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सिस्टम की मौत: 99 दिन से खुले आसमान के नीचे सुबक रही बूढ़ी मां और विधवा बहू, दर्द सुनकर रो पड़ेंगे
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 19 Feb 2026 10:32 AM IST
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सार
आगरा में किरावली विद्युत उपकेंद्र पर ड्यूटी के दौरान करंट से जान गंवाने वाले संविदाकर्मी रवि सोलंकी का परिवार पिछले 99 दिनों से तहसील सदर परिसर में खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठा है।
खुले आसमान के नीचे सुबक रही बूढ़ी मां और विधवा बहू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
जब शहर रोशनी से जगमगाता है, तब शायद ही कोई उस अंधेरे के बारे में सोचता होगा जो एक बिजलीकर्मी के घर में पसर चुका है। किरावली विद्युत उपकेंद्र पर ड्यूटी के दौरान करंट से जान गंवाने वाले 38 वर्षीय संविदाकर्मी पेट्रोलमैन रवि सोलंकी का परिवार पिछले 99 दिनों से तहसील सदर के प्रांगण में खुले आसमान के नीचे न्याय की भीख मांग रहा है। कड़कड़ाती ठंड और प्रशासन की बर्फ जैसी ठंडी संवेदनहीनता के बीच एक बूढ़ी मां, सिसकती विधवा और तीन मासूम बच्चे रवि के साथ सरकारी सिस्टम की मौत का मातम मना रहे हैं।
फर्ज की कीमत में मिली विभागीय लापरवाही
करीब 20 साल तक विभाग को अपना खून-पसीना देने वाले आउटसोर्स कर्मी रवि सोलंकी के साथ पिछले 9 अप्रैल को जो हुआ, वह महज़ हादसा नहीं, विभागीय लापरवाही की ओर इशारा करता है। शटडाउन लेकर ट्रांसफाॅर्मर ठीक कर रहे रवि को अचानक दौड़े करंट ने अपनी चपेट में ले लिया। एक हफ्ते तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद 15 अप्रैल को रवि ने दम तोड़ दिया।
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फर्ज की कीमत में मिली विभागीय लापरवाही
करीब 20 साल तक विभाग को अपना खून-पसीना देने वाले आउटसोर्स कर्मी रवि सोलंकी के साथ पिछले 9 अप्रैल को जो हुआ, वह महज़ हादसा नहीं, विभागीय लापरवाही की ओर इशारा करता है। शटडाउन लेकर ट्रांसफाॅर्मर ठीक कर रहे रवि को अचानक दौड़े करंट ने अपनी चपेट में ले लिया। एक हफ्ते तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद 15 अप्रैल को रवि ने दम तोड़ दिया।
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दक्षिणांचल के वादे नहीं हुए पूरे
मौत के बाद उपजे आक्रोश को थामने के लिए दक्षिणांचल (डीवीवीएनल) के अफसरों ने 15 लाख रुपये, पेंशन और नौकरी का वादा किया था। लेकिन महीनों बाद विभाग ने महज 7.50 लाख रुपये देकर पल्ला झाड़ लिया। शेष मुआवजा और नौकरी की फाइल आज भी अफसरों की मेजों पर धूल फांक रही है।
मौत के बाद उपजे आक्रोश को थामने के लिए दक्षिणांचल (डीवीवीएनल) के अफसरों ने 15 लाख रुपये, पेंशन और नौकरी का वादा किया था। लेकिन महीनों बाद विभाग ने महज 7.50 लाख रुपये देकर पल्ला झाड़ लिया। शेष मुआवजा और नौकरी की फाइल आज भी अफसरों की मेजों पर धूल फांक रही है।
डीएम के 10 आदेश भी हो गए हवा
हैरानी की बात यह है कि 12 नवंबर से जारी इस धरने पर जिलाधिकारी अरविंद बंगारी अब तक 10 बार से अधिक दक्षिणांचल के अधिकारियों को पीड़ित परिवार की सहायता के निर्देश दे चुके हैं। बावजूद इसके, विभाग ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई। चर्चा है कि अब डीएम इस मामले में सख्त कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिख सकते हैं।
हैरानी की बात यह है कि 12 नवंबर से जारी इस धरने पर जिलाधिकारी अरविंद बंगारी अब तक 10 बार से अधिक दक्षिणांचल के अधिकारियों को पीड़ित परिवार की सहायता के निर्देश दे चुके हैं। बावजूद इसके, विभाग ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई। चर्चा है कि अब डीएम इस मामले में सख्त कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिख सकते हैं।
जनप्रतिनिधि भी बने तमाशबीन
किसान मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ने कहा कि दक्षिणांचल के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधि तमाशबीन बने हुए हैं। न तो दोषियों पर कोई विभागीय कार्रवाई हुई और न ही पीड़ित परिवार को उनका हक मिला।
किसान मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ने कहा कि दक्षिणांचल के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधि तमाशबीन बने हुए हैं। न तो दोषियों पर कोई विभागीय कार्रवाई हुई और न ही पीड़ित परिवार को उनका हक मिला।
आखिर कौन देगा जवाब
-दोषी कौन: जब शटडाउन लिया गया था, तो लाइन में करंट किसने छोड़ा?
-अंधेरी संवेदना: क्या 99 दिन का धरना किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी की अंतरात्मा को जगाने के लिए काफी नहीं?
- हक की जंग: क्या कर्मचारी की विधवा को नौकरी और मृतक आश्रित लाभ के लिए भी किसी सिफारिश का इंतजार करना पड़ेगा
-दोषी कौन: जब शटडाउन लिया गया था, तो लाइन में करंट किसने छोड़ा?
-अंधेरी संवेदना: क्या 99 दिन का धरना किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी की अंतरात्मा को जगाने के लिए काफी नहीं?
- हक की जंग: क्या कर्मचारी की विधवा को नौकरी और मृतक आश्रित लाभ के लिए भी किसी सिफारिश का इंतजार करना पड़ेगा