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UP: 14 कॉलेजों से शुरू हुआ सफर, 1000 तक पहुंचा कारवां; 99 साल में शिक्षा का महाकेंद्र बना आगरा विश्वविद्यालय
Wed, 01 Jul 2026 11:56 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 01 Jul 2026 11:56 AM IST
सार
1927 में 14 कॉलेजों और 2,530 छात्रों के साथ शुरू हुआ आगरा विश्वविद्यालय आज 99 वर्षों की यात्रा पूरी कर उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। विश्वविद्यालय के संग्रहालय में 1,540 दुर्लभ पांडुलिपियां और केंद्रीय पुस्तकालय में दो लाख से अधिक पुस्तकें एवं करोड़ों डिजिटल संसाधन उपलब्ध हैं।
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आगरा विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (पूर्व में आगरा विश्वविद्यालय) उत्तर भारत में शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। 1 जुलाई 1927 को 14 कॉलेजों की संबद्धता के साथ शुरू हुए विश्वविद्यालय ने 1,000 से अधिक कॉलेजों तक का सफर तय किया। हालांकि, 2021 में अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय शुरू होने पर 400 से अधिक कॉलेज उससे संबद्ध हो गए। आंबेडकर विश्वविद्यालय से अब भी करीब 600 कॉलेज जुड़े हुए हैं।
आगरा विश्वविद्यालय की नींव ए डब्ल्यू डेविस, मुंशी नारायण प्रसाद अस्थाना, डॉ. एलपी माथुर, लाला दीवान चंद, राय बहादुर आनंद स्वरूप और डॉ. ब्रजेंद्र स्वरूप ने रखी थी। शुरुआत में इसका अधिकार क्षेत्र यूनाइटेड प्रोविंसेस ऑफ आगरा, सेंट्रल इंडिया और राजपूताना तक फैला हुआ था। इससे 14 कॉलेज संबद्ध थे और 2530 छात्र थे। इनमें से 1475 छात्र यूनाइटेड प्रोविंसेस से थे।
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विश्वविद्यालय का पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल तक विस्तार था। इससे अलग होकर कई अन्य विश्वविद्यालय भी बने। शुरू में विश्वविद्यालय में केवल कला, विज्ञान, वाणिज्य और विधि संकाय ही थे। बाद में मेडिसिन (1936), कृषि (1938) शुरू हुए। 1953 में कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी और भाषा विज्ञान विद्यापीठ (केएमआई), आवासीय संस्थानों के रूप 1957 में समाज विज्ञान संस्थान, 1968 में गृह विज्ञान संस्थान शुरू हुआ। बेसिक साइंस विभाग (1981), फाइन आर्ट्स (1982) और मैनेजमेंट संकाय (1994) शुरू हुआ। अभी विश्वविद्यालय में 17 से अधिक संकाय संचालित हो रहे हैं। विश्वविद्यालय में देश के विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशी छात्र भी पढ़ाई कर रहे हैं। विश्वविद्यालय से मंडल के चार जिलों आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद व मैनपुरी के कॉलेज संबद्ध हैं।
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संग्रहालय में हैं 1540 दुर्लभ पांडुलिपियां
विश्वविद्यालय के संग्रहालय में 1540 दुर्लभ पांडुलिपियां, सिक्के और ग्रंथ हैं। इसमें भोजपत्र-ताड़पत्र पर लिखे ग्रंथ भी शामिल हैं। आगरा का 400 साल पुराना नक्शा भी है, जो बल्केश्वर से ताजमहल के दोनों किनारों पर बसे शहर का है।
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पुस्तकालय में दो लाख से अधिक पुस्तकों का भंडार
विश्वविद्यालय में 1927 में ही केंद्रीय पुस्तकालय शुरू हुआ था। इसमें दो लाख से अधिक पुस्तकें, जर्नल और थीसिस हैं। इसके पोर्टल पर करीब दो करोड़ किताबें पढ़ी जा सकती हैं। 3,000 से अधिक ई-रिसर्च जर्नल उपलब्ध हैं। इनमें इनफ्लिबनेट और शोधगंगा लाइब्रेरी शामिल हैं। संपर्क न्यूज क्लिपिंग लिंक में दुनिया भर के 3,000 अखबार, 5000 पत्रिकाएं उपलब्ध हैं। संविधान की मूल प्रतिलिपि भी यहां रखी है।
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आगरा विश्वविद्यालय की नींव ए डब्ल्यू डेविस, मुंशी नारायण प्रसाद अस्थाना, डॉ. एलपी माथुर, लाला दीवान चंद, राय बहादुर आनंद स्वरूप और डॉ. ब्रजेंद्र स्वरूप ने रखी थी। शुरुआत में इसका अधिकार क्षेत्र यूनाइटेड प्रोविंसेस ऑफ आगरा, सेंट्रल इंडिया और राजपूताना तक फैला हुआ था। इससे 14 कॉलेज संबद्ध थे और 2530 छात्र थे। इनमें से 1475 छात्र यूनाइटेड प्रोविंसेस से थे।
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संग्रहालय में हैं 1540 दुर्लभ पांडुलिपियां
विश्वविद्यालय के संग्रहालय में 1540 दुर्लभ पांडुलिपियां, सिक्के और ग्रंथ हैं। इसमें भोजपत्र-ताड़पत्र पर लिखे ग्रंथ भी शामिल हैं। आगरा का 400 साल पुराना नक्शा भी है, जो बल्केश्वर से ताजमहल के दोनों किनारों पर बसे शहर का है।
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पुस्तकालय में दो लाख से अधिक पुस्तकों का भंडार
विश्वविद्यालय में 1927 में ही केंद्रीय पुस्तकालय शुरू हुआ था। इसमें दो लाख से अधिक पुस्तकें, जर्नल और थीसिस हैं। इसके पोर्टल पर करीब दो करोड़ किताबें पढ़ी जा सकती हैं। 3,000 से अधिक ई-रिसर्च जर्नल उपलब्ध हैं। इनमें इनफ्लिबनेट और शोधगंगा लाइब्रेरी शामिल हैं। संपर्क न्यूज क्लिपिंग लिंक में दुनिया भर के 3,000 अखबार, 5000 पत्रिकाएं उपलब्ध हैं। संविधान की मूल प्रतिलिपि भी यहां रखी है।