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UP: 'जैनब लिपट के रोईं अब्बास के अलम से...' नौहों के बीच नम हुईं आंखें; अलम के जुलूस में छलका दर्द-ए-कर्बला
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 24 Jun 2026 10:27 AM IST
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सार
मुहर्रम की सातवीं तारीख पर शाहगंज में अलम का जुलूस निकाला गया, जिसमें अकीदतमंदों ने नौहाख्वानी और मातम के जरिए हजरत अब्बास और कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं पाय चौकी में ऐतिहासिक फूलों का ताजिया रखे जाने के साथ शहरभर में ताजियेदारी शुरू हो गई और बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचने लगे।
अलम का जुलूस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुहर्रम की सातवीं तारीख पर मंगलवार को अंजुमन-ए-पंजतनी, शाहगंज की ओर से चिल्लीपाड़ा पुराने इमामबाड़े से अलम का जुलूस निकाला गया। अमीर अहमद के कदीमी नौहे जैनब लिपट के रोईं अब्बास के अलम से...कर्बला के जंगलों में शाह का घराना है, तीन दिन के प्यासों को रोने का जमाना है...के साथ आगाज हुआ तो हर आंख नम हो गई। या सकीना..या अब्बास की सदाएं गूंज उठीं। काले लिबास में सीनाजनी करते हुए लोग हजरत अब्बास की शहादत का गम मना रहे थे। नौजवानों ने जंजीर और कमां से अपने नंगे बदन को लहूलुहान कर लिया।
शाहगंज गांधी चौक से जुलूस बाहर निकला तो बशारत अली सैफ़ ने नौहा पेश किया, जिस पर नौजवानों ने ज़बरदस्त मातम किया। शाहे करबला लीजिए सलाम लेके आए हैं आपके गुलाम.. नौहे के साथ सीनाजनी करते हुए आगे बढ़े। जुलूस में शामिल सभी अज़ादार काले लिबास में नंगे पांव चलते रहे। शाहगंज चौराहे पर अजादारों ने जंजीर (छुरियों) का मातम करके इमाम हुसैन व करबला के शहीदों को नजराना-ए-अकीदत पेश किया। जंजीर के मातम की सदा राहिब जाफरी व मुहम्मद अब्बास जाफ़री ने पेश की।
शाहगंज गांधी चौक से जुलूस बाहर निकला तो बशारत अली सैफ़ ने नौहा पेश किया, जिस पर नौजवानों ने ज़बरदस्त मातम किया। शाहे करबला लीजिए सलाम लेके आए हैं आपके गुलाम.. नौहे के साथ सीनाजनी करते हुए आगे बढ़े। जुलूस में शामिल सभी अज़ादार काले लिबास में नंगे पांव चलते रहे। शाहगंज चौराहे पर अजादारों ने जंजीर (छुरियों) का मातम करके इमाम हुसैन व करबला के शहीदों को नजराना-ए-अकीदत पेश किया। जंजीर के मातम की सदा राहिब जाफरी व मुहम्मद अब्बास जाफ़री ने पेश की।
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अलम का जुलूस
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद हसन अख्तर, गजनफर रिज़वी, हसन मेहंदी व नौशाद हुसैन ने नौहे पेश किए। संचालन नसीम हैदर जाफरी ने किया। संरक्षक अमीर अहमद जाफरी, अध्यक्ष हुसैन मेहंदी, कौनेन अमीर जाफरी, अनवर हुसैन मिर्जा, अली हैदर जाफरी, गौहर जाफरी मोहम्मद मेहंदी, ऐहतिशाम हैदर जाफ़री, अमान मिर्जा ने व्यवस्थाएं संभाली। मुहम्मद अहमद जाफरी, अली मंजर जाफरी, इसरार हैदर, हाशिम रिजवी, मेहराज हैदर, ताहिर जैदी, डॉ. एमएच जाफरी आदि मौजूद रहे। इसके पहले इमामबाड़े में मजलिस को मौलाना सैयद जफर अब्बास रिज़वी ने खिताब करते हुए कर्बला के जांबांजों पर हुए जुल्मों को बयां किया।
पाय चौकी में रखा गया फूलों का ताजिया, उमड़े अकीदतमंद
पाय चौकी (कटरा दबकैय्यान) में ऐतिहासिक फूलों का ताजिया शाम को रखा गया। इसके साथ ही शहरभर में ताजियेदारी शुरू हो गई। लोगों ने अपने घरों और इमामबाड़ों में ताजिये रखे। फूलों के ताजिये पर फातिहाख्वानी और गुलपोशी के बाद जायरीन के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जोकि अगले तीन दिन तक चलेगा। मुहर्रम की दसवीं को शहर की विभिन्न कर्बलाओं में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। चांदीवाला ताजिया सूफी बुंदन मियां के निवास पर रखा गया। कई जगह शर्बत की प्याऊ लगाई गईं। इसी तरह मंटोला में अदनान कुरैशी के नेतृत्व में शर्बत की छबील लगाई गई।
पाय चौकी में रखा गया फूलों का ताजिया, उमड़े अकीदतमंद
पाय चौकी (कटरा दबकैय्यान) में ऐतिहासिक फूलों का ताजिया शाम को रखा गया। इसके साथ ही शहरभर में ताजियेदारी शुरू हो गई। लोगों ने अपने घरों और इमामबाड़ों में ताजिये रखे। फूलों के ताजिये पर फातिहाख्वानी और गुलपोशी के बाद जायरीन के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जोकि अगले तीन दिन तक चलेगा। मुहर्रम की दसवीं को शहर की विभिन्न कर्बलाओं में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। चांदीवाला ताजिया सूफी बुंदन मियां के निवास पर रखा गया। कई जगह शर्बत की प्याऊ लगाई गईं। इसी तरह मंटोला में अदनान कुरैशी के नेतृत्व में शर्बत की छबील लगाई गई।