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होली की तैयारी : अलवर की मिट्टी-कन्नौज के इत्र की सुगंध से महकेगा अबीर-गुलाल, 30 क्विंटल माल हो रहा तैयार
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Thu, 19 Feb 2026 04:31 PM IST
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सार
स्वयं सहायता समूह की करीब 10 महिलाएं इस कार्य में जुटी हैं। अलवर की मिट्टी से बारीक चूर्ण तैयार कर कन्नौज के इत्र सुगंध इसमें मिलाई जा रही है, जिससे गुलाल न केवल रंगीन बल्कि खुशबूदार भी बनेगा।
बौनेर में गुलाल बनातीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं
- फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
अलीगढ़ जिले में पहली बार स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अबीर और गुलाल बना रही हैं, जिसमें राजस्थान के अलवर की मिट्टी और कन्नौज के इत्र की सुगंध का उपयोग किया जा रहा है। यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और कदम है।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत धनीपुर ब्लाॅक के बौनेर गांव से संचालित दुर्गा स्वयं सहायता समूह की करीब 10 महिलाएं इस कार्य में जुटी हैं। अध्यक्ष रश्मि शर्मा के साथ गांव की विजेता, कंचन, प्रतिमा, सुधा, पूनम, अंजू और पंकज शर्मा ने मिल कर अबीर और गुलाल बनाना शुरू किया है। पहले घरेलू जिम्मेदारियों और सीमित संसाधनों के कारण आर्थिक रूप से परिजनों पर निर्भर रहने वाली ये महिलाएं अब उद्यमिता की राह पर हैं। अलवर की मिट्टी से बारीक चूर्ण तैयार कर कन्नौज के इत्र सुगंध इसमें मिलाई जा रही है, जिससे गुलाल न केवल रंगीन बल्कि खुशबूदार भी बनेगा।
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अध्यक्ष पूनम ने बताया कि समूह का लक्ष्य लगभग 30 क्विंटल गुलाल उत्पादन का है। अभी से ही अबीर-गुलाल की मांग शुरू हो गई है। होली पर इसे स्थानीय बाजारों में बेचा और वितरित किया जाएगा। जिला मुख्यालय समेत हर ब्लाॅक और तहसील मुख्यालय पर कैंप लगा कर गुलाल बेचा जाएगा। गुलाल की कीमत 80 रुपये प्रति किग्रा रखी गई है।
पहली बार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने होली पर अबीर और गुलाल बनाना शुरू किया है। इन महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रयास न केवल आर्थिक स्वावलंबन देगा, बल्कि रासायनिक रंगों से होने वाले नुकसान से लोगों को बचाएगा।-मो. असलम, प्रोग्राम मैनेजर, एनआरएलएम।