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उम्मीदों पर फिरा पानी: आलू के बाद गेहूं पर आंधी-बारिश की मार, चार जिलों में 15 फीसदी फसल खराब
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sat, 21 Mar 2026 08:18 PM IST
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सार
चारों जिलों से सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक श्रवण कुमार ने कहा कि करीब पांच फीसदी फसल को नुकसान पहुंचा है। हालांकि अलीगढ़ और हाथरस में किसानों इस नुकसान को 10 से 15 फीसदी तक होने का दावा किया है।
अतरौली रोड पर अहमदपुरा में बारिश से खराब फसल को देखता किसान भारत
- फोटो : संवाद
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विस्तार
तीन दिन से आंधी और बारिश ने अलीगढ़ मंडल के चारों जिलों में 15 फीसदी तक फसल खराब कर दी। पहले आलू में उम्मीद के मुताबिक दाम नहीं मिले, अब गेहूं को लेकर किसानों ने दाना पतला और भूसे का संकट पैदा होने की आशंका जताई है। 19 मार्च को बारिश के बाद अलीगढ़, हाथरस, एटा और कासगंज में कृषि व राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने जांच में पाया कि जिन किसानों ने हाल फिलहाल पानी में लगाया है, उनकी फसल प्रभावित हुई है।
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चारों जिलों से सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक श्रवण कुमार ने कहा कि करीब पांच फीसदी फसल को नुकसान पहुंचा है। हालांकि अलीगढ़ और हाथरस में किसानों इस नुकसान को 10 से 15 फीसदी तक होने का दावा किया है। अकेले अलीगढ़ जिले में इस बार गेहूं का रकबा 2.83 में से 1.89 लाख हेक्टेयर में है। इस हिसाब से करीब 18 से 25 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है।
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20 मार्च को अलीगढ़ से अतरौली के बीच कई खेतों में छह से सात इंच तक पानी भरा मिला, जबकि बाकी जगहों पर गेहूं की फसल जमीन पर बिछी दिखी। किसानों ने बताया कि पिछले सप्ताह तापमान 37 डिग्री तक पहुंचने पर सिंचाई की गई थी, लेकिन तीन दिन पहले अचानक मौसम बदल गया। पहले तेज आंधी ने फसल गिरा दी, फिर बारिश ने उसे भिगो दिया।
नतीजतन खेतों में पहले का पानी सूख नहीं पाया और ऊपर से बारिश होने से जलभराव बढ़ गया, जिससे फसल सड़ने का खतरा खड़ा हो गया है। हाथरस कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. अख्तर हुसैन वारसी के मुताबिक, यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान बढ़ सकता है। दाने के पतले रहने से बाजार भाव पर भी असर पड़ेगा।
किसानों के लिए तीन बड़े नुकसान
- पहला : इस बार आलू की खेती बढ़ने से गेहूं का रकबा घटा है। मुरादपुर निवासी किसान राकेश ने बताया कि फसल जमीन पर गिरने के साथ ऊपर से भीग चुकी है। मौजूदा हालात में दाना कमजोर रहने की आशंका है। यदि बारिश और हुई तो दाना काला पड़ सकता है, जिसकी बाजार में कीमत भी नहीं मिलती।
- दूसरा : दो से तीन सप्ताह में गेंहू की कटाई शुरू होगी, जिसे लेकर भी किसान परेशान हैं। फसल बिछने के कारण मशीन से कटाई हो नहीं सकती। ऐसे में मजदूरों पर निर्भरता बढ़ गई है, लेकिन मजदूरी महंगी होने के साथ मजदूर भी आसानी से नहीं मिल रहे। नरौना आकापुर निवासी रामवीर एक बीघा फसल की कटाई के लिए दो मन यानी करीब 80 किलो गेहूं देने तक को तैयार हैं, फिर भी उन्हें मजदूर नहीं मिल रहे।
- तीसरा : बारिश का असर भूसे पर भी पड़ रहा है। फसल भीगने से अच्छी गुणवत्ता का चारा निकलना मुश्किल हो जाएगा। अहमदपुरा निवासी भरत ने कहा कि पशुपालन को लेकर भी संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल बाजार में सूखा चारा करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है जो साल भर पहले तक 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल हुआ करता था। आगे इसके और महंगा होने की आशंका है।