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चालक की लापवाही से छात्रा की जान पर बन आई: खुला रह गया स्कूल वैन का गेट, चलती गाड़ी से गिरी मासूम; गंभीर घायल

Wed, 12 Aug 2026 08:54 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Wed, 12 Aug 2026 08:54 PM IST
सार

कक्षा एक की छात्रा के साथ स्कूल वैन में बड़ा हादसा हो गया। छात्रा छुट्टी के बाद स्कूल से घर आ रही थी, तभी गेट खुला रहने से चलती वैन से गिर गई। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गई। 

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School girl critically injured after falling from moving school van
स्कूल वैन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के सिकंदरा क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित इंटर कॉलेज के वैन चालक की लापरवाही से कक्षा एक की छात्रा की जान पर बन आई। वैन का गेट खुल गया और बच्ची वैन से गिरकर घायल हो गई। 14 जुलाई की घटना की रिपोर्ट परिजन ने न्यू आगरा थाने में अब दर्ज कराई है। पुलिस जांच कर रही है।
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ककरैठा, सिकंदरा निवासी महिला ने बताया कि उनकी बेटी हाईवे स्थित इंटर कॉलेज में कक्षा एक में पढ़ती है। बच्ची को स्कूल छोड़ने और वापस लाने के लिए विनोद परिहार नामक वैन चालक को लगाया था। 14 जुलाई को बेटी को स्कूल से घर लाते समय चालक ने वैन का गेट ठीक से बंद नहीं किया। इस कारण चंद्रा नगर के पास बेटी चलती वैन से गिर गई। वह गंभीर घायल हो गई। 
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परिजन ने दिल्ली गेट स्थित निजी अस्पताल में बेटी को भर्ती कराया। उसके इलाज के बाद पुलिस से शिकायत की गई। आरोप है कि चालक कमाई के लालच में मानक से अधिक बच्चों को वैन में लाता है। मामले में डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

 

मजबूरी में बच्चों को भेजते हैं परिजन
निजी स्कूलों में परिवहन की व्यवस्था सीमित है। सभी को कॉलेज की बस से लाया नहीं जा सकता है। स्कूलों की शह पर बाहर वैन संचालक खड़े होते हैं। वैन में मानक पूरे नहीं होते हैं और तय सीमा से ज्यादा बच्चों को बिठाया जाता है। वजीरपुरा रोड स्थित स्कूल में पढ़ने वाले छात्र की मां ने बताया कि पति की निजी नौकरी है। उन्हें स्कूटी चलाना नहीं आता है। मजबूरी में वैन लगवानी पड़ी। वैन में 12 से ज्यादा बच्चे ले जाता है। पर वह मजबूरी में चालक के साथ बच्चे को भेजती हैं। ऐसे मजबूरी में बच्चों को वैन से भेजने वाले अभिभावकों की कमी नहीं है।

 
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कागजों पर चलते हैं अभियान
बीते दिनों यातायात पुलिस और आरटीओ ने स्कूली वाहनों की फिटनेस और मानकों को लेकर अभियान चलाए। चालान और सीज की कार्रवाई भी हुई। अभियान ठंडा होते ही मामला फिर जस का तस हो गया। बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए अभिभावक मजबूर हैं। स्कूल प्रबंधन का भी इस ओर ध्यान नहीं है।

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