्यू डेविस को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।
विज्ञापन
भाषण पसंद न आया तो तालियां बजाकर किया विरोध
अमर उजाला के पन्नों में दर्ज है कि 19 नवंबर 1949 को आगरा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. संपूर्णानंद ने संविधान को मोटर व्हीकल एक्ट की तरह निर्जीव बताया था। यह बात छात्रों को पसंद नहीं आई और भाषण के दौरान लगातार तालियां बजाते रहे। इसके बाद शिक्षा मंत्री को भाषण खत्म करके जाना पड़ा।
हिंदी विद्यापीठ का किया उद्घाटन, बाद में बना केएमआई
15 दिसंबर 1953 को आगरा विश्वविद्यालय ने हिंदी विद्यापीठ की शुरुआत की। तत्कालीन राज्यपाल केएम मुंशी ने मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत के साथ उद्घाटन किया। उन्होंने कहा था कि हिंदी को विश्व की भाषा बनाया जाए। पत्रकारिता की डिग्री भी यहां शुरू की गई। उसी साल कुलपति का वेतन 2,000 रुपये तय किया गया था। उससे पहले कुलपति अवैतनिक होते थे।
1969 में दीक्षांत समारोह में आई थीं ईरान की महारानी
7 जनवरी 1969 को विश्वविद्यालय के विशेष दीक्षांत समारोह में ईरान की अंतिम महारानी शाह बानू शामिल हुई थीं। वह ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी की पत्नी थीं, जिनके नाम पर ईरान में कई शैक्षिक संस्थाएं हैं।