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UP: ट्रांसपोर्टर की माैत के मामले में पुलिस की जांच तेज, जोड़ी जा रहीं कड़ियां; GST अधिकारी पर साजिश का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 12 Apr 2026 10:23 AM IST
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सार
आगरा में ट्रांसपोर्टर की कार की टक्कर से माैत हुई थी। परिजनों ने जीएसटी अधिकारी पर साजिश का आरोप लगाया था। मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। कड़ियां जोड़ी जा रहीं हैं। जिस कार से ट्रांसपोर्टर को टक्कर मारी गई थी, उसको लेकर भी चाैंकाने वाली जानकारी सामने आई है।
कार की टक्कर से ट्रांसपोर्टर की माैत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
ट्रांसपोर्टर असगर अली की मौत की जांच में पुलिस को सर्विलांस से कई जानकारियां मिली हैं। जिस कार से ट्रांसपोर्टर को टक्कर मारी गई थी वह पहले दूसरे प्रदेश में पंजीकृत थी। घटना से कुछ समय पहले ही उसे जालौन में ट्रांसफर कराया गया था। खरीदने-बेचने में शामिल लोगों पर पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है। कड़ी मिलते ही गिरफ्तारी शुरू होगी।
शाहगंज के मेवाती गली निवासी अजमन ट्रांसपोर्ट के संचालक असगर अली का शव 4 अप्रैल की सुबह परिजन को मल्ल का चबूतरा क्षेत्र में मिला था। परिजन ने जीएसटी की अधिकारी और उनके पति समेत अन्य पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाकर तहरीर दी थी। जांच में मिले सीसीटीवी में एक जालौन नंबर की कार उनको टक्कर मारते दिखी थी। कार चालक के कार चलाने के तरीके को देखकर पुलिस को भी जान बूझकर टक्कर मारने का अंदेशा हुआ।
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शाहगंज के मेवाती गली निवासी अजमन ट्रांसपोर्ट के संचालक असगर अली का शव 4 अप्रैल की सुबह परिजन को मल्ल का चबूतरा क्षेत्र में मिला था। परिजन ने जीएसटी की अधिकारी और उनके पति समेत अन्य पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाकर तहरीर दी थी। जांच में मिले सीसीटीवी में एक जालौन नंबर की कार उनको टक्कर मारते दिखी थी। कार चालक के कार चलाने के तरीके को देखकर पुलिस को भी जान बूझकर टक्कर मारने का अंदेशा हुआ।
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पुलिस ने हादसे की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की मगर जांच दोनों एंगल से शुरू कर दी। कार का मालिक घर से गायब है। शक के घेरे में आए अधिकारी समेत अन्य सभी भूमिगत हो गए हैं। सबने अपने मोबाइल बंद कर लिए हैं। इससे पुलिस को संदेह होने लगा है कि अगर इन सब का साजिश में हाथ नहीं है तो सब गायब क्यों हैं? पुलिस के पास अपना पक्ष क्यों नहीं रख रहे हैं?
पुलिस को जांच में पता चला है कि कार जालौन नंबर पर कुछ समय पहले रजिस्टर्ड हुई है। इससे पहले कार दूसरे प्रदेश में रजिस्टर्ड थी। पुलिस जांच कर रही है कि पूर्व मालिक या वर्तमान कार स्वामी का शक के घेरे में आए लोगों से कोई कनेक्शन तो नहीं है। हिट एंड रन के केस में फंसने पर कार स्वामी पुलिस के पास नहीं पहुंचा और न्यायालय में समर्पण भी नहीं किया है।
पुलिस को जांच में पता चला है कि कार जालौन नंबर पर कुछ समय पहले रजिस्टर्ड हुई है। इससे पहले कार दूसरे प्रदेश में रजिस्टर्ड थी। पुलिस जांच कर रही है कि पूर्व मालिक या वर्तमान कार स्वामी का शक के घेरे में आए लोगों से कोई कनेक्शन तो नहीं है। हिट एंड रन के केस में फंसने पर कार स्वामी पुलिस के पास नहीं पहुंचा और न्यायालय में समर्पण भी नहीं किया है।
सर्विलांस की जांच में सामने आया है कि जिस समय घटना हुई उस समय शक के घेरे में आए एक व्यक्ति का मोबाइल बंद था। उसके जीएसटी टीम के साथ कारोबारियों से वसूली करने में लिप्त होने का भी पुलिस को शक है। एक अन्य खुद को जीएसटी अधिकारी के पति का रिश्तेदार बताता था। उसने घटना से पहले दिन में ट्रांसपोर्टर से बात भी की थी। डीसीपी सिटी सैय्यद अली अब्बास ने बताया कि मामले में पुलिस टीम हर एंगल से जांच कर रही है। कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। साक्ष्यों को विवेचना में शामिल किया जा रहा है।