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UP: कॉपियों के रेट भी उड़ा रहे होश, स्कूलों की मनमानी से अभिभावक बेहाल; बोले- बच्चों को पढ़ाना हुआ मुश्किल
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 26 Mar 2026 10:15 AM IST
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सार
नए सत्र की शुरुआत के साथ स्कूलों द्वारा अधिकृत दुकानों पर कॉपी-किताब और स्टेशनरी दोगुने दामों पर बेची जा रही है। बाजार में वही सामान सस्ता मिलने के बावजूद अभिभावकों को मजबूरी में महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
स्कूल की छात्रा (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
स्कूल अब शिक्षा के मंदिर नही व्यापार का केंद्र बनते जा रहे हैं। नए शैक्षणिक सत्र के आगाज के साथ ही अभिभावकों से लूट शुरू हो गई है। स्कूल की ओर से अधिकृत पुस्तक विक्रेता न केवल बाजार मूल्य से दोगुनी कीमत पर कॉपियां बेच रहे हैं, बल्कि स्टेशनरी के नाम पर भी खुली लूट मची है। इन पुस्तक विक्रेताओं के यहां नो डिस्काउंट की नीति का सख्ती से पालन किया जाता है। जबकि बाजार में वही कॉपियां और स्टेशनरी आधी कीमत पर 15 से 20 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ आसानी से उपलब्ध हैं।
शहर के तमाम स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। इसी के साथ शुरू हो चुका है अभिभावकों के शोषण का खेल। तय दुकान से कॉपी, किताब, यूनिफॉर्म और यहां तक कि जूते खरीदने पड़ रहे हैं। पुस्तक विक्रेताओं के पास कक्षावार छात्र-छात्राओं की संख्या है, जिससे वह यह आसानी से पता लगा पाते हैं कि कक्षा के कितने विद्यार्थियों की खरीद अभी शेष है। अभिभावकों से पूरे सेट की कीमत वसूलने के बाद भी विक्रेता एक या दो किताबें शॉर्ट बताकर उन्हें बाद में क्लास में बंटवाने का आश्वासन दे रहे हैं।
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शहर के तमाम स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। इसी के साथ शुरू हो चुका है अभिभावकों के शोषण का खेल। तय दुकान से कॉपी, किताब, यूनिफॉर्म और यहां तक कि जूते खरीदने पड़ रहे हैं। पुस्तक विक्रेताओं के पास कक्षावार छात्र-छात्राओं की संख्या है, जिससे वह यह आसानी से पता लगा पाते हैं कि कक्षा के कितने विद्यार्थियों की खरीद अभी शेष है। अभिभावकों से पूरे सेट की कीमत वसूलने के बाद भी विक्रेता एक या दो किताबें शॉर्ट बताकर उन्हें बाद में क्लास में बंटवाने का आश्वासन दे रहे हैं।
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अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को विभिन्न स्कूलों की कॉपी-किताबों की रेट लिस्ट का मिलान जब बाजार से किया तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। खुदरे में वही कॉपियां आधे दामों पर मिल रही हैं। इस पर भी विक्रेता बिना कहे 15 प्रतिशत डिस्काउंट देने को तैयार हैं। अगर किसी अभिभावक को दो या अधिक बच्चों की कॉपियां खरीदनी है तो यह डिस्काउंट बढ़कर 25 प्रतिशत तक हो जाता है। अगर बात किनारी बाजार की करें तो यहां कॉपियों के थोक का काम होता है। यहां से उसी गुणवत्ता वाली कॉपियां 40 प्रतिशत डिस्काउंट पर हर दुकान पर उपलब्ध हैं।
स्टेशनरी में भी कमाया जा रहा है मुनाफा
स्कूलों ने कॉपियों के साथ स्टेशनरी के आइटम को भी मुनाफाखोरी का जरिया बना रखा है। कक्षा 8 तक प्रयोग होेने वाली कार्डबोर्ड ड्राइंग फाइल के 120 रुपये वसूले जा रहे हैं। जबकि बाजार में अच्छी से अच्छी फाइल भी 35-40 रुपये में मिल जाती है। इसी प्रकार क्रेयॉंस, वाटर कलर, शेडिंग पेंसिल और ब्रश को भी दो-तीन गुनी कीमत पर अभिभावकों को बेचा जा रहा है। कुछ स्कूल, कॉपी और कवर पर स्कूल का नाम प्रिंट करवाकर मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। एक प्रतिष्ठित स्कूल की कॉपियों को कवर करने वाली ट्रांसपेरेंट शीट के लिए अभिभावकों से 500 रुपये वसूले जा रहे हैं।
स्कूलों ने कॉपियों के साथ स्टेशनरी के आइटम को भी मुनाफाखोरी का जरिया बना रखा है। कक्षा 8 तक प्रयोग होेने वाली कार्डबोर्ड ड्राइंग फाइल के 120 रुपये वसूले जा रहे हैं। जबकि बाजार में अच्छी से अच्छी फाइल भी 35-40 रुपये में मिल जाती है। इसी प्रकार क्रेयॉंस, वाटर कलर, शेडिंग पेंसिल और ब्रश को भी दो-तीन गुनी कीमत पर अभिभावकों को बेचा जा रहा है। कुछ स्कूल, कॉपी और कवर पर स्कूल का नाम प्रिंट करवाकर मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। एक प्रतिष्ठित स्कूल की कॉपियों को कवर करने वाली ट्रांसपेरेंट शीट के लिए अभिभावकों से 500 रुपये वसूले जा रहे हैं।
प्रतापपुरा निवासी अखिल मुद्गल ने बताया कि थोक मार्केट में मिल रहा है 40 प्रतिशत डिस्काउंटस्कूल की ओर से निर्धारित पुस्तक विक्रेता एक रुपये भी कम नहीं करते। जबकि मार्केट में हर जगह 15 प्रतिशत डिस्काउंट तो बिना कहे ही मिल जाता है। थोक मार्केट में यह डिस्काउंट 40 प्रतिशत तक है। ऐसे में प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए, जिससे अभिभावकों को राहत मिल सके।
बिगड़ गया है घर का बजट
बल्केश्वर निवासी कुमकुम उपाध्याय ने बताया कि अभी तो सिर्फ कॉपी किताबें ही मंगवाई हैं। अभी स्कूल से फीस का फरमान भी आ जाएगा। वो भी 30 से 35 प्रतिशत तक बढ़कर आएगी। इसी महीने टैक्स की कटौती भी होती है। मध्यम वर्गीय परिवार के लिए मार्च का महीना काटना किसी जंग जीतने जैसा है।
बल्केश्वर निवासी कुमकुम उपाध्याय ने बताया कि अभी तो सिर्फ कॉपी किताबें ही मंगवाई हैं। अभी स्कूल से फीस का फरमान भी आ जाएगा। वो भी 30 से 35 प्रतिशत तक बढ़कर आएगी। इसी महीने टैक्स की कटौती भी होती है। मध्यम वर्गीय परिवार के लिए मार्च का महीना काटना किसी जंग जीतने जैसा है।