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बारिश में बिलों से बाहर निकले सांप: कदम-कदम पर खतरा, सर्पदंश से युवती की मौत; ये इंजेक्शन बचाएगा जान
Mon, 06 Jul 2026 10:20 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 06 Jul 2026 10:20 AM IST
सार
बारिश के कारण बिलों से सांप बाहर निकलने से सर्पदंश के मामले बढ़ रहे हैं और एक युवती की मौत भी हो चुकी है। डॉक्टरों ने तंत्र-मंत्र या बायगीर के भरोसे रहने के बजाय तुरंत अस्पताल जाकर एंटी स्नेक वेनम से इलाज कराने की सलाह दी है।
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सांप
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बारिश शुरू होते ही सांप बिलों से बाहर आ रहे हैं। इससे सर्पदंश के मामले में बढ़ गए हैं। एसएन मेडिकल काॅलेज की इमरजेंसी में बीते सप्ताह से रोज तीन से पांच मरीज सर्पदंश के आ रहे हैं। एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन लगने से हालत ठीक हो रही है। दो दिन पहले शमसाबाद में दो लोगों को सांप ने डस लिया, जिसमें एक युवती की मौत हो गई।
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प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि बारिश का पानी बिल में भरने से सांप बाहर निकलते हैं। इससे सर्पदंश का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में एएसवी इंजेक्शन का स्टॉक भी कर लिया है। उपचार के 24-48 घंटे में मरीज ठीक होने पर डिस्चार्ज किए जा रहे हैं। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि सीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन की व्यवस्था की गई है। स्टाफ को भी अलर्ट किया है।
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बायगीर का इलाज हो सकता है खतरनाक
एसएन मेडिकल काॅलेज की इमरजेंसी के डॉ. चंद्रप्रकाश गौतम ने बताया कि अधिकांश सांप जहरीले नहीं होते हैं। जहरीले सांप दो तरह के हैं। न्यूरोटॉक्सिक होने पर तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ता है और लकवा मारने लगता है। ये करैत और कोबरा सांप के डसने से होता है। वहीं हीमोटॉक्सिक होने पर ये शरीर का रक्तसंचार बढ़ा देते हैं। ये वाइपर होते हैं। इनके डसने पर खून का थक्का नहीं जमता और लगातार खून बहता है। ऐसे में डसे हुए हिस्से पर चीरा लगाने, मुंह से जहर चूसने का प्रयास न करें। जहरीले सर्प के काटने पर बायगीर-तंत्रमंत्र के फेर में समय बर्बाद होने से मरीज की जान जा सकती है। ऐसे में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर उपचार कराएं। इससे जान बच जाएगी।
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एसएन मेडिकल काॅलेज की इमरजेंसी के डॉ. चंद्रप्रकाश गौतम ने बताया कि अधिकांश सांप जहरीले नहीं होते हैं। जहरीले सांप दो तरह के हैं। न्यूरोटॉक्सिक होने पर तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ता है और लकवा मारने लगता है। ये करैत और कोबरा सांप के डसने से होता है। वहीं हीमोटॉक्सिक होने पर ये शरीर का रक्तसंचार बढ़ा देते हैं। ये वाइपर होते हैं। इनके डसने पर खून का थक्का नहीं जमता और लगातार खून बहता है। ऐसे में डसे हुए हिस्से पर चीरा लगाने, मुंह से जहर चूसने का प्रयास न करें। जहरीले सर्प के काटने पर बायगीर-तंत्रमंत्र के फेर में समय बर्बाद होने से मरीज की जान जा सकती है। ऐसे में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर उपचार कराएं। इससे जान बच जाएगी।
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