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UP: क्या फिरोजाबाद के तत्कालीन डीएम ने मांगा था आई-फोन, भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप; अदालत में 28 जुलाई को सुनवाई

Sat, 11 Jul 2026 02:03 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Sat, 11 Jul 2026 02:03 PM IST
सार

फिरोजाबाद के पूर्व जिलाधिकारी रमेश रंजन और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, प्रताड़ना और जबरन वसूली के आरोपों पर अदालत में सुनवाई हुई। तत्कालीन तहसीलदार राखी शर्मा की ओर से दायर प्रार्थनापत्र पर अब 28 जुलाई को अगली सुनवाई होगी।

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Hearing on Corruption Plea Against Former Firozabad DM Scheduled for July 28
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फिरोजाबाद के पूर्व जिलाधिकारी रमेश रंजन व अन्य पर भ्रष्टाचार, प्रताड़ना और जबरन वसूली के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए दिए गए प्रार्थनापत्र पर शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मृदुल दुबे की अदालत में सुनवाई हुई। कमिश्नर की तरफ से आख्या प्रस्तुत की गई। विपक्षियों के अधिवक्ता अदालत में हाजिर हुए। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
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तत्कालीन जिलाधिकारी रमेश रंजन और तत्कालीन तहसीलदार टूंडला राखी शर्मा (निवासी कमलानगर) के बीच विवाद चर्चा में रहा। दोनों का जिले से तबादला हो चुका है। रमेश रंजन वर्तमान में अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त, राजस्व परिषद के पद पर लखनऊ में तैनात हैं। राखी शर्मा ने न्यायालय के समक्ष प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर तत्कालीन जिलाधिकारी फिरोजाबाद रमेश रंजन, ओएसडी शैलेंद्र शर्मा, वरिष्ठ लिपिक राजेंद्र खन्ना, अजीत उपाध्याय और दोजी राम (सभी की तैनाती जिलाधिकारी कार्यालय, फिरोजाबाद) के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करवाने की मांग की।
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आरोप है कि तत्कालीन जिलाधिकारी ने विधि विरुद्ध तरीके से धन अर्जित करने के उद्देश्य से अपने स्टाफ की टीम बनाई थी, जिसमें अन्य आरोपी कर्मचारियों को शामिल किया था। चारों कोई न कोई बहाना बना जनपद की सभी तहसीलों, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, विकास विभाग आदि में नियुक्त अधिकारियों को बिना किसी उचित कारण के नोटिस और वेतन रोकने के आदेश जारी करा देते थे।

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उगाही टीम ने उनसे अवैध धन की मांग की थी। उनके मना करने पर गलत तरीके से आईजीआरएस प्रार्थनापत्र के सही निस्तारण न करने का आरोप लगा अप्रैल 2025 का वेतन रोक दिया था। पूर्व जिलाधिकारी को आईफोन देने पर वेतन जारी करवाने को कहा गया था।

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