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UP: भ्रष्टाचार की सिल्ट में समा गई गंगा, छह दिन बाद नाले के कचरे में फंसी मिली लाश; ऐसी हो गई हालत
Tue, 14 Jul 2026 09:13 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 14 Jul 2026 09:13 AM IST
सार
आगरा में छह दिन से लापता गंगा देवी का शव किले के पीछे माधवगढ़ गार्डन के पास नाले में कचरे और सिल्ट के बीच मिला, जिससे नगर निगम के नाला सफाई के दावों पर सवाल उठ गए। पार्षदों ने अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
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नाले में मिली लाश
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा नगर निगम के नाला सफाई के दावों और भ्रष्टाचार की सिल्ट में गंगा समा गई। गंगा देवी नगर निगम की लापरवाही से जर्जर दुकान के ढह जाने से 20 फीट गहरे नाले में गिरीं लेकिन बाकी लोगों की तरह भाग्यशाली नहीं रहीं। छठवें दिन गंगादेवी का शव किले के पीछे माधवगढ़ गार्डन के पुल में कचरे और सिल्ट में फंसा मिला।
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नगर निगम के अफसर इसी नाले की तलीझाड़ सफाई के दावे लगातार कर रहे थे लेकिन गंगादेवी का शव सिल्ट और कचरे से भरे नाले में मिलने से दावे झूठे और जानलेवा साबित हुए हैं। पार्षदों ने अफसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है। नगर निगम के उपसभापति रहे वरिष्ठ पार्षद रवि बिहारी माथुर गंगादेवी का शव इस हालत में मिलने पर गुस्से में हैं। उन्होंने कहा कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव वर्मा के झूठ का पर्दाफाश हो गया है लेकिन दुखद ये है कि गंगादेवी की जान जाने के बाद भी निगम के अफसर अपनी आंखें खोलने को तैयार नहीं हैं।
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निगम के अधिकारी जामा मस्जिद से आंबेडकर पार्क तक और अमर सिंह गेट से झलकारी बाई चौराहे तक तलीझाड़ सफाई के दावे कर रहे थे। शव अमर सिंह गेट के आगे माधवगढ़ गार्डन के पुल के नीचे मिला। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों ने बड़ी मेहनत से महिला के शव को तलाश किया है लेकिन अफसरों के झूठे दावों के कारण इस तलाश में छह दिन लग गए। नाला तलीझाड़ साफ होता तो महज दो से ढाई फीट ही पानी रहता, जिसमें गंगादेवी जीवित बाहर निकल सकती थीं। अफसरों पर प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए।
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झोपड़ी वालों ने नाले में उतराता देखा था शव
जिस दिन हादसा हुआ, उसी शाम 7 बजे बारिश होने के कारण नाले में तेज बहाव में रामलीला मैदान के पास झोपड़ी में रहने वालों ने महिला का शव उतराता देखा था। निगम के अफसरों को बताया भी लेकिन किसी ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। सभी पहले दिन से जामा मस्जिद के पास ही तलाशने में लगे रहे। जबकि पार्षद रवि माथुर ने आंबेडकर पार्क के भूमिगत नाले और इसके आगे अमर सिंह गेट पर तलाशने का सुझाव दिया था।
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नगर निगम के अफसर इसी नाले की तलीझाड़ सफाई के दावे लगातार कर रहे थे लेकिन गंगादेवी का शव सिल्ट और कचरे से भरे नाले में मिलने से दावे झूठे और जानलेवा साबित हुए हैं। पार्षदों ने अफसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है। नगर निगम के उपसभापति रहे वरिष्ठ पार्षद रवि बिहारी माथुर गंगादेवी का शव इस हालत में मिलने पर गुस्से में हैं। उन्होंने कहा कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव वर्मा के झूठ का पर्दाफाश हो गया है लेकिन दुखद ये है कि गंगादेवी की जान जाने के बाद भी निगम के अफसर अपनी आंखें खोलने को तैयार नहीं हैं।
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निगम के अधिकारी जामा मस्जिद से आंबेडकर पार्क तक और अमर सिंह गेट से झलकारी बाई चौराहे तक तलीझाड़ सफाई के दावे कर रहे थे। शव अमर सिंह गेट के आगे माधवगढ़ गार्डन के पुल के नीचे मिला। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों ने बड़ी मेहनत से महिला के शव को तलाश किया है लेकिन अफसरों के झूठे दावों के कारण इस तलाश में छह दिन लग गए। नाला तलीझाड़ साफ होता तो महज दो से ढाई फीट ही पानी रहता, जिसमें गंगादेवी जीवित बाहर निकल सकती थीं। अफसरों पर प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए।
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झोपड़ी वालों ने नाले में उतराता देखा था शव
जिस दिन हादसा हुआ, उसी शाम 7 बजे बारिश होने के कारण नाले में तेज बहाव में रामलीला मैदान के पास झोपड़ी में रहने वालों ने महिला का शव उतराता देखा था। निगम के अफसरों को बताया भी लेकिन किसी ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। सभी पहले दिन से जामा मस्जिद के पास ही तलाशने में लगे रहे। जबकि पार्षद रवि माथुर ने आंबेडकर पार्क के भूमिगत नाले और इसके आगे अमर सिंह गेट पर तलाशने का सुझाव दिया था।
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