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आर्काइव: 1956 में स्वेज नहर संकट...जब गहराया महायुद्ध का खतरा, आगरा एयरफोर्स से शांति मिशन में गए थे जवान

अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 08 Oct 2024 03:12 PM IST
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सार

वायु सेना दिवस मनाया जा रहा है। ऐसे में अमर उजाला आर्काइव से एक ऐसा वाक्या बताने जा रहे हैं, जब आगरा एयरफोर्स से 1956 में स्वेज नहर संकट के दौरान जवान शांति मिशन के लिए मिस्र भेजे गए थे।
 

Suez Canal crisis in 1956 when threat of world war deepened soldiers from Agra Air Force went on peace mission
वायु सेना (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

Air Force Day: 8 अक्तूबर, 1932 यानी वह गौरवशाली दिन, जब भारतीय वायु सेना की स्थापना हुई। आगरा का खेरिया हवाई अड्डा 15 अगस्त, 1947 को औपचारिक रूप से एयरफोर्स स्टेशन के रूप में अस्तित्व में आया, हालांकि आगरा का खेरिया हवाई अड्डा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी मित्र देशों के लिए अपनी सेवाएं देता रहा था। स्थापना के महज 9 साल बाद ही स्वेज नहर संकट के दौरान 1956 में आगरा एयरफोर्स स्टेशन ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। महायुद्ध के खतरे के बीच यहीं से शांति मिशन के लिए 700 जवान मिस्र गए थे।
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स्वेज नहर संकट के दौरान आगरा हवाई अड्डे से भारतीय सेना को संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के तहत रवाना किया गया था। आजादी के बाद पहले ही दशक में भारत ने इसके जरिए वैश्विक शांति बनाए रखने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। यह खबर अमर उजाला संस्करण में 17 नवंबर, 1956 को प्रकाशित हुई थी। विश्व पर महायुद्ध का खतरा मंडरा रहा था। स्वेज नहर संकट ने विश्वभर में तनाव पैदा कर दिया था।
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मिस्र के राष्ट्रपति ने स्वेज नहर को नियंत्रण में ले लिया था। इसके बाद ब्रिटेन, फ्रांस और इस्राइल ने मिलकर मिस्र पर हमला कर दिया था। संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए भारतीय सेना के जवान मिस्र गए और उन्हीं में से सेना का एक दस्ता आगरा हवाई अड्डे से लेफ्टिनेंट कर्नल केएएस राजा के नेतृत्व में इटली के लिए रवाना हुआ था।

1954 में आम नागरिक के लिए खुला
खेरिया हवाई अड्डा 30 अगस्त, 1954 को गैर फौजी विमानों के लिए खोल दिया गया था। आगरा के महत्व को देखते हुए आगरा के नागरिकों की यह मांग थी कि यह हवाई अड्डा गैर फौजियों के लिए खोला जाए। अक्तूबर, 1954 के अंतिम सप्ताह में गैर फौजी प्रथम हवाई सर्विस चालू की गई थी। यह खबर अमर उजाला संस्करण में 30 अगस्त, 1954 को प्रकाशित हुई थी।
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