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कांच महल: जहां नगीने की तरह तराशे थे पत्थर, टाइलों में कैद था आसमान; अब दरारों से कराह रहीं दीवारें
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 02 Apr 2026 10:30 AM IST
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सार
सिकंदरा स्थित ऐतिहासिक कांच महल संरक्षण के अभाव में जर्जर होता जा रहा है, जहां दरारें और टूट-फूट साफ नजर आ रही हैं। कभी बेमिसाल नक्काशी और टाइलों के लिए मशहूर यह स्मारक अब एएसआई की अनदेखी का शिकार बन गया है।
कांच महल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
जहां पत्थरों को नगीनों की तरह तराशा गया, नक्काशी लकड़ी के काम से भी ज्यादा बारीक थी। जिसकी छत पर सितारों की तरह चमकती टाइलों में आसमान कैद नजर आता था। जहांगीर की वह ऐतिहासिक शिकारगाह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की बेरुखी का शिकार हो गई है। सिकंदरा स्थित यह कांच महल संरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है।
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अमर उजाला टीम ने बुधवार को राष्ट्रीय महत्व के इस संरक्षित स्मारक की जमीनी हकीकत जानी। अकबर के मकबरे के मुख्य द्वार के समीप स्थित यह कांच महल बदहाली के दौर से जूझता नजर आया। यहां नियमित सफाई तक नहीं होती। स्मारक के कमरों और बाहरी दीवारों में गहरी दरारें आ चुकी हैं, कंगूरे झड़ रहे हैं और मेहराबों के पत्थर दरक रहे हैं। संरक्षण के नाम पर की गई लीपापोती ने इस नायाब बेजोड़ नगीने की मूल चमक को धुंधला कर दिया है। अकबर के मकबरे की पार्किंग के किनारे खड़ी यह दो मंजिला इमारत की तुलना कला पारखी फतेहपुर सीकरी के तुर्की सुल्ताना और बीरबल महल की बेजोड़ नक्काशी से करते थे, लेकिन आज यहां बेशकीमती नक्काशीदार पत्थर ढह रहे हैं और ऐतिहासिक टाइलें गायब हो चुकी हैं।
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हरम और शिकारगाह के रूप में था उपयोग
स्मारक परिसर में लगे एएसआई के शिलालेख के अनुसार, इस इमारत का निर्माण 1605 से 1616 ईस्वी के मध्य हुआ था। मूल रूप से यह एक हरम महल था, जिसे बादशाह जहांगीर शिकारगाह के तौर पर भी इस्तेमाल करता था। आगरा-दिल्ली शाही मार्ग पर स्थित होने के कारण परवर्ती मुगल काल के युद्धों और आक्रमणों में इसे काफी नुकसान पहुंचा।
स्मारक परिसर में लगे एएसआई के शिलालेख के अनुसार, इस इमारत का निर्माण 1605 से 1616 ईस्वी के मध्य हुआ था। मूल रूप से यह एक हरम महल था, जिसे बादशाह जहांगीर शिकारगाह के तौर पर भी इस्तेमाल करता था। आगरा-दिल्ली शाही मार्ग पर स्थित होने के कारण परवर्ती मुगल काल के युद्धों और आक्रमणों में इसे काफी नुकसान पहुंचा।
जब बोलते थे कांच महल के पत्थर...
