{"_id":"69970388f1cf3c46150c71eb","slug":"ai-bring-broken-statues-back-to-life-2026-02-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"AI: टूटी मूर्तियों को फिर से जीवित करेगा एआई, अलीगढ़ व्यापारियों ने दिल्ली एआई समिट में कंपनियों संग किया करार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
AI: टूटी मूर्तियों को फिर से जीवित करेगा एआई, अलीगढ़ व्यापारियों ने दिल्ली एआई समिट में कंपनियों संग किया करार
AI: टूटी मूर्तियों को फिर से जीवित करेगा एआई, अलीगढ़ व्यापारियों ने दिल्ली एआई समिट में कंपनियों संग किया करार
Published by: चमन शर्मा
Updated Thu, 19 Feb 2026 06:05 PM IST
विज्ञापन
सार
टूटी हुई मूर्तियों को पुनर्जीवित करने में एआई एक डिजिटल जादूगर की तरह काम करता है। इसे डिजिटल रेस्टोरेशन कहा जाता है। इसमें पहले थ्रीडी स्कैनिंग की जाती है। इसके बाद एआई एल्गोरिदम से मूर्ति के बचे हुए हिस्सों का विश्लेषण किया जाता है।
एआई
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
ताले और पीतल उद्योग के लिए पहचान रखने वाले अलीगढ़ में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से टूटी मूर्तियों को फिर से जीवित किया जाएगा। पुरानी एंटीक और सजावटी मूर्तियों के कारोबार में एआई तकनीक का इस्तेमाल शुरू होगा, जिसके लिए अलीगढ़ के व्यापारियों ने दिल्ली एआई समिट में अलग अलग कंपनियों के साथ करार भी किया। प्रदेश के अलावा पूरे देश में एंटीक मूर्तियों से जुड़े परंपरागत आर्टवेयर और हार्डवेयर उद्योग व्यापार में एआई का इस्तेमाल पहली बार अलीगढ़ से शुरू होगा। खास तौर से माल के उत्पादन को बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने में एआई के उपयोग की तैयारी की जा रही है।
Trending Videos
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अलीगढ़ चैप्टर के चेयरमैन आलोक झा ने बताया कि टूटी हुई मूर्तियों को पुनर्जीवित करने में एआई एक डिजिटल जादूगर की तरह काम करता है। इसे डिजिटल रेस्टोरेशन कहा जाता है। इसमें पहले थ्रीडी स्कैनिंग की जाती है। इसके बाद एआई एल्गोरिदम से मूर्ति के बचे हुए हिस्सों का विश्लेषण किया जाता है। पैटर्न रिकग्निशन से मूर्ति की बनावट, शैली और उस काल की अन्य मूर्तियों के डेटा का मिलान किया जाता है। अगर किसी मूर्ति का हाथ गायब है तो एआई अपनी डेटाबेस (हजारों ऐतिहासिक मूर्तियों की लाइब्रेरी) से सीखकर यह अनुमान लगाता है कि उस काल की शैली के अनुसार हाथ की मुद्रा क्या रही होगी। कई तरह की डिजिटल प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद रेस्टोरेशन का काम शुरू होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि इस तरह की एल्गोरिदम कुछ कंपनियों ने विकसित की है, जिनका कार्य दिल्ली एआई समिट में देखने को मिला। कुछ देशों में अभी इस तकनीक पर कारोबार चल रहा है, जहां काफी अच्छी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। इसे और विस्तार में लाने के लिए आगामी 27 फरवरी से एआई सम्मेलन शुरू होगा। इसमें बायोमैट्रिक और डिजिटल लॉक बनाने के लिए भी एआई इस्तेमाल तकनीक को अपनाया जाएगा। यह लॉक हाथ के निशान या आंखों की पहचान से खुल सकेंगे।