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UP: गिरफ्तारी का डर, कोर्ट में ऑनलाइन पेशी...महिला डॉक्टर हुईं ऐसी वारदात का शिकार,जानकर पुलिस भी सन्न
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 03 Feb 2026 06:43 AM IST
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सार
मथुरा में तैनात महिला चिकित्सक ऐसी वारदात का शिकार हुईं, जानकर पुलिस अधिकारी भी हैरान हैं। महिला चिकित्सक को साइबर अपराधियों ने जाल में फंसा लिया। उनसे 5.35 लाख रुपये की ठगी भी कर ली गई। शक होने पर पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद पूरी वारदात का खुलासा हो सका।
महिला चिकित्सक सांकेतिक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हेलो, मैं टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया से बोल रही हूं, आपके नाम पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से मुंबई में आपत्तिजनक कंटेट भेजे जा रहे हैं। मामला दर्ज हो चुका है, गिरफ्तारी होनी है। इसके बाद गैंग ने गिरफ्तारी रोकने की बात कहकर मथुरा की महिला चिकित्सक को डिजिटल अरेस्ट किया और उनसे 5.35 लाख रुपये ठग लिए गए। बाद में दोबारा गिरफ्तारी का डर दिखाकर 30 लाख रुपये मांगे। शक होने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
घटना बाग फरजाना निवासी महिला चिकित्सक डॉ. जूही वार्ष्णेय के साथ हुई है। वह मथुरा के सरकारी अस्पताल में चिकित्सक हैं। प्राथमिकी में उन्होंने पुलिस को बताया कि 6 दिसंबर को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। काॅल करने वाली ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नोटिफिकेशन यूनिट की आराध्या रामदास बताया। उसने कहा कि आपके नाम से 7 नवंबर को मुंबई में जारी सिम से आपत्तिजनक संदेश भेजे गए हैं। प्राथमिकी दर्ज होने की बात कही।
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घटना बाग फरजाना निवासी महिला चिकित्सक डॉ. जूही वार्ष्णेय के साथ हुई है। वह मथुरा के सरकारी अस्पताल में चिकित्सक हैं। प्राथमिकी में उन्होंने पुलिस को बताया कि 6 दिसंबर को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। काॅल करने वाली ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नोटिफिकेशन यूनिट की आराध्या रामदास बताया। उसने कहा कि आपके नाम से 7 नवंबर को मुंबई में जारी सिम से आपत्तिजनक संदेश भेजे गए हैं। प्राथमिकी दर्ज होने की बात कही।
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जूही ने बताया कि उनसे मुंबई क्राइम ब्रांच ऑफिस में उपस्थित होने के लिए कहा गया। असमर्थता जताने पर कॉल को साइबर क्राइम सेल बताते हुए दूसरे नंबर पर जोड़ा गया। किसी व्यक्ति ने खुद को दरोगा प्रदीप सावंत बताकर बात की। आधार नंबर की जांच के बाद क्लीयरेंस सार्टिफिकेट जारी होने की बात कही। इसी बीच दूसरे व्यक्ति ने खुद को सिम इस्तेमाल करने वाला बताया और कहने लगा कि मैं नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार हुआ हूं। अब आपकी भी गिरफ्तारी होगी।
इसके बाद कथित आईपीएस जार्ज मैथ्यू से बात कराई गई। अगले दिन फिर व्हाट्सएप पर दूसरे अधिकारी ने बात की और गिरफ्तारी का डर दिखाकर गिरफ्तारी रोकने के नाम पर रुपयों की मांग की। उनका एक वर्ष का बेटा होने के कारण ऑनलाइन कोर्ट के सामने उपस्थित कराने को बोला गया। उन्होंने पहले ऑनलाइन यूपीआई के माध्यम से 35 हजार रुपये भेजे। इसके बाद खाते से 5 लाख और ट्रांसफर करवाए।
खाते में केवल 1000 रुपये बचने पर 8 दिसंबर को वर्चुअल कोर्ट में उपस्थित होने के लिए कहा गया। अगले दिन सुनवाई नहीं होने की बोलकर फिर गिरफ्तारी का डर दिखाने लगे। पुलिस के उनके घर के पास सादा कपड़ों में पहुंचने की बोल गिरफ्तारी रोकने को 30 लाख रुपये और मांगे। उन्होंने इतनी रकम नहीं होने की बात कहकर सीएमओ से छुट्टी लेकर खुद कोर्ट में उपस्थित होने के लिए कहा। आरोपियों ने कुछ देर बाद फिर कॉल कर धमकाया। शक होने पर उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
तेलंगाना के एटीएम से निकाली गई रकम
डीसीपी वेस्ट, साइबर क्राइम आदित्य कुमार ने बताया कि पुलिस की जांच में ठगी के कुछ रुपये तेलंगाना के एक एटीएम से निकाले जाने की पुष्टि हुई है। शेष रकम को अन्य खातों में भेजा गया है। पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस टीम आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
डीसीपी वेस्ट, साइबर क्राइम आदित्य कुमार ने बताया कि पुलिस की जांच में ठगी के कुछ रुपये तेलंगाना के एक एटीएम से निकाले जाने की पुष्टि हुई है। शेष रकम को अन्य खातों में भेजा गया है। पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस टीम आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
ध्यान दें...पुलिस नहीं करती डिजिटल अरेस्ट
डीसीपी ने बताया कि पुलिस कभी किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। ठग फर्जी कोर्ट रूम बनाकर ऑनलाइन सुनवाई में जमानत और गिरफ्तारी के आदेश देकर लोगों को ठग रहे हैं। कोई भी अगर ऐसे धमकी देता है ताे वह पुलिसकर्मी नहीं हो सकता है। ऐसी किसी घटना पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।
डीसीपी ने बताया कि पुलिस कभी किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। ठग फर्जी कोर्ट रूम बनाकर ऑनलाइन सुनवाई में जमानत और गिरफ्तारी के आदेश देकर लोगों को ठग रहे हैं। कोई भी अगर ऐसे धमकी देता है ताे वह पुलिसकर्मी नहीं हो सकता है। ऐसी किसी घटना पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।
