Accident: पत्नी-बच्चों से किया छुट्टियों में घुमाने का वायदा, बेटी के लिए डोली सजानी थी, पर हुआ कुछ और
एक पिता के लिए इससे ज्यादा दर्दनाक और क्या होगा कि जिस बेटी के हाथों में मेहंदी रचाने के लिए वह सुयोग्य वर और अच्छे रिश्तों की तलाश कर रहा था, आज उसी लाडली की डोली की जगह उसकी अर्थी के सामने खड़ा होना पड़ा। देहरादून से अलीगढ़ आते-आते उनकी सांसें उखड़ने लगी थी।
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बच्चों के स्कूल की गर्मियों की छुट्टियां हो गई हैं पापा... बस, मैं भी अब ऑफिस से छुट्टी लेकर जल्द ही घर आ रहा हूं। इस बार पूरे परिवार को कहीं दूर घुमाने ले चलूंगा। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के हरदुआगंज शाखा के मैनेजर विवेक चंद्रा ने मंगलवार शाम ठीक सात बजे फोन पर अपने पिता अनिल कुमार से यह वादा किया था।
पिता खुश थे, बच्चे चहक रहे थे और पत्नी छुट्टियों की तैयारियों के सपने बुन रही थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। बुधवार को जब पोस्टमार्टम हाउस से विवेक का शव एंबुलेंस में रखने के लिए निकाला गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। साल 2016 में विवेक के साथ सात फेरे लेकर जिंदगी भर का हमसफर चुनने वाली पत्नी अपनी सुध-बुध खो बैठी। रह-रहकर बेहोश हो रही पत्नी की हालत देख वहां खड़े लोगों का दिल भी पसीज गया।
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विवेक के पिता अनिल कुमार ने रुंधे गले से बताया कि उनके दो बेटे हैं। विवेक सबसे बड़ा था। घर की जिम्मेदारी और खुशियों का जो मजबूत स्तंभ विवेक था, वह अब इस दुनिया में नहीं है। विवेक अपने पीछे एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं, जो अब भी शायद इस बात से अनजान हैं कि उनके पापा अब कभी उनके साथ छुट्टियों पर नहीं जा पाएंगे। पोस्टमार्टम हाउस पर विवेक के साथ बैंक में काम करने वाले उनके कई सहकर्मी और दोस्त भी पहुंचे। विवेक के व्यवहार को याद कर हर साथी की आंखें डबडबा गईं।
बेटी के लिए डोली सजानी थी, अर्थी उठानी पड़ी
एक पिता के लिए इससे ज्यादा दर्दनाक और क्या होगा कि जिस बेटी के हाथों में मेहंदी रचाने के लिए वह सुयोग्य वर और अच्छे रिश्तों की तलाश कर रहा था, आज उसी लाडली की डोली की जगह उसकी अर्थी के सामने खड़ा होना पड़ा। देहरादून से अलीगढ़ आते-आते उनकी सांसें उखड़ने लगी थी।
तान्या शर्मा के पिता जीवन लाल शर्मा जब बुधवार शाम करीब चार बजे बदहवास हालत में देहरादून से अलीगढ़ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर हर दिल रो पड़ा। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर एक पेड़ के नीचे बिल्कुल अकेले और बदहवास खड़े जीवन लाल शर्मा की पथराई आंखें जैसे आसमान से अपनी बेटी को वापस मांग रही थीं। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि उनके दो ही बच्चे थे, एक बेटा और एक बेटी तान्या। तान्या घर की रौनक थी, सबकी लाडली थी। पिता अपनी इस होनहार बेटी की शादी के सपने संजोए हुए थे।
पिता के नक्शेकदम पर ही चुनी थी बैंकिंग की राह
जीवन लाल शर्मा पंजाब नेशनल बैंक में बतौर प्रबंधक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। तान्या ने भी पिता को अपना आदर्श माना और उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए बैंकिंग क्षेत्र को अपने कॅरिअर के रूप में चुना। पिता को गर्व था कि उनकी बेटी भी उन्हीं की तरह एक बैंक अधिकारी बनकर समाज की सेवा कर रही है।
जब कुछ लोगों ने ढांढस बंधाने के लिए उनसे बात करने की कोशिश की, तो एक बेबस और टूटे हुए पिता ने रोते हुए सिर्फ अपने कांपते हाथ हिला दिए। आंसुओं के सैलाब के बीच उनके मुंह से बस इतने ही शब्द निकल सके मैं अब कुछ नहीं कह सकता... मेरी बेटी इस तरह हमें छोड़कर चली जाएगी, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।