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पाक में फंसा अलीगढ़ का बादल: सजा पूरी, पर जुर्माना न भरने से बढ़ी मुश्किलें, प्रशासन ने केंद्र को लिखा पत्र
Thu, 06 Aug 2026 10:16 AM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Thu, 06 Aug 2026 10:16 AM IST
सार
दिल्ली की एक एक्सपोर्ट कंपनी में सिलाई का काम करने के दौरान वर्ष 2022 में सोशल मीडिया के जरिये उनकी दोस्ती पाकिस्तान के बहाउद्दीन मंडी की रहने वाली युवती सना से हुई थी। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई। इसी के चक्कर में बादल बिना वीजा और पासपोर्ट के अवैध रूप से पाकिस्तान जा पहुंचे। 27 दिसंबर 2024 को पाकिस्तानी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
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बादल बाबू और सना रानी
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
प्यार में सरहद लांघकर पाकिस्तान पहुंचे अलीगढ़ के बादल बाबू की वतन वापसी के प्रयास अब तेजी से शुरू हो गए हैं। दो साल से पाकिस्तान की जेल और डिटेंशन सेंटर की हवा काट रहे बादल बाबू को वापस लाने के लिए अब जिला प्रशासन ने भी मोर्चा संभाल लिया है।
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परिजनों की गुहार के बाद डीएम ने विदेश और गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर युवक की जल्द भारत वापसी सुनिश्चित करने की मांग की है। बरला थाना क्षेत्र के गांव नगला खिटकारी निवासी बादल बाबू करीब दो साल पहले अचानक पाकिस्तान पहुंच गए थे। परिवार के मुताबिक, दिल्ली की एक एक्सपोर्ट कंपनी में सिलाई का काम करने के दौरान वर्ष 2022 में सोशल मीडिया के जरिये उनकी दोस्ती पाकिस्तान के बहाउद्दीन मंडी की रहने वाली युवती सना से हुई थी। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई।
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इसी के चक्कर में बादल बिना वीजा और पासपोर्ट के अवैध रूप से पाकिस्तान जा पहुंचे। 27 दिसंबर 2024 को पाकिस्तानी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अदालत में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 13 मई 2025 को वहां की कोर्ट ने उन्हें एक साल की सजा और पांच हजार पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाया।
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सजा पूरी, पर जुर्माना न भरने से बढ़ी मुश्किलें
परिजनों का कहना है कि बादल की एक साल की सजा तो पूरी हो चुकी है, लेकिन पाकिस्तानी मुद्रा में जुर्माना न चुका पाने के कारण उसे रिहाई नहीं मिल सकी। वर्तमान में वह लाहौर के डिटेंशन सेंटर में बंद है। इस बीच, चर्चा यह भी है कि उसने वहां अपना धर्म बदलकर अपना नाम आदिल रख लिया है।
बुधवार को बादल के माता-पिता कृपाल सिंह और गायत्री देवी ने जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी से गुहार लगाई और अपने बेटे को सुरक्षित भारत लाने की विनती की। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। इससे पहले एडीएम सिटी किंशुक श्रीवास्तव भी इस संबंध में विदेश मंत्रालय को पत्र भेज चुकी हैं।