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UP: कलम छोड़ी, पत्थर तराशे और बन गईं एक्सपोर्ट क्वीन; शीनू ने 10 लाख रुपये से खड़ा किया 50 करोड़ का कारोबार

देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Sun, 08 Mar 2026 12:18 PM IST
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सार

आगरा की 35 वर्षीय शीनू ने पत्रकारिता छोड़ हस्तशिल्प निर्यात का कारोबार शुरू किया और आज उनका टर्नओवर करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वह 300 से अधिक महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं।
 

Women's Day 2026 Sheenu Builds 50 Crore Handicraft Business, Empowers 300 Women
शीनू की सफलता की कहानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

इरादों में जान और नीयत साफ हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। इसे सच कर दिखाया है 35 वर्षीय शीनू ने, जिन्होंने पत्रकारिता की कलम छोड़ पत्थरों को चुना। उन्हें तराशा और एक सफल एक्सपोर्टर के रूप में पहचान बनाई है।
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एक मुस्लिम परिवार की इस बेटी ने दस साल की कड़ी मेहनत से न केवल खुद को एक प्रमुख हस्तशिल्प निर्यातक के रूप में स्थापित किया, बल्कि 300 से अधिक महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रही हैं। अमेरिका और चीन तक अपने कारोबार का विस्तार करने वाली शीनू की नजर अब ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, न्यूजीलैंड और यूरोपीय बाजारों पर है। उनकी फैक्ट्री में काम करने वाली महिलाएं आज अपने परिवारों का मजबूत आर्थिक आधार बन चुकी हैं।
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कलम से तय किया कारोबार तक का सफर
शीनू के करियर की शुरुआत एक स्थानीय टीवी चैनल में पत्रकार के तौर पर हुई थी। दुनिया घूमने और कुछ अलग करने का सपना देखने वाली शीनू ने अपने ख्वाबों को हकीकत में बदलने के लिए पत्रकारिता छोड़ी और एक एक्सपोर्ट कंपनी में नौकरी कर व्यापार की बारीकियां सीखीं। खुद का वजूद बनाने के लिए वर्ष 2015 में बैंक से 10 लाख रुपये का स्वरोजगार ऋण लिया और अपना काम शुरू किया था।

 

एक मेज ने बदली तकदीर
शीनू बताती हैं कि दिल्ली में वर्ष 2015 में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय मेले में शिरकत करना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट रहा। वहां उन्होंने लकड़ी और पत्थर की नक्काशी वाली एक विशेष मेज प्रदर्शित की थी, जिसे अमेरिकी और चीनी खरीदारों ने खूब सराहा। वहीं से उन्हें दो बड़े ऑर्डर मिले और कारोबार चल निकला। खास बात यह है कि 10 साल बाद भी वे दोनों खरीदार उनकी कंपनी से जुड़े हुए हैं। उस एक मेज ने उनकी तकदीर बदल दी।

 

300 महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर
शीनू का कारोबार अब करीब 50 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच गया है। वायु विहार स्थित उनकी फैक्ट्री में पैकिंग और टेस्टिंग से लेकर प्रबंधन तक की जिम्मेदारी महिलाएं ही संभालती हैं। उन्होंने पथोली, मिढ़ाकुर, सुचेता और कलवारी जैसे गांवों की 300 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। शीनू के पिता जो एक बीमा कंपनी में कार्यरत थे और उनकी गृहिणी माता ने हर कदम पर उनका साथ दिया।

 

दोस्त का साथ और चुनौतियों से पाई जीत
निर्यात कारोबार का सफर आसान नहीं था। शीनू ने बताया कि कई बार खरीदारों ने भुगतान रोका और कई बार ऑर्डर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। ऐसे मुश्किल दौर में जब मन हताश हुआ, तब उनकी एक सहेली ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। शीनू कहती हैं, मेरी दोस्त के वे शब्द 'तू फिक्र मत कर, मैं हूं ना' मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत बन गए।

 
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