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यूपी में 'यादव जी की लव स्टोरी' का विरोध: समाज की भावनाओं को आहत करने का आरोप, विरोध कर फिल्म पर रोक की मांग
अमर उजाला नेटवर्क, फिरोजाबाद/मैनपुरी
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 19 Feb 2026 01:42 PM IST
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सार
फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' को लेकर यूपी में विरोध हो रहा है। विश्व यादव परिषद और यादव महासभा ने फिल्म में यादव समाज को गलत और आपत्तिजनक तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है।
'यादव जी की लव स्टोरी' का विरोध
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगामी 27 फरवरी को रिलीज होने वाली फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' को लेकर उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद और मैनपुरी जिलों में विरोध हो रहा है। विश्व यादव परिषद और यादव महासभा ने फिल्म में यादव समाज को गलत और आपत्तिजनक तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाते हुए प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपा है। दोनों संगठनों ने फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने और गहन जांच की मांग की है, अन्यथा सामाजिक वैमनस्य फैलने की आशंका जताई है।
फिरोजाबाद में विश्व यादव परिषद का ज्ञापन
विश्व यादव परिषद के प्रदेश अध्यक्ष राहुल यादव के नेतृत्व में स्थानीय प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि फिल्म के पोस्टर, ट्रेलर और सोशल मीडिया प्रचार सामग्री में यादव समुदाय को जिस तरह से दर्शाया गया है, वह अत्यंत आपत्तिजनक है। इससे समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं और समाज में व्यापक रोष व्याप्त है।
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फिरोजाबाद में विश्व यादव परिषद का ज्ञापन
विश्व यादव परिषद के प्रदेश अध्यक्ष राहुल यादव के नेतृत्व में स्थानीय प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि फिल्म के पोस्टर, ट्रेलर और सोशल मीडिया प्रचार सामग्री में यादव समुदाय को जिस तरह से दर्शाया गया है, वह अत्यंत आपत्तिजनक है। इससे समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं और समाज में व्यापक रोष व्याप्त है।
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परिषद ने प्रशासन को आगाह किया है कि यदि बिना गहन जांच के फिल्म का प्रदर्शन किया जाता है, तो यह सामाजिक वैमनस्य और तनाव को जन्म दे सकता है। उन्होंने विभिन्न समुदायों के बीच शांति भंग होने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की प्रबल आशंका व्यक्त की है। विश्व यादव परिषद ने मांग की है कि इस मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए और जांच पूरी होने तक फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए।
मैनपुरी में यादव महासभा का विरोध प्रदर्शन
इसी तर्ज पर मैनपुरी में भी यादव महासभा ने फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यादव महासभा युवा के जिलाध्यक्ष इंजीनियर शुभम यादव के नेतृत्व में समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने जिलाधिकारी अंजनी कुमार को ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने भी फिल्म के प्रचार सामग्री में यादव समुदाय को गलत ढंग से पेश किए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि इससे समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
इसी तर्ज पर मैनपुरी में भी यादव महासभा ने फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यादव महासभा युवा के जिलाध्यक्ष इंजीनियर शुभम यादव के नेतृत्व में समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने जिलाधिकारी अंजनी कुमार को ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने भी फिल्म के प्रचार सामग्री में यादव समुदाय को गलत ढंग से पेश किए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि इससे समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
महासभा ने भी यही आशंका जताई कि बिना जांच के फिल्म रिलीज होने पर सामाजिक वैमनस्य और तनाव पैदा हो सकता है। उनकी भी मुख्य मांग है कि प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच हो और जांच लंबित रहने तक फिल्म का प्रदर्शन रोका जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में दीपू घुटारा, विकास यादव शालू, ओमराज यादव, शिवम यादव, रोहित यादव, अंजनी, सचिन आदि प्रमुख थे।
'घूसखोर पंडित' फिल्म का विवाद: जानिए पूरा मामला
हाल ही में अभिनेता मनोज बाजपेयी अभिनीत एक फिल्म के शीर्षक को लेकर काफी विवाद उत्पन्न हुआ था। फिल्म का शीर्षक 'घूसखोर पंडित' था, और इसे लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। इस विवाद की जड़ें फिल्म के नाम से उपजी भावनाओं और संभावित सामाजिक प्रभाव से जुड़ी थीं।
हाल ही में अभिनेता मनोज बाजपेयी अभिनीत एक फिल्म के शीर्षक को लेकर काफी विवाद उत्पन्न हुआ था। फिल्म का शीर्षक 'घूसखोर पंडित' था, और इसे लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। इस विवाद की जड़ें फिल्म के नाम से उपजी भावनाओं और संभावित सामाजिक प्रभाव से जुड़ी थीं।
विवाद का जन्म और कारण
यह विवाद तब शुरू हुआ जब नेटफ्लिक्स ने मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म 'घूसखोर पंडित' का एलान किया। फिल्म के इस शीर्षक को लेकर कुछ समुदायों, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया। विरोध प्रदर्शनों में फिल्म के नाम को आपत्तिजनक करार दिया गया और यह आरोप लगाया गया कि यह शीर्षक समाज के एक विशेष वर्ग को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब नेटफ्लिक्स ने मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म 'घूसखोर पंडित' का एलान किया। फिल्म के इस शीर्षक को लेकर कुछ समुदायों, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया। विरोध प्रदर्शनों में फिल्म के नाम को आपत्तिजनक करार दिया गया और यह आरोप लगाया गया कि यह शीर्षक समाज के एक विशेष वर्ग को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है।
कानूनी कार्रवाई और न्यायालय का हस्तक्षेप
विवाद के गहराने के बाद, उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हजरतगंज पुलिस स्टेशन में फिल्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामले ने तब और तूल पकड़ा जब दिल्ली हाईकोर्ट ने वकील विनीत जिंदल की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिल्म के नाम और उससे जुड़ी सभी प्रचार-सामग्री को सभी प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया।
विवाद के गहराने के बाद, उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हजरतगंज पुलिस स्टेशन में फिल्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामले ने तब और तूल पकड़ा जब दिल्ली हाईकोर्ट ने वकील विनीत जिंदल की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिल्म के नाम और उससे जुड़ी सभी प्रचार-सामग्री को सभी प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में दखल दिया और फिल्म के शीर्षक पर आपत्ति जताते हुए मेकर्स को फटकार लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे शीर्षकों का इस्तेमाल करके समाज के किसी भी हिस्से को बदनाम नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने फिल्म के नए नाम के बारे में बताने तक इसकी रिलीज पर रोक लगा दी।
निर्माताओं और अभिनेताओं की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी ने सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि फिल्म का टाइटल किसी जाति या समुदाय विशेष से संबंधित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है जिसमें कुछ कमियां हैं, और यह एक काल्पनिक कहानी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म का उद्देश्य किसी समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं था।
इस पूरे विवाद पर फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी ने सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि फिल्म का टाइटल किसी जाति या समुदाय विशेष से संबंधित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है जिसमें कुछ कमियां हैं, और यह एक काल्पनिक कहानी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म का उद्देश्य किसी समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं था।