फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   From the archives: students forced the powers that be to yield time and again.

पुराने पन्नों से: लाठियों से दबाई नहीं जा सकी आवाज, छात्रों ने हर बार सत्ता को झुकाया; अपना हौसला दिखाया

Mon, 27 Jul 2026 03:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 27 Jul 2026 03:33 AM IST
सार

आजाद भारत में राज्यों और केंद्र की सरकार के खिलाफ जब-जब छात्रों ने आंदोलन किए, तब-तब उनकी आवाज को कोई सरकार दबा नहीं सकी। हर बार छात्रों ने अपने आंदोलन से सत्ता को झुका दिया।

विज्ञापन
From the archives: students forced the powers that be to yield time and again.
आजादी के बाद नवंबर में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने आंदोलन शुरू किया। उनके समर्थन में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र भी आ गए। - फोटो : संवाद

विस्तार

जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के बाद देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के 47 अधिकारी बर्खास्त किए गए। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। आजाद भारत में राज्यों और केंद्र की सरकार के खिलाफ जब-जब छात्रों ने आंदोलन किए, तब-तब उनकी आवाज को कोई सरकार दबा नहीं सकी। हर बार छात्रों ने अपने आंदोलन से सत्ता को झुका दिया। हर बार सरकार को उनकी मांगों को मानने के साथ बैकफुट पर आना पड़ा। खासकर तब, जब छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे गए। 

विज्ञापन


अमर उजाला आर्काइव के पुराने पन्नों में दर्ज है कि आजादी के बाद नवंबर में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने आंदोलन शुरू किया। उनके समर्थन में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र भी आ गए। कानपुर और लखनऊ में बसें जलाई गईं। 3 नवंबर, 1953 को छात्रों की पिटाई के साथ बसें जलाने की खबर प्रकाशित की गई थी। 10-10 साल के बच्चों ने कांग्रेस नेताओं की जमकर पिटाई की थी। तत्कालीन उद्योग मंत्री हुकुम सिंह के सामने कांग्रेसियों ने गुबार निकाला था और कांग्रेस के झंडों के साथ गांधी टोपियां जलाई गई थीं। तब 2 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था और 20 लाख रुपये की संपत्ति आगजनी में नष्ट हो गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने विधानसभा में कहा था कि हिंसा करने वाले छात्रों पर रियायत नहीं होगी, पर बाद में विपक्षी नेताओं के दबाव के बाद सरकार झुक गई। 
विज्ञापन


1955 में राज्यपाल केएम मुंशी के दखल पर माने छात्र
अमर उजाला में प्रकाशित खबर के अनुसार  4 अक्तूबर, 1955 को तत्कालीन राज्यपाल केएम मुंशी के दखल के बाद इलाहाबाद विवि का छात्र आंदोलन खत्म हुआ था। तब दीक्षांत समारोह में प्रदर्शन के दौरान निकाले गए छात्रों के लिए 12 दिन तक आंदोलन हुआ था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह हुए प्रमुख आंदोलन

  • 1959 में कोलकाता में छात्रों के आंदोलन में पुलिस ने लाठीचार्ज,  आंसू गैस और गोली चलाई
  • 1965 में राजभाषा कानून के विरोध में छात्रों पर पुलिस ने फायरिंग और लाठीचार्ज किया था
  • 1972 में राजस्थान में हाड़ौती विवि की मांग पर कोटा से शुरू हुआ छात्र आंदोलन प्रदेश में फैला
  • 1974-77 बिहार में छात्रों का आंदोलन संपूर्ण क्रांति में तब्दील हुआ और कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाया
  • 1978 में मराठवाड़ा में तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने छात्रों के आंदोलन को खुद जाकर खत्म कराया
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed