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ये कैसा है सिस्टम?: जिंदा होने की देनी पड़ रही गवाही, रिश्वत नहीं दी तो इन बुजुर्गों को ओढ़ा दिया 'कागजी कफन'

Fri, 14 Aug 2026 03:11 PM IST
Dhirendra Singh संजीव जूरैल, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संजीव जूरैल, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 14 Aug 2026 03:11 PM IST
सार

वृद्धावस्था पेंशन के सत्यापन के दौरान सात जीवित बुजुर्गों को रिकॉर्ड में मृत दर्शाने का मामला सामने आया है। पीड़ितों का आरोप है कि 200 रुपये नहीं देने पर उन्हें मृत दिखाकर पेंशन रोक दी गई, जबकि लेखपाल ने रिश्वत मांगने से इनकार किया है।

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Seven Living Elderly People Declared Dead in Pension Verification, Bribery Alleged
जिंदा होने की देनी पड़ रही गवाही - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के सदर तहसील के एक लेखपाल की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार ने इन्सानियत को शर्मसार कर दिया। एक हजार रुपये की वृद्धावस्था पेंशन के सहारे गुजर-बसर करने वाले ताजगंज और कटरा फुलेल के बुजुर्गों को रिश्वत नहीं देने पर कागजों में मृत घोषित कर दिया। अपने जीवित होने की गवाही देने के लिए बुजुर्ग लेखपाल और एसडीएम के दफ्तरों की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
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तहसील में कार्यरत लेखपाल सत्यदीप को ताजगंज और कटरा फुलेल में बुजुर्गों का सत्यापन करना था लेकिन उन्होंने माैके पर न जाकर क्षेत्र के जनसेवा केंद्र (सीएससी) संचालक को जिम्मेदारी साैंप दी। सीएससी संचालक की जानकारी के आधार पर सात जीवित बुजुर्गों को मृत दिखाते हुए रिपोर्ट लगा दी। जानकारी होने पर बुजुर्ग तहसील पर शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
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पीड़ितों का आरोप है कि सीएससी संचालक ने 200 रुपये और आधार कार्ड लेकर आने को कहा। जब रुपये नहीं दिए तो उन्हें मृत दर्शाते हुए पेंशन रोक दी गई। लेखपाल ने किसी के भी घर जाकर सत्यापन नहीं किया। 
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नियम दरकिनार, सीएससी संचालक से कराया सत्यापन
समाज कल्याण विभाग की ओर से हर साल वृद्धावस्था पेंशन के लिए सत्यापन कराया जाता है। इसकी जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारी और शहरी क्षेत्र में एसडीएम को दी जाती है। सदर तहसील के एसडीएम ने लेखपालों को घर-घर जाकर सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी थी लेकिन लेखपाल सत्यदीप ने खुद न जाकर सीएससी संचालक को सत्यापन की जिम्मेदारी सौंप दी, जो नियम विरुद्ध है।

पीड़ितों का पक्ष
ताजनगरी फेज-वन निवासी वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि मेरे पास चंद्र वैध गली के सीएससी संचालक का फोन आया था। उसने 200 रुपये लेकर आने को कहा। मैं तीसरे दिन पहुंचा तो बताया कि आपकी रिपोर्ट भेज दी है। उसमें आपको मृतक लिख दिया है। लेखपाल के पास गया तो वह नहीं मिले। 

पुरानी सब्जी मंडी निवासी ताराचंद ने हचाआ ति मेरे बेटे के पास सीएससी संचालक ने फोन कर आधार कार्ड और 200 रुपये लेकर बुलाया। जब पैसे मांगने का कारण पूछा तो कहा कि मेरी और लेखपाल की फीस है। नहीं दोगे तो तहसील में और ज्यादा देने पड़ेंगे। रुपये नहीं देने पर मेरे मृत होने की रिपोर्ट लगा दी। 

कटरा फुलेल निवासी प्रकाशवती ने बताया कि घर पर सत्यापन के लिए लेखपाल नहीं आया। उसने बिना पता किए मुझे मृत बना दिया। बड़ी मुश्किल से पेंशन शुरू हुई थी। अब फिर भागदौड़ करनी पड़ रही है।

ताजगंज के बसई खुर्द निवासी शिशुपाल ने बताया कि तीन साल से पेंशन ले रहा हूं। एक भी बार लेखपाल घर नहीं आया है। पिछली बार भी बिना जाने मृतक लिख दिया था। बहुत भागदौड़ करने के बाद सही कराया था। 

नहीं मांगे रुपये
लेखपाल सत्यदीप का कहना है कि मैंने रुपयों की कोई मांग नहीं की है। जिनका नाम गलत हुआ है वे लोग मेरे पास आ सकते हैं। सुधार कर दिया जाएगा।

प्रकरण की जांच कराएंगे
एसडीएम सदर विक्रम सिंह राघव ने कहा कि मामले की जांच कराएंगे। अगर जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित किया गया है तो लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सीएससी संचालक के माध्यम से सत्यापन कराने की भी जांच कराई जाएगी। 

इन्हें घोषित किया मृत
शिशुपाल सिंह, वीरेंद्र तिवारी, मंजू तिवारी, प्रकाशवती, सरोज, ताराचंद और किशनलाल।
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