पुरातत्वविद एडमंड विलियम स्मिथ ने अपनी पुस्तक मुगल कलर डेकोरेशन ऑफ आगरा में कांच महल की भव्यता का जीवंत वर्णन किया है।
- टाइलों का जादू : महल की छतों पर नीली और हरी एनकॉस्टिक टाइलें सितारों की तरह जड़ी थीं। नारंगी षट्कोणीय बॉर्डर्स के बीच इनका तालमेल ऐसा था, मानो छत पर नीला गगन उतर आया हो।
- पत्थरों पर काष्ठ कला का भ्रम : इसके पत्थर के कोष्ठक इतने बारीक तराशे गए थे कि देखने वाले को पत्थर के काम की जगह लकड़ी पर की गई महीन नक्काशी का भ्रम होता था।
पुरातत्वविद एडमंड विलियम स्मिथ ने अपनी पुस्तक मुगल कलर डेकोरेशन ऑफ आगरा में कांच महल की भव्यता का जीवंत वर्णन किया है।
- टाइलों का जादू : महल की छतों पर नीली और हरी एनकॉस्टिक टाइलें सितारों की तरह जड़ी थीं। नारंगी षट्कोणीय बॉर्डर्स के बीच इनका तालमेल ऐसा था, मानो छत पर नीला गगन उतर आया हो।
- पत्थरों पर काष्ठ कला का भ्रम : इसके पत्थर के कोष्ठक इतने बारीक तराशे गए थे कि देखने वाले को पत्थर के काम की जगह लकड़ी पर की गई महीन नक्काशी का भ्रम होता था।
हिंदू-मुस्लिम स्थापत्य का अनूठा संगम
यह महल सांस्कृतिक सामंजस्य की मिसाल है। इसके मुख्य प्रवेश द्वार का डिजाइन विशुद्ध हिंदू शैली का अहसास कराता है, जबकि मेहराबों पर मुगलिया कारीगरी की स्पष्ट छाप है। दिलचस्प तथ्य यह है कि जहांगीर के काल की इस तल योजना ने ही आगे चलकर ब्रज क्षेत्र के रिहायशी घरों के वास्तुकला की नींव रखी।
यह महल सांस्कृतिक सामंजस्य की मिसाल है। इसके मुख्य प्रवेश द्वार का डिजाइन विशुद्ध हिंदू शैली का अहसास कराता है, जबकि मेहराबों पर मुगलिया कारीगरी की स्पष्ट छाप है। दिलचस्प तथ्य यह है कि जहांगीर के काल की इस तल योजना ने ही आगे चलकर ब्रज क्षेत्र के रिहायशी घरों के वास्तुकला की नींव रखी।
वास्तुकला की खास बातें...
क्षेत्रफल : 16.15 मीटर की वर्गाकार दो मंजिला भव्य इमारत।
विशिष्ट छत : केंद्र में एक बड़ा मेहराबदार कक्ष है, लेकिन ऊपर गुंबद नहीं बनाया गया है।
बारीक नक्काशी : दीवारों पर बेल-बूटों, फूलों और ज्यामितीय डिजाइनों का सुंदर जाल उकेरा गया है।
प्रभाव : ब्रज के स्थानीय स्थापत्य और घरों के नक्शों का आधार बनी यहां की बनावट।
क्षेत्रफल : 16.15 मीटर की वर्गाकार दो मंजिला भव्य इमारत।
विशिष्ट छत : केंद्र में एक बड़ा मेहराबदार कक्ष है, लेकिन ऊपर गुंबद नहीं बनाया गया है।
बारीक नक्काशी : दीवारों पर बेल-बूटों, फूलों और ज्यामितीय डिजाइनों का सुंदर जाल उकेरा गया है।
प्रभाव : ब्रज के स्थानीय स्थापत्य और घरों के नक्शों का आधार बनी यहां की बनावट।
कराएंगे स्मारक का संरक्षण
अधीक्षण पुरातत्वविद स्मिथा एस कुमार ने बताया कि कांच महल संरक्षित स्मारक है। कुछ साल पहले काम कराया था। दोबारा सर्वे करवा कर प्रस्ताव बनाएंगे। स्मारक का संरक्षण कराएंगे।
अधीक्षण पुरातत्वविद स्मिथा एस कुमार ने बताया कि कांच महल संरक्षित स्मारक है। कुछ साल पहले काम कराया था। दोबारा सर्वे करवा कर प्रस्ताव बनाएंगे। स्मारक का संरक्षण कराएंगे।