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Taj Mahal: ताजमहल की शाही मस्जिद का 92 साल बाद होगा संरक्षण, इतनी रकम होगी खर्च; तैयार किया गया पूरा प्लान
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 29 Apr 2026 09:52 AM IST
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सार
ताजमहल परिसर की शाही मस्जिद में 92 साल बाद बड़े स्तर पर संरक्षण कार्य कराया जाएगा, जिस पर 60 लाख रुपये खर्च होंगे। गुंबद, छत और दीवारों की मरम्मत के साथ उखड़े पत्थरों और इनले पीस को बदला जाएगा, जिससे ऐतिहासिक धरोहर को नई मजबूती मिलेगी।
ताजमहल परिसर की शाही मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ताजमहल के मुख्य मकबरे के पश्चिमी ओर बनी शाही मस्जिद को सहेजा जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण 92 साल बाद इसकी छत, गुंबद और दीवार से उखड़े पत्थरों का संरक्षण कार्य कराएगा। इस पर 60 लाख रुपये खर्च होंगे और एक साल का समय लगेगा। शाही मस्जिद के तीनों गुंबदों की पॉइंटिंग के साथ गले हुए पत्थरों और इनले पीस को बदलने का काम किया जाएगा।
दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल के मुख्य मकबरे के पास जवाब शैली में मेहमानखाने की तरह बनी शाही मस्जिद का बड़े पैमाने पर संरक्षण किया जाएगा। 10 साल पहले भी शाही मस्जिद में काम कराया गया था, लेकिन छत के लाइम प्लास्टर, गुंबदों की पॉइंटिंग, लोहे की गली हुई रॉड बदलने, इनले पीस दोबारा लगाने जैसे काम वर्ष 1934 के बाद अब किए जाएंगे।
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दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल के मुख्य मकबरे के पास जवाब शैली में मेहमानखाने की तरह बनी शाही मस्जिद का बड़े पैमाने पर संरक्षण किया जाएगा। 10 साल पहले भी शाही मस्जिद में काम कराया गया था, लेकिन छत के लाइम प्लास्टर, गुंबदों की पॉइंटिंग, लोहे की गली हुई रॉड बदलने, इनले पीस दोबारा लगाने जैसे काम वर्ष 1934 के बाद अब किए जाएंगे।
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करीब 92 साल बाद इस स्तर पर संरक्षण कार्य कराया जाएगा। तब पश्चिमी दीवार की ओर पाड़ लगाकर काम कराया गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ संरक्षण सहायक कलंदर बिंद के मुताबिक 60 लाख रुपये के संरक्षण का प्रस्ताव भेजा गया है। ताजमहल की शाही मस्जिद में संरक्षण का सर्वे कराया गया है। मंजूरी के बाद एक साल का समय संरक्षण में लगेगा।
भूकंप ने किया था क्षतिग्रस्त, 14,385 रुपये हुए थे खर्च
92 साल पहले ताजमहल की शाही मस्जिद को 15 जनवरी 1934 को आए भूकंप ने काफी नुकसान पहुंचाया था। तब मस्जिद के पश्चिमी मुखौटे की पत्थर की परतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिन्हें आधार से ही तोड़कर स्थापित किया गया था। भूकंप से पत्थर टूट गए थे, जिन्हें दो साल तक संरक्षण के बाद सेट किया गया। लीकेज रोकने के लिए छत और पॉइंटिग का काम कराया गया था। इस काम पर तब 14,385 रुपये एएसआई ने खर्च किए थे, जबकि पूरे संयुक्त प्रांत आगरा एवं अवध के स्मारकों पर 1.32 लाख रुपये खर्च किए गए थे। भूकंप से प्रभावित स्मारकों पर तब 42,119 रुपये खर्च हुए थे।
92 साल पहले ताजमहल की शाही मस्जिद को 15 जनवरी 1934 को आए भूकंप ने काफी नुकसान पहुंचाया था। तब मस्जिद के पश्चिमी मुखौटे की पत्थर की परतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिन्हें आधार से ही तोड़कर स्थापित किया गया था। भूकंप से पत्थर टूट गए थे, जिन्हें दो साल तक संरक्षण के बाद सेट किया गया। लीकेज रोकने के लिए छत और पॉइंटिग का काम कराया गया था। इस काम पर तब 14,385 रुपये एएसआई ने खर्च किए थे, जबकि पूरे संयुक्त प्रांत आगरा एवं अवध के स्मारकों पर 1.32 लाख रुपये खर्च किए गए थे। भूकंप से प्रभावित स्मारकों पर तब 42,119 रुपये खर्च हुए थे।
शाही मस्जिद में ये हो चुके संरक्षण कार्य
- वर्ष 1899: गुंबददार छत के पत्थर बदले, इनले पीस और सजावटी चित्रों के 11 पैनल बनाए गए।
- वर्ष 1902: केंद्रीय मेहराब के चारों ओर झालर पट्टी बहाल की, गुंबद और नीचे नक्काशी पैनल लगाए।
- वर्ष 1923: केंद्रीय मेहराब के उखड़े पत्थर लगाए, दक्षिण9पश्चिम में आई दरार भरी, नक्काशी बहाल की।
- वर्ष 1925: भूकंप के कारण मेहराब में दरार आई, दीवार के पत्थर निकले, जिन्हें दोबारा लगाया गया।
- वर्ष 1928: वजू टैंक में रिसाव रोककर जलरोधी बनाया, दोनों मीनारों के उभरे पत्थरों को फिर लगाया।
- वर्ष 1934: भूकंप से क्षतिग्रस्त पश्चिमी मुखौटे को बदला, पैराफिट से आधार तक के पत्थर बदले गए।
- वर्ष 1958: मस्जिद के खुले परिसर में 33.5 मीटर तक फर्श के पत्थर बदले, दराराें को भरा गया।
- वर्ष 1991: बिजली गिरने से नुकसान बचाने के लिए तांबे का लाइटनिंग कंडक्टर लगाया गया
- वर्ष 1899: गुंबददार छत के पत्थर बदले, इनले पीस और सजावटी चित्रों के 11 पैनल बनाए गए।
- वर्ष 1902: केंद्रीय मेहराब के चारों ओर झालर पट्टी बहाल की, गुंबद और नीचे नक्काशी पैनल लगाए।
- वर्ष 1923: केंद्रीय मेहराब के उखड़े पत्थर लगाए, दक्षिण9पश्चिम में आई दरार भरी, नक्काशी बहाल की।
- वर्ष 1925: भूकंप के कारण मेहराब में दरार आई, दीवार के पत्थर निकले, जिन्हें दोबारा लगाया गया।
- वर्ष 1928: वजू टैंक में रिसाव रोककर जलरोधी बनाया, दोनों मीनारों के उभरे पत्थरों को फिर लगाया।
- वर्ष 1934: भूकंप से क्षतिग्रस्त पश्चिमी मुखौटे को बदला, पैराफिट से आधार तक के पत्थर बदले गए।
- वर्ष 1958: मस्जिद के खुले परिसर में 33.5 मीटर तक फर्श के पत्थर बदले, दराराें को भरा गया।
- वर्ष 1991: बिजली गिरने से नुकसान बचाने के लिए तांबे का लाइटनिंग कंडक्टर लगाया गया

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