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चंबल सेंक्चुअरी का हाल: सीसीटीवी लगे न फॉरेस्ट गार्ड, होमगार्ड की ड्यूटी लगाने पर सुप्रीम कोर्ट भी हैरान

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 12 May 2026 08:38 AM IST
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सार

चंबल सेंक्चुअरी में अवैध खनन और निगरानी व्यवस्था की भारी लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सीसीटीवी और फॉरेस्ट गार्ड न होने पर हैरत जताते हुए 14 मई को फैसला सुनाने की बात कही।
 

No CCTV, No Forest Guards in Chambal Sanctuary: Supreme Court Expresses Shock
चंबल सेंक्चुअरी की सुरक्षा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

चंबल सेंक्चुअरी में बालू के अवैध खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन और निगरानी में गंभीर लापरवाही पर हैरत जताई। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की बेंच ने सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) की रिपोर्ट पर सुनवाई की। कमेटी सदस्य सीपी गोयल ने कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट पेश की। बेंच ने चिंता जताई कि सेंक्चुअरी की निगरानी के लिए न तो सीसीटीवी लगाए गए और न ही फॉरेस्ट गार्ड नियुक्त किए गए। सेंक्चुअरी क्षेत्र में ड्यूटी पर होमगार्ड तैनात किए गए हैं। कोर्ट 14 मई को इस मामले में फैसला सुनाएगी।
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अवैध खनन से चंबल सेंक्चुअरी में लुप्तप्राय जलीय जीवों पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए स्वत: संज्ञान लेकर कोर्ट ने राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार के प्रवर्तन में विफल होने पर चिंता जताई। बेंच के सामने सीईसी सदस्य सीपी गोयल ने कहा कि सेंक्चुअरी में खनन के लिए 16 संवेदनशील मार्गों की पहचान की गई, लेकिन किसी भी जिले में सीसीटीवी निगरानी प्रणाली स्थापित नहीं की गई। राजस्थान के लिए अंतिम स्वीकृत खनन प्रबंधन योजना 2020 में समाप्त हो गई थी, जिससे नियामक व्यवस्था में एक तरह का शून्य उत्पन्न हो गया है। वन विभाग में स्वीकृत 744 पदों में से 325 पद खाली पड़े हैं। होमगार्ड के माध्यम से कार्य संचालन किया जा रहा है। कोर्ट ने इस पर हैरत जताई।
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बिना पंजीकरणचल रहे खनन में ट्रैक्टर
सीपी गोयल ने कोर्ट को बताया कि निरीक्षण के दौरान ही बिना पंजीकरण वाले ट्रैक्टर खनन क्षेत्र में पाए गए। एनजीटी और कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन हो रहा है। सीईसी ने खनन गतिविधियों में लगे वाहनों के लिए जीपीएस ट्रैकिंग की सिफारिश की थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कार्यान्वयन नहीं हो पाया। न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने चिंता जताई कि कैसे ट्रैक्टर और अन्य वाहन इतने संवेदनशील क्षेत्रों में बिना पंजीकरण के चलाए जा सकते हैं। उन्होंने इसे राजस्थान सरकार की गंभीर प्रशासनिक चूक बताई। गोयल ने कहा कि खनन में केवल ड्राइवरों और मजदूरों पर ही कार्रवाई की गई, जबकि माफिया दूर रहे। यह स्वीकार करना मुश्किल है कि अधिकारी अवैध खनन में लगे जिम्मेदारों की पहचान करने में असमर्थ रहे हों।
 
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